Inner Line Permit India: अपने ही देश में घूमने के लिए चाहिए इनर लाइन परमिट, जानें किन 4 राज्यों में लागू है यह नियम
Inner Line Permit India: अपने ही देश में घूमने के लिए चाहिए इनर लाइन परमिट, जानें किन 4 राज्यों में लागू है यह नियम
Inner Line Permit India: भारत में एक राज्य से दूसरे राज्य जाना हर नागरिक का अधिकार माना जाता है। फिर भी पूर्वोत्तर के चार राज्यों में बाहरी राज्यों से आने वाले भारतीयों को प्रवेश से पहले इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है। यह व्यवस्था अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है। कई लोग इसे वीजा जैसी पाबंदी समझते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि घूमने पर रोक नहीं है। बस तय प्रक्रिया से अनुमति लेनी होती है। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा के बाद यह काम घर बैठे भी हो जाता है। परमिट की अवधि और फीस हर राज्य में अलग है। सही जानकारी होने पर यात्रा में कोई अड़चन नहीं आती।
Inner Line Permit India: क्या होता है इनर लाइन परमिट और कैसे मिलता है
इनर लाइन परमिट एक सरकारी अनुमति पत्र है जो बाहरी राज्यों के भारतीय नागरिकों को इन चार राज्यों में प्रवेश की अनुमति देता है। जहां ILP लागू नहीं है वहां का निवासी अगर घूमने या काम से इन राज्यों में जाना चाहता है तो पहले यह परमिट बनवाना जरूरी है। घूमने पर पूरी रोक नहीं है, केवल प्रक्रिया पूरी करनी होती है। घर बैठे ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। अवधि और फीस राज्य के नियमों पर निर्भर करती है।
अंग्रेजों के जमाने में हुई थी इस नियम की शुरुआत
इस नियम की शुरुआत 1873 में बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन के तहत अंग्रेजों ने की थी। उस समय नॉर्थ-ईस्ट में चाय और लकड़ी के कारोबार को सुरक्षित रखने तथा बाहरी दखल रोकने का मकसद था। आजादी के बाद भी व्यवस्था जारी रही, लेकिन उद्देश्य बदल गया। अब इसका मुख्य काम आदिवासी समुदायों की जमीन, संस्कृति, परंपरा और अधिकारों को बाहरी प्रभाव से बचाना है।
अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में परमिट की व्यवस्था
अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पर्यटक आकर्षित होते हैं, लेकिन यहां जाने से पहले ILP अनिवार्य है। टूरिस्ट को ई-आईएलपी के जरिए सीमित दिनों तक रुकने की सुविधा मिलती है। इसलिए टिकट और होटल के साथ परमिट का इंतजाम पहले कर लेना चाहिए। नागालैंड में भी यही नियम लागू है। वहां सरकारी पोर्टल पर तीस दिन के परमिट के लिए दो सौ रुपये फीस देनी होती है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के अलावा कुछ जगहों पर सुविधा केंद्र भी हैं।
मिजोरम और मणिपुर में कैसे बनता है ILP
मिजोरम में पर्यटकों के लिए आमतौर पर पंद्रह दिनों का परमिट जारी होता है, जिसे जरूरत पर और पंद्रह दिन बढ़ाया जा सकता है। छह महीने तक वैलिड रहने वाला नियमित परमिट भी उपलब्ध है। मणिपुर दिसंबर 2019 में इस सूची में शामिल हुआ। कम समय के लिए आने वाले पर्यटकों को यहां आमतौर पर तीस दिनों का अस्थायी परमिट मिलता है। इंफाल एयरपोर्ट, माओ गेट और जिरीबाम गेट जैसे प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर भी इसे बनवाया जा सकता है।
Inner Line Permit India: ILP बनवाने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत
परमिट के लिए वैध सरकारी फोटो पहचान पत्र सबसे जरूरी दस्तावेज होता है। इसके साथ हाल की खींची गई फोटो और यात्रा से जुड़ी जानकारी भी देनी पड़ती है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है इसलिए यात्री घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। इससे यात्रा की योजना बनाना पहले से आसान हो गया है। समय रहते आवेदन कर लेने से सीमा पर कोई दिक्कत नहीं होती।
पूर्वोत्तर के इन चार राज्यों की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए इनर लाइन परमिट आज भी महत्वपूर्ण व्यवस्था बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर की यात्रा पर निकलने से पहले इसकी जानकारी हर यात्री के लिए जरूरी है। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा ने प्रक्रिया को सरल बना दिया है। सही तैयारी के साथ निकलने पर इन खूबसूरत पहाड़ियों और घाटियों की सैर बिना किसी बाधा के यादगार अनुभव बन सकती है। नियम का पालन करके पर्यटक स्थानीय संस्कृति का सम्मान भी करते हैं।
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