Make in India Defence: डिफेंस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान से पीछे क्यों है भारत, जानें असली वजह और भारत की बड़ी छलांग
Make in India Defence: वैश्विक डिफेंस एक्सपोर्ट रैंकिंग में भारत पाकिस्तान से पीछे है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बताते हैं। जानें इसकी वजह और भारत की रक्षा निर्यात में तेज रफ्तार तरक्की।
Make in India Defence: दुनियाभर में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव, चाहे वह रूस-यूक्रेन युद्ध हो, पश्चिम एशिया का संकट हो या दक्षिण चीन सागर की तनातनी, इन सबने वैश्विक डिफेंस मार्केट को तेजी से बड़ा बना दिया है। हर देश अपनी सेना को आधुनिक तकनीक जैसे AI, ड्रोन और साइबर सुरक्षा से लैस करने की होड़ में लगा है। ऐसे में डिफेंस एक्सपोर्ट के मामले में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है, भारत भले ही तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता हो, लेकिन रक्षा निर्यात के मामले में यह पाकिस्तान से भी पीछे खड़ा है।
Make in India Defence: SIPRI रिपोर्ट में क्या आया सामने
स्वीडन के थिंक टैंक SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की हाल की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि वैश्विक रक्षा निर्यात में भारत का स्थान पाकिस्तान से पीछे है। भारत महज 0.2% हिस्सेदारी के साथ 27वें स्थान पर है, जबकि पाकिस्तान 0.4% हिस्सेदारी के साथ 21वें स्थान पर खड़ा है। वैश्विक डिफेंस एक्सपोर्ट का कुल आंकड़ा 138 अरब डॉलर को पार कर चुका है, और आने वाले समय में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
पाकिस्तान भारत से आगे कैसे है
डिफेंस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान के भारत से आगे रहने की सबसे बड़ी वजह चीन है। दरअसल पाकिस्तान खुद कोई हथियार नहीं बनाता, बल्कि चीन के साथ मिलकर JF-17 थंडर फाइटर जेट को असेंबल करने का काम करता है और फिर इन्हें म्यांमार, नाइजीरिया या अजरबैजान जैसे देशों को बेच देता है। यह पूरा आंकड़ा पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपोर्ट के खाते में जुड़ जाता है, जिससे उसकी हिस्सेदारी बढ़ जाती है।
सस्ते चीनी हथियारों का फायदा उठा रहा पाकिस्तान
अफ्रीका और कई कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देश कम कीमत के चीनी हथियारों को प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान से हथियार मंगाते हैं, जिससे उसका एक्सपोर्ट वॉल्यूम लगातार बढ़ता जाता है। वहीं भारत का पूरा ध्यान निर्यात बढ़ाने की बजाय अपनी सेना को मजबूत बनाने पर रहा है। यही कारण है कि भारत दशकों तक दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा है, निर्यातक नहीं।
भारत का रिकॉर्ड डिफेंस एक्सपोर्ट और महत्वाकांक्षी लक्ष्य
हालांकि मौजूदा समय में ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 0.2% है, फिर भी भारत ने इस साल 38,424 करोड़ रुपये यानी 4.6 बिलियन डॉलर का अपना अब तक का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात दर्ज किया है। ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और आर्टिलरी गन्स के जरिए भारत डिफेंस एक्सपोर्ट के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है, जो भारत की महत्वाकांक्षा को साफ दिखाता है।
Make in India Defence: दुनियाभर से बढ़ रही भारतीय हथियारों की मांग
मौजूदा समय में दुनिया के 80 से अधिक देश भारत से रक्षा उपकरण खरीद रहे हैं। ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के लिए फिलीपींस ने हाल ही में भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील की है, जबकि इंडोनेशिया के साथ 3,800 करोड़ रुपये यानी 440 मिलियन डॉलर का सौदा एडवांस्ड स्टेज पर है। अर्मेनिया समेत कई अफ्रीकी देशों में भारत के आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर की जबरदस्त मांग देखी जा रही है। अमेरिका और फ्रांस जैसे देश भी भारत से विमानों के पुर्जे, फ्यूजलेज, मिश्र धातु और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण खरीद रहे हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान से पीछे रहना आंकड़ों का एक हिस्सा भर है, जबकि असली तस्वीर कहीं ज्यादा उम्मीद जगाने वाली है। पाकिस्तान की बढ़त मुख्य रूप से चीन के सस्ते हथियारों को असेंबल करके आगे बेचने की रणनीति पर टिकी है, जबकि भारत अपनी खुद की तकनीक और क्षमता के दम पर धीरे-धीरे वैश्विक बाजार में पैर जमा रहा है। ब्रह्मोस, आकाश और पिनाका जैसे स्वदेशी हथियारों की बढ़ती मांग बताती है कि भारत आने वाले वर्षों में डिफेंस एक्सपोर्ट के मामले में एक बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है।
Read More Here:-
Mumbai Underwater News: समुद्र के बढ़ते जलस्तर से मुंबई पर बढ़ा खतरा
Saturday Puja Vidhi: शनिदेव के साथ हनुमान जी की उपासना क्यों है खास?
Budgam Encounter: बडगाम एनकाउंटर में लश्कर कमांडर यासिर ढेर, सुरक्षाबलों की कार्रवाई