Fake Rabies Vaccine India: नकली Abhayrab वैक्सीन पर देशभर में अलर्ट, संदिग्ध बैच जांच में फेल
Abhayrab के संदिग्ध बैच को लेकर राज्यों को अलर्ट, नकली वैक्सीन की सप्लाई चेन जांच के घेरे में
Fake Rabies Vaccine India: देश में जीवनरक्षक दवाओं और टीकों के समानांतर चल रहे नकली दवाओं के अवैध सिंडिकेट को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आवारा या संक्रमित जानवरों के काटने के बाद शत-प्रतिशत जानलेवा मानी जाने वाली रेबीज बीमारी से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली सबसे प्रमुख एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) Abhayrab के एक संदिग्ध बैच को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी डीसीजीआई (DCGI) ने देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलर्स को हाई अलर्ट जारी किया है।
केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL), कसौली में की गई उच्चस्तरीय जांच में इस संदिग्ध बैच का सैंपल गुणवत्ता और प्रभावशीलता के अनिवार्य ‘पोटेंसी टेस्ट’ (Potency Test) में पूरी तरह विफल पाया गया है। सरकारी लैब ने इसे ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित किया है। वैक्सीन में वायरस से लड़ने वाले एंटीबॉडीज पैदा करने की क्षमता न होने के कारण यह सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ का मामला बन गया है। इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस ने एक अवैध नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि केंद्रीय एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खतरनाक नकली माल देश के किन-किन मेडिकल स्टोर्स और क्लीनिकों तक पहुंचा है।
Fake Rabies Vaccine India: मुखर्जी नगर के अवैध ठिकाने से जब्त हुए थे वायल
जांच एजेंसियों और ड्रग रेगुलेटर के अनुसार, यह पूरा विवाद अभयराब (Abhayrab) वैक्सीन के बैच नंबर KE25012 से जुड़ा हुआ है। औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में एक बिना लाइसेंस वाले संदिग्ध परिसर पर गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा था। इस छापेमारी के दौरान वहां से भारी मात्रा में उक्त बैच नंबर वाली वैक्सीन की वायल बरामद की गई थीं।
बरामद वायल के नमूने तुरंत जांच के लिए हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला भेजे गए। कसौली लैब देश में टीकों की गुणवत्ता जांचने वाली सर्वोच्च संस्था है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जब्त किए गए नमूनों में वह न्यूनतम जैविक क्षमता और एंटीजन मौजूद ही नहीं थे, जो रेबीज वायरस के न्यूरोलॉजिकल संक्रमण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अनिवार्य होते हैं। इसका सीधा अर्थ यह निकला कि यदि किसी व्यक्ति को पागल कुत्ते या संक्रमित जानवर के काटने के बाद यह नकली टीका लगाया गया होगा, तो उसके शरीर में रेबीज के विरुद्ध कोई रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हुई होगी।
निर्माता कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स ने पल्ला झाड़ा: पैकेजिंग में मिले 17 बड़े अंतर
रेबीज वैक्सीन की कमी और सुरक्षा को देखते हुए जब ड्रग कंट्रोलर ने अभयराब की मूल निर्माता कंपनी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (IIL) से जवाब तलब किया, तो कंपनी ने एक विस्तृत और चौंकाने वाला खुलासा किया। कंपनी के गुणवत्ता नियंत्रण दल ने जब जब्त किए गए वायल की तुलना अपनी फैक्ट्री में सुरक्षित रखे गए मूल बैच रिकॉर्ड और वास्तविक कंट्रोल सैंपल्स से की, तो यह स्पष्ट हो गया कि बाजार में पकड़े गए वायल कंपनी द्वारा निर्मित नहीं हैं, बल्कि यह हुबहू दिखने वाला नकली उत्पाद है।
कंपनी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, जब्त किए गए वायल और उसके बॉक्स में मूल उत्पाद की तुलना में 17 गंभीर विसंगतियां पाई गईं। इनमें वायल की एल्युमिनियम सील का रंग, रबर स्टॉपर की बनावट, लेबल पर प्रयुक्त फॉन्ट, क्यूआर कोड की प्रिंटिंग तकनीक, लाइसेंसिंग विवरण का प्रारूप और पैकेजिंग कार्टन का शेड पूरी तरह अलग था। जालसाजों ने असली बैच नंबर KE25012 का उपयोग करके नकली शीशियों में प्रभावहीन तरल भरकर उसे बाजार में उतार दिया था, ताकि सामान्य फार्मासिस्ट या डॉक्टर पहली नजर में धोखा खा जाएं।
DCGI का सभी राज्यों को निर्देश: संदिग्ध स्टॉक जब्त करें, सप्लाई चेन खंगालें
मामले की भयावहता को देखते हुए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को आपातकालीन परिपत्र जारी किया है। डीसीजीआई ने निर्देश दिया है कि सभी जिला औषधि निरीक्षक अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सरकारी व निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, थोक दवा मंडियों और खुदरा दवा दुकानों का सघन निरीक्षण करें।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि कहीं भी बैच नंबर KE25012 से जुड़ा स्टॉक दिखाई दे, तो उसे तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया जाए और उसकी बिक्री व वितरण पर पूर्ण रोक लगाई जाए। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नकली टीके का निर्माण किस गुप्त फैक्ट्री में किया जा रहा था और इसे किन डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए सामान्य मेडिकल सप्लाई चेन में खपाया गया।
रेबीज का संक्रमण और नकली वैक्सीन का खतरा: क्यों है यह जीवन-मरण का प्रश्न?
