9/11 25 Years Later: Omar al-Bayoumi के नए वीडियो से Saudi Connection पर फिर सवाल
Anwar al-Awlaki के साथ पेंटबॉल वीडियो से 9/11 और Saudi Connection की जांच फिर चर्चा में
9/11 25 Years Later: संयुक्त राज्य अमेरिका में हुए इतिहास के सबसे भीषण 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के करीब आते ही एक बार फिर इस साजिश के अनसुलझे पन्नों ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। हमलों के ढाई दशक बाद सामने आई एक अप्रकाशित और अत्यंत संवेदनशील वीडियो फुटेज ने सऊदी नागरिक ओमर अल-बायूमी की भूमिका को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पुरानी जांचों और निष्कर्षों को पुनः सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
हाल ही में सार्वजनिक हुई इस वीडियो फुटेज में ओमर अल-बायूमी अल-कायदा के खूंखार आतंकी और प्रमुख रणनीतिकार रहे अनवर अल-अवलाकी के साथ सैन डिएगो के आसपास बेफिक्र अंदाज में पेंटबॉल खेलता और बातचीत करता हुआ दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, उस दौरान वहां सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी के साक्ष्य भी मिले हैं। अल-बायूमी का नाम 9/11 की जांच में सबसे संदिग्ध पात्रों में इसलिए रहा है क्योंकि उसने अमेरिका की धरती पर कदम रखने वाले दो मुख्य आत्मघाती अपहरणकर्ताओं—नवाफ अल-हाजमी और खालिद अल-मिहधर—को सैन डिएगो में शरण, अपार्टमेंट और वित्तीय सहायता मुहैया कराई थी। इस नए वीडियो के सामने आने से 9/11 पीड़ितों के परिजनों द्वारा अमेरिकी अदालतों में लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई में सऊदी अरब की कथित संलिप्तता का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है।
9/11 25 Years Later: अप्रकाशित वीडियो फुटेज का सनसनीखेज सच
सामने आई इस गुप्त वीडियो फुटेज ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) और सीआईए (CIA) के उन पुराने दावों को हिलाकर रख दिया है, जिनमें अल-बायूमी को केवल एक ‘सहज मददगार’ या सामान्य सऊदी छात्र मानकर छोड़ दिया गया था। जांच रिपोर्टों के अनुसार, यह फुटेज वर्ष 2001 में हुए आतंकी हमलों के कुछ समय बाद ही जांच एजेंसियों के हाथ लग गई थी, किंतु दशकों तक इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और क्लासिफाइड दस्तावेजों की आड़ में आम जनता और अदालतों से छिपाकर रखा गया।
वीडियो में अल-बायूमी को अनवर अल-अवलाकी के साथ दोस्ताना माहौल में पेंटबॉल के खेल में भाग लेते और रणनीतिक चर्चा करते देखा गया है। अनवर अल-अवलाकी आगे चलकर अरब प्रायद्वीप में अल-कायदा (AQAP) का शीर्ष कमांडर और पश्चिमी देशों में युवाओं को चरमपंथ की ओर धकेलने वाला सबसे बड़ा प्रचारक बना था, जिसे बाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार गिराया गया था।
वीडियो में सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय के एक सेवारत अधिकारी की मौजूदगी इस संदेह को और गहरा करती है कि क्या अल-बायूमी वास्तव में सऊदी खुफिया तंत्र (General Intelligence Directorate) और अल-कायदा के बीच की एक गुप्त कड़ी के रूप में काम कर रहा था। हालांकि, किसी खेल के वीडियो में एक साथ दिखने मात्र से किसी व्यक्ति की कानूनी संलिप्तता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती, लेकिन यह उन दावों को पूरी तरह खारिज करता है कि अल-बायूमी का चरमपंथियों से कोई पूर्व संपर्क नहीं था।
दो मुख्य विमान अपहरणकर्ताओं का मददगार: सैन डिएगो में अपार्टमेंट से लेकर बैंक खाते तक की व्यवस्था
