मलेरिया का बुखार कैसे होता है, जानिए इसके सबसे पहले दिखने वाले लक्षण क्या हैं और समय रहते कैसे बचें
संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है प्लाज्मोडियम परजीवी; कंपकंपी के साथ तेज बुखार है पहला बड़ा संकेत।
Malaria: मलेरिया मुख्य रूप से प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में मानसून के दौरान यह बीमारी महामारी का रूप ले लेती है।
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फैलने का तरीका: जब एक संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर किसी इंसान को काटता है, तो उसकी लार के जरिए परजीवी ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश कर जाते हैं।
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लीवर पर हमला: ये परजीवी सबसे पहले लीवर में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाते हैं।
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रक्त कोशिकाओं का विनाश: इसके बाद ये लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में घुसकर उन्हें नष्ट करना शुरू कर देते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी और बुखार जैसे लक्षण पैदा होते हैं।
मलेरिया के शुरुआती लक्षण: तेज बुखार और कंपकंपी
मलेरिया की पहचान उसके विशिष्ट लक्षणों से की जा सकती है। यदि आपको निम्नलिखित संकेत मिल रहे हैं, तो तुरंत जांच करवाएं:
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तेज बुखार और कंपकंपी: अचानक 102-104 डिग्री तक बुखार चढ़ना और दांत बजने वाली ठंड लगना मलेरिया का सबसे क्लासिक लक्षण है। इसे ‘मलेरिया पैरॉक्सिज्म’ कहा जाता है।
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पसीना आना: बुखार उतरते समय मरीज को बहुत ज्यादा पसीना आता है और वह अत्यधिक कमजोरी महसूस करता है।
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गंभीर सिरदर्द और बदन दर्द: मांसपेशियों और जोड़ों में तीव्र दर्द के साथ ऐसा सिरदर्द होना जैसे सिर फट जाएगा।
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पाचन समस्याएं: जी मिचलाना, उल्टी होना और कुछ मामलों में दस्त या पेट दर्द की शिकायत भी देखी जाती है।
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थकान और एनीमिया: चूंकि परजीवी रक्त कोशिकाओं को नष्ट करते हैं, इसलिए मरीज को बहुत जल्दी थकान महसूस होने लगती है।
Malaria: मलेरिया से बचाव के प्रभावी और आसान उपाय
मलेरिया से बचने का सबसे बड़ा हथियार मच्छरों पर नियंत्रण पाना है। इसके लिए आप ये कदम उठा सकते हैं:
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मच्छरदानी का प्रयोग: रात में सोते समय हमेशा मच्छरदानी लगाएं।
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ठहरा हुआ पानी हटाएं: कूलर, गमलों, पुरानी टायरों या पानी की टंकियों में पानी जमा न होने दें, क्योंकि मच्छर यहीं अंडे देते हैं।
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पूरी आस्तीन के कपड़े: शाम के समय बाहर निकलते समय फुल स्लीव्स की शर्ट और लंबी पैंट पहनें।
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रेपेलेंट्स का उपयोग: मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या कॉइल्स का नियमित इस्तेमाल करें।
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घर की सुरक्षा: खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
Malaria: डॉक्टर को कब दिखाएं और क्या है इलाज?
मलेरिया का इलाज पूरी तरह संभव है बशर्ते इसे समय पर पहचाना जाए।
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जांच: ‘ब्लड स्मियर टेस्ट’ या ‘रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट’ से इसकी पुष्टि की जाती है।
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दवाएं: डॉक्टर एंटीमलेरियल दवाओं का कोर्स देते हैं। ध्यान रहे कि दवाओं का कोर्स बीच में न छोड़ें, वरना बीमारी दोबारा लौट सकती है।
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इमरजेंसी: यदि बुखार 3 दिन से ज्यादा रहे, उल्टी न रुके या मरीज बेहोश होने लगे, तो बिना देरी किए अस्पताल जाना चाहिए।
मलेरिया से जुड़ी जटिलताएं और मिथक
मिथक बनाम सच्चाई: कई लोग सोचते हैं कि मलेरिया केवल गंदे पानी के संपर्क से होता है, लेकिन यह केवल संक्रमित मच्छर के काटने से ही फैलता है। इसे नजरअंदाज करने पर ‘सेरेब्रल मलेरिया’ (मस्तिष्क ज्वर), किडनी फेलियर या गंभीर एनीमिया हो सकता है, जो जानलेवा है।
निष्कर्ष: जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है
मलेरिया का बुखार भले ही शुरुआत में साधारण लगे, लेकिन इसकी जटिलताएं खतरनाक हो सकती हैं। मच्छरों के प्रति सावधानी और लक्षणों की तुरंत पहचान ही आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है। मानसून और गर्मियों के मौसम में अपने आसपास सफाई रखें और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
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