Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल कीमतों में उछाल से महंगाई का खतरा, CRISIL रिपोर्ट में दूध, मछली, दालें और अन्य जरूरी वस्तुओं पर असर की चेतावनी

CRISIL ने दूध, दाल और मछली समेत जरूरी वस्तुओं पर असर की चेतावनी दी

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Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने एक बार फिर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की हालिया रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि ईंधन की महंगाई का सीधा असर दूध, मछली, दालें, सब्जियां और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ रहा है और मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) की दर ऊपर जाने का खतरा मंडरा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया 8 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने परिवहन लागत को बढ़ा दिया है, जिसका असर पूरे सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे व्यापारियों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है। अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतें और बढ़ीं तो खुदरा मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के ऊपर पहुंच सकती है, जो आरबीआई (RBI) के तय लक्ष्य से काफी अधिक है।

पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी के मुख्य कारण

हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल को इस घरेलू मूल्य वृद्धि की मुख्य वजह माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। मध्य पूर्व (Middle East) में बनी भू-राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में तनाव और वैश्विक मांग में अचानक आई तेजी ने कच्चे तेल के भाव को प्रभावित किया है।

चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा और तत्काल असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हाल ही में कई राज्यों में पेट्रोल ₹100 से ऊपर और डीजल ₹95 प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। इससे माल ढुलाई और परिवहन लागत में 12 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो सीधे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित कर रही है।

CRISIL रिपोर्ट की मुख्य बातें और प्रभावित होने वाले क्षेत्र

क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने पूरे खाद्य और कृषि क्षेत्र के बजटीय समीकरण को बिगाड़ दिया है। रिपोर्ट में रेखांकित किए गए प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • डेयरी और दूध उद्योग: दूध के संकलन और प्रसंस्करण के बाद शहरों तक उसके परिवहन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। ईंधन की इस तेजी के कारण दूध की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।

  • मछली और समुद्री उत्पाद: तटीय क्षेत्रों से मुख्य मंडियों तक मछली और समुद्री उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। परिवहन लागत बढ़ने से मछली पालकों और फुटकर व्यापारियों का दैनिक खर्च काफी बढ़ गया है।

  • दालें और खाद्यान्न: परिवहन लागत के चलते थोक बाजारों में दालों की कीमतों में 7 से 10 प्रतिशत की तेजी देखी जा रही है। इसके साथ ही हरी सब्जियों और फलों की दैनिक आवक भी महंगी परिवहन व्यवस्था के कारण बाधित हो रही है।

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री के अनुसार, यदि ईंधन की कीमतें इसी उच्च स्तर पर बनी रहीं, तो पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में देश की औसत खुदरा महंगाई दर 5.8 प्रतिशत से 6.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग पर असर

कृषि क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था ईंधन, विशेषकर डीजल की कीमतों से सीधे तौर पर जुड़ी होती है। ट्रैक्टर, सिंचाई पंप सेट और रबी फसल की कटाई के बाद मंडियों तक माल ढुलाई में डीजल की खपत बढ़ने से खेती की कुल लागत काफी बढ़ गई है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि इसका असर आगामी खरीफ फसलों की समय पर बुआई पर भी दिख सकता है। इसके कारण डेयरी फार्मर्स और मत्स्य पालकों का प्रॉफिट मार्जिन लगातार घट रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

शहरी इलाकों में भी मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में ऑटो, कैब और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों ने किराए में इजाफा कर दिया है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं, किराना सामान, सब्जी और दूध की खुदरा कीमतों में 5 से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, जिससे उपभोक्ताओं का मासिक खर्च बढ़ा है।

Petrol Diesel Price Hike: भविष्य की चुनौतियां और समाधान

आर्थिक विशेषज्ञों और क्रिसिल की सिफारिशों के अनुसार, महंगाई के इस बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार को तत्काल और दीर्घकालिक दोनों रणनीतियों पर काम करना होगा:

  1. टैक्स में कटौती की मांग: विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी और वैट (VAT) में कुछ कटौती कर आम जनता को तात्कालिक राहत देनी चाहिए।

  2. वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा: लंबी अवधि के समाधान के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, सीएनजी (CNG) के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की गति को और तेज करना होगा।

  3. लक्षित सब्सिडी: क्रिसिल ने सुझाव दिया है कि ईंधन की इस महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले गरीब और किसान वर्ग तक सीधे लक्षित ईंधन सब्सिडी (Direct Benefit Transfer) पहुंचाई जानी चाहिए।

निष्कर्ष: पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें इस समय खुदरा बाजार में महंगाई बढ़ाने का सबसे बड़ा उत्प्रेरक साबित हो रही हैं। क्रिसिल की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि कच्चे तेल के दामों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आम आदमी के भोजन की थाली पर इसका असर और गहरा सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए आने वाले समय में नीतिगत स्तर पर सरकार और केंद्रीय बैंक (RBI) द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर बाजार और उद्योग जगत दोनों की पैनी नजर रहेगी।

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