Uttarakhand Congress Protest: हल्द्वानी विवाद और राहुल गांधी पर FIR के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद पर कांग्रेस का प्रदर्शन, CM आवास घेराव में पुलिस से झड़प
Uttarakhand Congress Protest: उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान कराए जाने और इस पर बयान देने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी (FIR) को लेकर कांग्रेस ने सोमवार, 7 सितंबर को राजधानी देहरादून में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के बावजूद राज्यभर से पहुंचे हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास की ओर कूच किया।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने हाथीबड़कला इलाके में भारी पुलिस बल और कई लेयर की मजबूत बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जैसे ही कांग्रेस का विशाल जुलूस बैरिकेड्स के समीप पहुंचा, कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की और नोकझोंक शुरू हो गई। कई कार्यकर्ताओं ने पुलिस घेरा तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिससे घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और शहर का यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक विवादित अनुष्ठान कराने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती और राहुल गांधी पर दर्ज फर्जी मुकदमा रद्द नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर तक अनवरत जारी रहेगा।
Uttarakhand Congress Protest: क्या है हल्द्वानी का कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद, जिसने छेड़ा सियासी संग्राम?
उत्तराखंड के मौजूदा सियासी भूचाल की शुरुआत नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान से जुड़ी हुई है। 8 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आगामी चुनावी तैयारियों के तहत इसी मैदान पर एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि खरगे की रैली संपन्न होने के दो दिन बाद, 10 अगस्त को एक दक्षिणपंथी संगठन (श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास) के कार्यकर्ताओं ने उस स्थल और मंच पर हवन व गंगाजल छिड़ककर कथित ‘शुद्धिकरण यज्ञ’ का आयोजन किया।
कांग्रेस ने इस कृत्य को दलित समाज के शीर्ष नेता और देश के प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष का खुला जातिवादी अपमान करार दिया। पार्टी का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की मूल भावना को रौंदते हुए अस्पृश्यता और छुआछूत जैसी कुरीतियों को नए रूप में जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस मुद्दे को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वयं संसद के उच्च सदन राज्यसभा में पुरजोर तरीके से उठाया और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर उत्तराखंड सरकार से दोषियों पर अविलंब मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने से और भड़की राजनीतिक आग
विवाद उस समय और अधिक गरमा गया जब नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने इस घटना की तीखी आलोचना करते हुए इसे सीधे तौर पर ‘अस्पृश्यता का आधुनिक रूप’ और अनुसूचित जाति समुदाय की गरिमा पर चोट बताया। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया था कि खुलेआम जातिगत विद्वेष फैलाने वालों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद, 30 अगस्त को हल्द्वानी नगर कोतवाली में वाल्मीकि समाज के एक व्यक्ति अमित कुमार की शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान की सफाई और अनुष्ठान में स्थानीय दलित समाज के लोगों ने भी भाग लिया था, ऐसे में राहुल गांधी द्वारा इसे छुआछूत से जोड़ना दलित समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। कांग्रेस ने इसे सत्ता का खुला दुरुपयोग और प्रतिशोध की राजनीति करार देते हुए राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया।
बारिश के बीच देहरादून में कांग्रेस का महाप्रदर्शन: 5 हजार कार्यकर्ताओं का हुजूम
सोमवार को देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में सुबह से ही कुमाऊं और गढ़वाल के सभी तेरह जिलों से आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सेवादल, महिला कांग्रेस और युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। तेज बारिश के बीच भी कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ और करीब पांच हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के हुजूम ने हाथों में पार्टी के झंडे और सरकार विरोधी तख्तियां लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ना शुरू किया।
इस विशाल विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, राष्ट्रीय सह-प्रभारी गुरदीप सिंह सप्पल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और वरिष्ठ विधायकों ने संयुक्त रूप से की। मार्च जैसे ही हाथीबड़कला मुख्य मार्ग पर पहुंचा, पुलिस ने लोहे के बैरिकेड्स लगाकर पूरे रास्ते को छावनी में तब्दील कर दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे पुलिस के साथ तीखी धक्का-मुक्की हुई। स्थिति बिगड़ती देख कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लेकर अस्थायी कैंप जेल भेजा गया, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
