Gold Silver Price Crash: सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, सोना 1.50 लाख के नीचे फिसला, जानिए कमोडिटी एक्सपर्ट की बड़ी सलाह

Gold Silver Price Crash: सोना 1.50 लाख के नीचे फिसला, चांदी भी धड़ाम

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Gold Silver Price Crash: सराफा बाजार से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों के बीच हलचल तेज हो गई है। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते भारतीय वायदा बाजार यानी एमसीएक्स पर सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बेहद महत्वपूर्ण स्तर से नीचे लुढ़क गया है। वहीं चांदी भी बिकवाली के भारी दबाव में बहती हुई 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, मजबूत होते डॉलर और सर्राफा बाजार में आई तकनीकी कमजोरी ने दोनों कीमती धातुओं को बैकफुट पर धकेल दिया है। इस बड़ी गिरावट ने उन लोगों को चौंका दिया है जो लगातार तेजी की उम्मीद कर रहे थे।

Gold Silver Price Crash: रिकॉर्ड ऊंचाई से धड़ाम हुए रेट, सर्राफा बाजारों में सन्नाटा और ग्राहकों में असमंजस

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर आज का कारोबार शुरू होते ही सोने और चांदी के ग्राफ में भारी गिरावट देखने को मिली। अगस्त डिलीवरी वाला सोना लगभग 2900 रुपये की बड़ी कमजोरी के साथ 1,50,180 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान यह एक समय टूटकर 1,49,500 रुपये तक चला गया था। पिछले सत्र में यही सोना 1,52,443 रुपये पर बंद हुआ था।

चांदी की हालत भी कुछ ऐसी ही रही। जुलाई डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,244 रुपये टूटकर 2,36,284 रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार करती दिखी। बाजार के जानकार बताते हैं कि आज की इस भारी गिरावट के बाद दिल्ली के कूचा महाजनी और मुंबई के जावेरी बाजार जैसे बड़े सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। आम ग्राहक इस उलझन में हैं कि वे अभी गहनों की खरीदारी करें या कीमतों के और नीचे जाने का इंतजार करें।

आखिर क्यों आ रही है इतनी बड़ी गिरावट: कमोडिटी एक्सपर्ट ने बताए मुख्य कारण

बाजार में मची इस उथल-पुथल की असल वजह क्या है?  इस महीने सोने की कीमतों में करीब 3.44 फीसदी और चांदी में 11.32 फीसदी की बड़ी गिरावट आ चुकी है। इस मंदी की पहली और सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का लगातार मजबूत होना है। अमेरिका में आर्थिक आंकड़े मजबूत आ रहे हैं, जिससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि वहां का सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखेगा। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड मार्केट में लगाने लगते हैं। यही वजह है कि सोने और चांदी पर चौतरफा दबाव साफ दिखाई दे रहा है।

Gold Silver Price Crash: गोल्ड ईटीएफ से भारी बिकवाली और चीन-भारत जैसे देशों में फिजिकल डिमांड का घटना

गिरावट का दूसरा बड़ा पहलू निवेश के मोर्चे से जुड़ा है। वैश्विक स्तर पर बड़े निवेशक लगातार चौथे सप्ताह गोल्ड ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स से अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, हाल के दिनों में गोल्ड ईटीएफ से लगभग 2.71 अरब डॉलर की भारी निकासी हुई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों और क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में आई गिरावट के चलते कई निवेशकों को ‘मार्जिन कॉल’ का सामना करना पड़ा है, जिसकी भरपाई के लिए उन्होंने कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी को बेचना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बाद भी सोना इस बार अपनी पारंपरिक ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश वाली भूमिका नहीं निभा पा रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों और आम खरीदारों ने सोने की फिजिकल खरीदारी कम कर दी है। चीन के केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने केवल 8 टन सोना खरीदा, जो उसकी सामान्य खरीदारी से बहुत कम है। वहीं भारत के घरेलू बाजार में भी पिछले महीने फिजिकल गोल्ड की मांग में लगभग 70 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

Gold Silver Price Crash: क्या हो सकते हैं सोने-चांदी के नए टारगेट, जानिए कहां जाकर रुकेगी यह मंदी

अंतरराष्ट्रीय बाजार कोमेक्स पर सोने के लिए 4100 से 4000 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक बहुत ही मजबूत सपोर्ट का काम करेगा। अगर इसे भारतीय करेंसी में समझें तो यह घरेलू बाजार में लगभग 1.22 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर बैठता है।

वहीं चांदी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में 60 से 56 डॉलर का स्तर बेहद अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जो भारतीय बाजार के हिसाब से लगभग 1.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बैठता है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह से तकनीकी ब्रेकडाउन और वैश्विक स्तर पर बन रहे नकारात्मक फंडामेंटल संकेतों का नतीजा है, जिसके कारण कीमतों में यह बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।

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