नौणी फोरलेन पर बिना वैध परमिट नहीं चलेंगी बसें, HRTC समेत सभी सरकारी और निजी ऑपरेटरों पर लागू होगा आदेश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बिलासपुर के नौणी फोरलेन पर बस संचालन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
Nouni Fourlane Bus Permit: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बिलासपुर जनपद में नवनिर्मित नौणी फोरलेन मार्ग पर यात्री बसों के संचालन को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने ऐतिहासिक आदेश में साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि जिस भी बस के पास नौणी फोरलेन पर चलने का वैध रूट परमिट नहीं है, उसे किसी भी परिस्थिति में इस नए एक्सप्रेसवे मार्ग का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने इस सिद्धांत को रेखांकित किया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत तय नियम निजी बस ऑपरेटरों के साथ-साथ हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) और पड़ोसी राज्यों के सभी राज्य परिवहन उपक्रमों पर समान रूप से लागू होंगे। उच्च न्यायालय ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) बिलासपुर और जिला पुलिस प्रशासन को फोरलेन पर अवैध रूप से दौड़ने वाली बसों के खिलाफ सख्त अभियान चलाकर आदेश की शत-प्रतिशत अनुपालना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
Nouni Fourlane Bus Permit: निजी बस ऑपरेटरों की याचिका पर उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
यह विधिक विवाद निजी बस ऑपरेटरों द्वारा दायर याचिकाओं की शृंखला के बाद उच्च न्यायालय के समक्ष पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) बिलासपुर द्वारा 8 अक्टूबर 2026 को जारी उस प्रशासनिक आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें नौणी से प्रारंभ होने वाले फोरलेन एक्सप्रेसवे पर बसें चलाने से पूर्णतः रोक दिया गया था।
निजी ऑपरेटरों ने अदालत के समक्ष दलील पेश की थी कि प्रशासन उनके साथ दोहरा मापदंड अपना रहा है। उनका तर्क था कि जहां एक ओर निजी ऑपरेटरों की बसों को फोरलेन पर जाने से रोका जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC), चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU), पंजाब रोडवेज और हरियाणा राज्य परिवहन की लंबी दूरी की सरकारी बसें बिना किसी आधिकारिक रूट संशोधन के धड़ल्ले से इसी फोरलेन का इस्तेमाल कर रही हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि मार्ग प्रतिबंध लागू किया जाना है, तो वह निजी और सरकारी दोनों प्रकार के ऑपरेटरों पर निष्पक्ष रूप से लागू होना चाहिए।
पुराने ग्रामीण मार्गों के लिए जारी हुए थे मूल परमिट
मामले की सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड पर यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता निजी बस ऑपरेटरों के पास मूल रूप से स्वारघाट, गंभरपुल, कल्लर और पंजपीरी जैसे पारंपरिक मार्गों से बसें संचालित करने के वैध रूट परमिट थे। ऑपरेटरों का दावा था कि नवंबर 2024 में नौणी फोरलेन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद से वे समय की बचत और सुगम यात्रा के लिए इस नए मार्ग का उपयोग कर रहे थे, लेकिन हाल ही में परिवहन विभाग ने अचानक उनके संचालन पर रोक लगा दी।
इसके विपरीत राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने पीठ को अवगत कराया कि नवंबर 2024 के बाद से निजी और सरकारी दोनों ही क्षेत्रों के कई चालक अपने अधिकृत परमिट रूट का उल्लंघन कर मनमाने ढंग से फोरलेन पर बसें दौड़ा रहे थे। इसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव पुराने मार्गों पर बसे दर्जनों ग्रामीण अंचलों पर पड़ा, जहां नियमित बस सेवाओं का भारी अभाव हो गया और आम जनता को आवागमन में घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों की ऑनलाइन शिकायत और प्रशासनिक चालान की पृष्ठभूमि
पुराने मार्गों पर बसों की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण आबादी, दैनिक यात्रियों और स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं को रोजाना भारी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा था। ग्रामीणों ने इस मनमानी के विरुद्ध मुख्यमंत्री सेवा संकल्प पोर्टल और स्थानीय प्रशासन को सैकड़ों ऑनलाइन शिकायतें भेजी थीं।
इन जनशिकायतों का संज्ञान लेते हुए उपायुक्त बिलासपुर ने परिवहन और पुलिस विभाग को संयुक्त जांच के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया कि दर्जनों बसें अपने अधिकृत रूट (स्वारघाट-गंभरपुल-कल्लर) को छोड़कर फोरलेन से सीधे निकल रही थीं। इसके बाद आरटीओ बिलासपुर द्वारा औचक निरीक्षण कर अनाधिकृत रूप से रूट बदलने वाली बसों के भारी चालान काटे गए थे और उन्हें पुराने रास्तों पर लौटने के सख्त निर्देश जारी किए गए थे।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की दो टूक: ‘कानून की नजर में सब बराबर’
मामले के सभी पक्षों, दस्तावेजों और विधिक प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा के बाद न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने व्यवस्था दी कि मोटर वाहन कानून और जनहित की कसौटी पर सभी परिवहन सेवाएं समान हैं। राज्य सरकार या नियामक प्राधिकरण किसी एक श्रेणी (निजी ऑपरेटरों) पर नियमों का डंडा चलाकर दूसरी श्रेणी (सरकारी परिवहन निगमों) को नियमों के उल्लंघन की खुली छूट नहीं दे सकता।
अदालत ने आरटीओ बिलासपुर को सख्त आदेश दिया कि नौणी फोरलेन पर किसी भी ऐसी बस का पहिया न घूमने दिया जाए, जिसके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी संशोधित रूट परमिट न हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की परिधि में एचआरटीसी, सीटीयू, पंजाब रोडवेज और हरियाणा रोडवेज की वे सभी बसें शामिल हैं, जिनके मूल परमिट पुराने स्वारघाट या कल्लर मार्ग के लिए बने हुए हैं। जब तक सक्षम आरटीए द्वारा विधिक प्रक्रिया के तहत परमिट में आधिकारिक रूट परिवर्तन (Route Variation) दर्ज नहीं किया जाता, तब तक प्रत्येक बस को अपने मूल मार्ग से ही गुजरना होगा।
Nouni Fourlane Bus Permit: रूट डायवर्जन आवेदनों पर 4 सप्ताह में निर्णय के निर्देश
उच्च न्यायालय ने निजी ऑपरेटरों की आजीविका और व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्देश दिया कि जिन ऑपरेटरों ने अपने रूट परमिट को नौणी फोरलेन पर स्थानांतरित करने के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल किए हैं, उन पर शीघ्रता से विचार किया जाए। अदालत ने आरटीओ बिलासपुर को निर्देश दिया कि सभी संबंधित पक्षों, ग्रामीणों और हितधारकों को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए आगामी चार सप्ताह के भीतर इन आवेदनों पर विधि सम्मत और कारण सहित (Reasoned Order) आदेश पारित करें।
इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को नौणी फोरलेन पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर अवैध रूप से संचालित बसों की निगरानी करने और आदेश का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त करने के अधिकार दिए गए हैं। उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले में अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) प्रस्तुत करने के लिए 15 दिसंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है।
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