ओमर अल-बायूमी की पृष्ठभूमि 9/11 की साजिश के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण और रहस्यमयी मानी जाती है। 11 सितंबर 2001 को पेंटागन में अमेरिकी एयरलाइंस की फ्लाइट 77 को टकराने वाले दो प्रमुख अल-कायदा अपहरणकर्ता—नवाफ अल-हाजमी और खालिद अल-मिहधर—जनवरी 2000 में लॉस एंजिल्स हवाई अड्डे पर उतरे थे। दोनों को अंग्रेजी भाषा का बिल्कुल ज्ञान नहीं था और वे पश्चिमी तौर-तरीकों से पूरी तरह अनभिज्ञ थे।
अमेरिका पहुंचने के तुरंत बाद अल-बायूमी ने लॉस एंजिल्स के एक हलाल रेस्टोरेंट में दोनों से मुलाकात की और उन्हें तुरंत अपने साथ सैन डिएगो ले आया। वहां अल-बायूमी ने अपने ही अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में दोनों आतंकियों के लिए फ्लैट किराए पर लिया, उनके पट्टे (Lease) पर सह-हस्ताक्षर (Co-signer) किए, उनके शुरुआती किराए का भुगतान किया और बैंक ऑफ अमेरिका में उनके खाते खुलवाने में व्यक्तिगत मदद की।
उसने दोनों को स्थानीय उड़ान प्रशिक्षण स्कूल (Flight School) में दाखिला दिलाने में भी सहायता की। अल-बायूमी हमेशा यह दावा करता रहा कि दोनों से उसकी मुलाकात विशुद्ध रूप से आकस्मिक और मानवीय आधार पर हुई थी, किंतु एक सामान्य सऊदी छात्र या नागरिक द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकियों को ऐसी संगठित और त्वरित मदद मिलना जांचकर्ताओं के गले कभी नहीं उतरा।
FBI के अवर्गीकृत दस्तावेज: 50-50 संभावना थी कि हमलों की पूर्व जानकारी थी
वर्ष 2004 में अमेरिकी संसद द्वारा गठित ‘9/11 कमीशन’ ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में ओमर अल-बायूमी को यह कहते हुए क्लीन चिट दे दी थी कि उसके किसी हिंसक चरमपंथी संगठन से प्रत्यक्ष संबंध या जानबूझकर आतंकियों की मदद करने के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, वर्षों के जन-दबाव के बाद 2021 और 2022 में राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकारी आदेश के तहत जब एफबीआई के गोपनीय फाइलों को डी-क्लासिफाइड (सार्वजनिक) किया गया, तो पूरी कहानी पलट गई।
जून 2022 में सार्वजनिक किए गए एक अत्यंत गोपनीय एफबीआई मेमोरेंडम में जांचकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि इस बात की ’50-50 संभावना’ (Fifty-fifty chance) थी कि ओमर अल-बायूमी को अमेरिका पर होने वाले हमलों की योजना और साजिश की पहले से सटीक जानकारी थी।
एफबीआई के आंतरिक दस्तावेजों में यह भी दर्ज था कि अल-बायूमी को सऊदी सरकार की नागरिक उड्डयन एजेंसी से नियमित रूप से वजीफा और वेतन मिलता था, भले ही वह कभी काम पर न गया हो। इसके अलावा, जब हाजमी और मिहधर सैन डिएगो पहुंचे, तो अचानक अल-बायूमी के मासिक भत्तों में भारी उछाल दर्ज किया गया था, जो संभवतः आतंकियों के लॉजिस्टिकल खर्चों को पूरा करने के लिए भेजा गया था।
ब्रिटेन में बरामद डायरियां और कैपिटल हिल का संदिग्ध वीडियो
अल-बायूमी से जुड़े रहस्यमयी साक्ष्यों का दायरा केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। 9/11 हमलों के कुछ ही दिनों बाद ब्रिटिश आतंकवाद-रोधी पुलिस ने बर्मिंघम स्थित अल-बायूमी के आवास पर छापा मारा था, जहां से भारी मात्रा में दस्तावेज, हस्तलिखित डायरियां और वीडियो कैसेट्स बरामद किए गए थे।
हाल ही में वर्ष 2024 के दौरान न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में 9/11 पीड़ितों के परिवारों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में यह खुलासा हुआ कि अल-बायूमी के पास से 1999 का एक ऐसा वीडियो मिला था, जिसमें वह वाशिंगटन डीसी स्थित अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल हिल), व्हाइट हाउस और अन्य महत्वपूर्ण इमारतों की विस्तृत रेकी (Surveillance) करता हुआ नजर आ रहा था।