चिकित्सा विज्ञान में रेबीज को दुनिया के सबसे जानलेवा जूनोटिक संक्रमणों में गिना जाता है। यदि रेबीज वायरस से संक्रमित कुत्ता, बिल्ली, बंदर या चमगादड़ किसी मनुष्य को काट ले या खरोंच मार दे, तो वायरस तंत्रिका तंत्र के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब किसी मरीज में रेबीज के नैदानिक लक्षण (जैसे हाइड्रोफोबिया या पानी से डर, बेचैनी और मतिभ्रम) प्रकट हो जाते हैं, तो उसके बाद दुनिया की कोई भी दवा मरीज की जान नहीं बचा सकती और मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत होती है।
यही कारण है कि जानवर के काटने के तुरंत बाद ‘पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस’ (PEP) के तहत दी जाने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन ही इंसान की जान बचाने का एकमात्र उपाय होती है। यह टीका शरीर में वायरस के सक्रिय होने से पहले ही मजबूत एंटीबॉडीज तैयार कर देता है। ऐसे में यदि किसी पीड़ित को समय पर असली वैक्सीन के बजाय पानी या घटिया तत्वों से बनी नकली वैक्सीन लगा दी जाए, तो यह उस मरीज के लिए प्रत्यक्ष मृत्युदंड जैसा साबित हो सकता है। भारत में वर्ष 2024 के अध्ययनों के अनुसार प्रतिवर्ष औसतन 5,700 से अधिक लोग रेबीज के कारण दम तोड़ते हैं, जो वैश्विक स्तर पर एक बड़ी संख्या है।
पूर्व में भी सामने आ चुके हैं मामले: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठी थी चिंता
भारतीय दवा बाजार में नकली अभयराब वैक्सीन का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनवरी 2025 में भी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड ने बैच नंबर KA24014 के नाम पर चल रहे नकली टीकों के संबंध में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को लिखित शिकायत दी थी। उस समय भी फर्जी पैकेजिंग के जरिए अवैध टीकों को बाजार में उतारा गया था।
भारत में निर्मित होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की वैश्विक मांग को देखते हुए इस तरह के मामलों का अंतरराष्ट्रीय असर भी पड़ता है। पूर्व में ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य प्राधिकारियों ने भारत की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए एक मेडिकल एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें भारत में पशुओं के काटने पर अज्ञात या अनधिकृत स्रोतों से एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने से बचने और देश लौटने पर पुनः चिकित्सीय परीक्षण कराने की सलाह दी गई थी। ऐसे मामले भारत के विशाल फार्मास्यूटिकल उद्योग की वैश्विक साख और ‘विश्व की फार्मेसी’ वाली छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
क्या सभी Abhayrab टीके असुरक्षित हैं? जानिए आम नागरिकों के लिए जरूरी तथ्य
इस संवेदनशील खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और आम जनता में व्यापक घबराहट फैलना स्वाभाविक है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और निर्माता कंपनी ने स्पष्ट किया है कि बाजार में उपलब्ध सभी अभयराब वैक्सीन नकली या खराब नहीं हैं। यह ब्रांड देश भर में दशकों से रेबीज टीकाकरण का सबसे प्रमुख आधार रहा है और कंपनी द्वारा अधिकृत अधिकृत वितरकों (Authorized Distributors) और संस्थागत आपूर्ति के जरिए बेचे जाने वाले टीकों की गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित है।
मूल निर्माता कंपनी द्वारा निर्मित असली बैच KE25012 में 83,370 वायल तैयार किए गए थे, जो कठोर गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरने के बाद ही जारी हुए थे। समस्या उन नकली वायल के साथ है जिन्हें अवैध सिंडिकेट ने इसी बैच नंबर का हूबहू फर्जी लेबल लगाकर चोरी-छिपे बाजार में उतारा। इसलिए आम जनता को किसी भी तरह के सामान्यीकृत आतंक (Panic) में आने की आवश्यकता नहीं है, किंतु सतर्कता बरतना अनिवार्य है।
Fake Rabies Vaccine India: ड्रग सर्विलांस और सख्त कानून की दरकार
नकली अभयराब वैक्सीन का यह सनसनीखेज मामला भारत के दवा आपूर्ति तंत्र की कमजोर कड़ियों पर एक तीखा प्रहार है। जब लालच के चलते जीवनरक्षक टीकों की नकली प्रतियां बनाकर मरीजों की जान दांव पर लगा दी जाती है, तो यह केवल बौद्धिक संपदा या ट्रेडमार्क का उल्लंघन नहीं, बल्कि हत्या के प्रयास जैसा जघन्य अपराध बन जाता है।
डीसीजीआई द्वारा राज्यों को अलर्ट करना और दिल्ली पुलिस की त्वरित गिरफ्तारी इस दिशा में सही प्रशासनिक कदम हैं, किंतु भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सभी जीवनरक्षक टीकों पर अनिवार्य बारकोड ट्रैकिंग, डिजिटल ऑथेंटिकेशन और नकली दवा माफियाओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत कठोरतम दंडात्मक कानून लागू करना समय की सबसे बड़ी मांग है।
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