कांग्रेस नेतृत्व का सरकार पर सीधा हमला: ‘उत्तराखंड में अस्पृश्यता की वापसी बर्दाश्त नहीं’
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने धामी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अपनी सौहार्दपूर्ण परंपरा और भाईचारे के लिए जानी जाती है, किंतु भारतीय जनता पार्टी अपनी संकीर्ण मानसिकता के जरिए समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की साजिश रच रही है। शैलजा ने कहा कि जब देश के सबसे वरिष्ठ दलित नेता के सम्मान पर हमला होता है तो सरकार मूकदर्शक बनी रहती है, और जब राहुल गांधी दबे-कुचले वर्ग की आवाज उठाते हैं तो उन पर मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। यह सरकार की तानाशाही और अहंकार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाली पार्टी है, लेकिन सत्ता की लाठी और पुलिस के दम पर विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। गोदियाल ने साफ शब्दों में कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे देश में दलित चेतना और वंचितों के संघर्ष का प्रतीक हैं। उनका अपमान समूचे संविधान का अपमान है। जब तक इस षड्यंत्र में शामिल दक्षिणपंथी चेहरों और भाजपा नेताओं पर सख्त धाराओं में कार्रवाई नहीं होती, तब तक कांग्रेस का यह संघर्ष थमेगा नहीं।
भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पलटवार: ‘विपक्ष रच रहा झूठा नैरेटिव’
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विशुद्ध राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किसी भी व्यक्ति की जाति के आधार पर कोई तथाकथित शुद्धिकरण कार्यक्रम नहीं हुआ था। मुख्यमंत्री ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पास इस बात का कोई ठोस सबूत है कि यह कार्यक्रम जातिगत दुर्भावना से प्रेरित था, तो उसे जांच एजेंसियों के समक्ष पेश किया जाए; सरकार कानून सम्मत सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री धामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस 2027 के चुनावों को देखते हुए जनता के बीच जातिगत जहर घोलने और समाज को विभाजित करने का झूठा नैरेटिव गढ़ रही है। उधर, कांग्रेस के इस प्रदर्शन के विरोध में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने भी चंपावत, नई टिहरी और अन्य जनपदों में ‘सामाजिक समरसता संकल्प’ अभियान के तहत जवाबी प्रदर्शन किए। भाजपा का दावा है कि मैदान में केवल सामान्य स्वच्छता अभियान चलाया गया था, जिसे कांग्रेस जबरन दलित अस्मिता से जोड़कर राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रही है।
विवाद में कानूनी पेच: हाई कोर्ट की नजर और दोहरी प्राथमिकताओं की जांच
यह मामला अब केवल राजनीतिक सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी गलियारों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के समक्ष भी यह प्रकरण पहुंचा है, जहां राज्य सरकार ने अदालत को अवगत कराया है कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्षता से विवेचना कर रही है। जांच अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास के तमाम सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और सोशल मीडिया पोस्ट्स को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए सुरक्षित कर लिया है।
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के खिलाफ भी बेंगलुरु के एक थाने में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज किए जाने की सूचना सामने आई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने सार्वजनिक बयानों के जरिए इस कृत्य को उचित ठहराने की कोशिश की थी। इस जीरो एफआईआर को आगे की विधिक कार्रवाई के लिए उत्तराखंड पुलिस को स्थानांतरित किया जा रहा है। कानूनी जानकारों का मानना है कि दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मुकदमों के चलते जांच एजेंसियों को अब साक्ष्यों की कसौटी पर बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा।
Uttarakhand Congress Protest: 2027 के चुनावी समर से पहले उत्तराखंड में गरमाया दलित अस्मिता का मुद्दा
देहरादून में भारी बारिश के बीच हुए इस विशाल प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस हल्द्वानी प्रकरण और राहुल गांधी पर दर्ज मुकदमे को 2027 के विधानसभा चुनाव तक एक धारदार चुनावी हथियार बनाए रखने के मूड में है। राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जाति वर्ग की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को देखते हुए दोनों ही दल इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई राजनीतिक जमीन नहीं छोड़ना चाहते।
एक तरफ जहां कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को संविधान की रक्षा, सामाजिक समानता और दलित मान-सम्मान की लड़ाई बताकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं भाजपा इसे विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने और धार्मिक-सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की विपक्षी साजिश बता रही है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट में प्रस्तुत होने वाली जांच रिपोर्ट और पुलिस की विधिक कार्रवाई ही यह तय करेगी कि उत्तराखंड की राजनीति में उठा यह तूफान किस करवट बैठता है।
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