वीडियो में सुरक्षा द्वारों, पुलिस चौकियों और इमारतों की संरचनात्मक कमजोरियों पर विशेष फोकस किया गया था। अल-बायूमी की एक निजी डायरी में गणितीय सूत्रों के साथ एक हवाई जहाज का स्केच और उसकी गति व पतन से जुड़े समीकरण भी दर्ज मिले थे, जिसे अभियोजकों ने अपहरण के पूर्वाभ्यास का ब्लूप्रिंट करार दिया है।
सऊदी अरब की संप्रभुता और पीड़ितों के परिवारों की 25 साल लंबी कानूनी जंग
अल-बायूमी के इस नए वीडियो फुटेज के सार्वजनिक होने से 9/11 हमलों में मारे गए करीब 3,000 निर्दोष नागरिकों के परिवारों द्वारा सऊदी सरकार के खिलाफ दायर अरबों डॉलर के मुकदमे को भारी कानूनी मजबूती मिलने की संभावना है। ‘9/11 फैमिलीज यूनाइटेड’ नामक संगठन लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि 19 में से 15 विमान अपहरणकर्ता सऊदी अरब के नागरिक थे और उन्हें अमेरिका में स्थापित सऊदी राजनयिकों और खुफिया एजेंटों के एक संगठित नेटवर्क द्वारा वित्तीय व बुनियादी ढांचागत सहायता प्रदान की गई थी।
दूसरी ओर, सऊदी अरब की सरकार ने 2001 से लेकर आज तक इन सभी आरोपों को सिरे से और दृढ़ता के साथ खारिज किया है। सऊदी विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख यही रहा है कि सऊदी अरब स्वयं अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का बड़ा शिकार रहा है और किसी भी सऊदी सरकारी एजेंसी या अधिकारी की 9/11 हमलों की साजिश में रत्ती भर भी कोई भूमिका नहीं थी।
अल-बायूमी ने भी सऊदी अरब लौटने के बाद मीडिया साक्षात्कारों में खुद को एक निर्दोष और परोपकारी व्यक्ति बताया है जिसे वैश्विक भू-राजनीति में बलि का बकरा बनाया जा रहा है। अमेरिकी अदालतों में अब तक सऊदी सरकार को ‘फॉरेन सॉवरेन इम्युनिटीज एक्ट’ (FSIA) के तहत संप्रभु सुरक्षा हासिल रही है, जिसे ‘जस्टिस अगेंस्ट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म एक्ट’ (JASTA) के जरिए चुनौती दी जा रही है।
9/11 25 Years Later: क्या 25 साल बाद सामने आएगा 9/11 की साजिश का पूरा सच?
9/11 के आतंकी हमलों को 25 साल पूरे होने जा रहे हैं, किंतु इतिहास के सबसे बड़े आतंकी हमले का पूरा सच आज भी वैश्विक कूटनीति, तेल राजनीति और सामरिक गठबंधनों के अंधेरे कोनों में दबा हुआ है। ओमर अल-बायूमी, अनवर अल-अवलाकी और सऊदी अधिकारियों की साझा मौजूदगी वाली यह नई वीडियो फुटेज इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि उस समय की आधिकारिक जांचों में कई महत्वपूर्ण कड़ियों को या तो नजरअंदाज किया गया या जानबूझकर दबा दिया गया।
यह नया खुलासा 9/11 की न्यायिक जांच के लिए एक वाटरशेड मोमेंट साबित हो सकता है। यह न केवल अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की प्राथमिक विफलताओं को पुनः कटघरे में खड़ा करता है, बल्कि वॉशिंगटन और रियाद के बीच के रणनीतिक रिश्तों में भी असहज सवाल खड़े करता है।
आने वाले महीनों में जब अमेरिकी संघीय अदालतें इन नए डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक समीक्षा करेंगी, तभी यह अंतिम रूप से तय हो सकेगा कि क्या अल-बायूमी केवल संयोगवश आतंकियों के संपर्क में आया एक मददगार था या फिर वह अमेरिकी सरजमीं पर इतिहास के सबसे काले दिन की पटकथा लिखने वाले गुप्त तंत्र का एक सक्रिय और प्रशिक्षित मोहरा था।
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