Highest Cannabis Consumption: किस देश में सबसे ज्यादा पिया जाता है गांजा, जानें भारत का नंबर और यहां के सख्त कानून
Highest Cannabis Consumption: किस देश में सबसे ज्यादा पिया जाता है गांजा, जानें भारत का नंबर और यहां के सख्त कानून
Highest Cannabis Consumption: एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली फ्लाइट AI-2379 के मुख्य पायलट को साइकोएक्टिव ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। एविएशन सेक्टर में सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कड़ा कदम उठाया गया है। इस हाई-प्रोफाइल घटना के बाद नशे और गांजे जैसे साइकोएक्टिव पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि दुनियाभर में गांजे के सेवन का रुझान क्या है और इस मामले में भारत की स्थिति कहां खड़ी है।
Highest Cannabis Consumption: गांजा सेवन में कौन सा देश है सबसे आगे
अंतरराष्ट्रीय ड्रग रिपोर्ट्स और वैश्विक अध्ययनों के मुताबिक दक्षिण अमेरिकी देश चिली आबादी के प्रतिशत के हिसाब से गांजा सेवन में सबसे आगे है, जहां करीब 34.8% लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद कनाडा का नंबर आता है, जहां राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मान्यता मिलने के बाद 32.7% आबादी गांजे का सेवन करती है। तीसरे स्थान पर पापुआ न्यू गिनी है, जहां यह आंकड़ा 29.5% है, जबकि इजराइल में 27% और अमेरिका में करीब 22% लोग गांजे का सेवन करते हैं। नाइजीरिया जैसे देशों में भी 15% से ज्यादा नागरिक इसका इस्तेमाल करते हैं।
वैश्विक रैंकिंग में भारत की स्थिति
संयुक्त राष्ट्र यानी UNODC के आंकड़ों पर आधारित अध्ययनों के अनुसार भारत की कुल आबादी का करीब 3 प्रतिशत हिस्सा, यानी लगभग 3 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में कैनबिस उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो वैश्विक सूची में भारत काफी पीछे है, लेकिन विशाल जनसंख्या की वजह से उपभोग करने वालों की कुल संख्या काफी बड़ी हो जाती है। दिलचस्प बात यह है कि शहर-स्तरीय वैश्विक रिपोर्टों में भारत की राजधानी दिल्ली गांजे की सर्वाधिक खपत वाले शहरों में तीसरे और मुंबई छठे स्थान पर दर्ज की गई है।
भारत में कैनबिस के इस्तेमाल का पूरा आंकड़ा
एम्स और केंद्र सरकार द्वारा जारी मैग्नीट्यूड ऑफ सब्सटेंस यूज इन इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 2.8% नागरिक, यानी लगभग 3.1 करोड़ लोग भांग, गांजा या चरस का इस्तेमाल करते हैं। इस कुल आंकड़े में से केवल 1.2% आबादी ऐसी है, जो गांजा और चरस का नियमित सेवन करती है। वहीं बाकी 1.6 प्रतिशत लोग मुख्य रूप से परंपरा और त्योहारों से जुड़ी भांग का इस्तेमाल करते हैं, जिससे साफ होता है कि भारत में कैनबिस का इस्तेमाल अलग-अलग रूपों में बंटा हुआ है।
कैनबिस के तीन रूप और दुनिया में बदलते कानून
कैनबिस पौधे का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन रूपों में होता है। पहला रूप भांग है, जो पत्तियों और बीजों से बनती है और इसका नशा अपेक्षाकृत कम होता है। दूसरा रूप चरस यानी हशीश है, जो पौधे के रेजिन से तैयार होती है, जबकि तीसरा रूप गांजा है, जो पौधे की कली और फूल से बनता है और जिसमें THC का स्तर काफी अधिक होता है। दुनियाभर में कैनबिस को लेकर कानूनी नजरिया भी तेजी से बदल रहा है, अमेरिका के 15 राज्यों में मनोरंजक उपयोग और 35 राज्यों में मेडिकल इस्तेमाल को वैध किया जा चुका है, वहीं 34 से ज्यादा देशों ने मेडिकल मारिजुआना को कानूनी मान्यता दे दी है।
Highest Cannabis Consumption: भारत में गांजा रखने पर क्या है सजा का प्रावधान
भारत में प्राचीन काल से ही धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों पर भांग का इस्तेमाल होता रहा है। साल 1985 में अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस कानून पास किया, जिसके तहत गांजा और चरस को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया, हालांकि भांग को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया। इस कानून के तहत कम मात्रा में गांजा या चरस मिलने पर 6 महीने की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है, जबकि व्यावसायिक स्तर पर बड़ी मात्रा पकड़े जाने पर 10 साल या उससे ज्यादा की सजा का कड़ा प्रावधान है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो दुनियाभर में गांजे के सेवन को लेकर आंकड़े और कानून, दोनों ही तेजी से बदल रहे हैं। जहां चिली और कनाडा जैसे देश प्रतिशत के हिसाब से सबसे आगे हैं, वहीं भारत अपनी बड़ी आबादी की वजह से कुल संख्या में एक अहम स्थान रखता है। भारत में भांग को छोड़कर गांजा और चरस पर सख्त प्रतिबंध लगा हुआ है, और इसके उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान भी है। एअर इंडिया के पायलट वाली घटना ने एक बार फिर इस विषय को चर्चा में ला दिया है, जिससे नशे और सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर सख्ती की जरूरत और स्पष्ट हो गई है।
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