Bullet Train Project: पालघर में तीसरी माउंटेन टनल पूरी, रेलवे ने 5 महीने में बनाई 3 टनल्स

पालघर में तीसरी टनल पूरी, 5 महीने में 3 टनल्स बनाकर नया रिकॉर्ड

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Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन) परियोजना में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारतीय रेलवे ने महाराष्ट्र के पालघर जिले में तीसरी माउंटेन टनल का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस बड़ी सफलता के साथ रेलवे ने मात्र 5 महीनों में तीन बड़ी टनल्स पूरा करने का एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।

यह उपलब्धि पूरे प्रोजेक्ट की गति को तेज करने वाली है। पालघर क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण और जटिल पहाड़ी भू-संरचना को देखते हुए इतनी तेजी से टनलिंग कार्य पूरा करना इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेहद सराहनीय है। रेल मंत्रालय ने इस प्रगति को ‘आत्मनिर्भर भारत’ और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक बेहतरीन मिसाल बताया है।

पालघर में तीसरी टनल का निर्माण पूरा

पालघर जिले में बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के तहत बनाई जा रही तीसरी माउंटेन टनल का ब्रेकथ्रू (काम) सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। यह टनल लगभग 1.2 किलोमीटर लंबी है और इसे अत्याधुनिक टनल बोरिंग और ब्लास्टिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बनाया गया है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस टनल का निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि इस पूरे क्षेत्र में घने जंगल, पहाड़ी इलाका और पर्यावरणीय संवेदनशीलता थी। फिर भी, सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए काम को समय से पहले पूरा किया गया। इस टनल के पूरा होने से अब बुलेट ट्रेन की ट्रैक लाइन और वायाडक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

5 महीने में 3 टनल्स का रिकॉर्ड निर्माण

रेलवे की इस उपलब्धि को जो बात सबसे खास बनाती है, वह है पालघर क्षेत्र में पिछले 5 महीनों के भीतर कुल तीन माउंटेन टनल्स का निर्माण पूरा होना। यह गति भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के इतिहास में एक नया बेंचमार्क स्थापित करती है। इन तीनों टनल्स का निर्माण टाइमलाइन के अनुसार हुआ:

  • पहली टनल: जनवरी 2026 में पूरी हुई।

  • दूसरी टनल: मार्च 2026 में सफलतापूर्वक पूरी की गई।

  • तीसरी टनल: जून 2026 की शुरुआत में इसका काम पूरा हुआ।

इन तीनों टनल्स की कुल लंबाई 3.8 किलोमीटर से ज्यादा है। इस तेज प्रगति के पीछे आधुनिक हेवी मशीनरी, कुशल इंजीनियरिंग टीम और 24×7 शिफ्टों में की गई कार्य व्यवस्था का सबसे बड़ा योगदान रहा है।

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति और लागत

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत का पहला हाई स्पीड रेल कॉरिडोर है, जो देश के दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

विवरण आंकड़े / जानकारी
कुल लंबाई 508 किलोमीटर
प्रस्तावित स्टेशन 12 स्टेशन (गुजरात और महाराष्ट्र मिलाकर)
अनुमानित कुल लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये
कुल कार्य प्रगति करीब 48% काम पूरा (जून 2026 तक)

गुजरात खंड में अधिकांश वायाडक्ट और पिलर निर्माण का काम पहले ही तेज गति से चल रहा है, जबकि महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और टनलिंग से जुड़ी भौगोलिक चुनौतियां बनी हुई थीं। पालघर में इन तीन टनल्स के पूरा होने से अब महाराष्ट्र खंड के काम में भी अभूतपूर्व तेजी आएगी।

टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग की मिसाल

इन टनल्स के निर्माण में आधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) के साथ-साथ न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का इस्तेमाल किया गया है। इन टनल्स को पूरी तरह से भूकंप प्रतिरोधी (Earthquake Resistant) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है।

टनल की आंतरिक दीवारों को मजबूत बनाने के लिए एडवांस्ड कंक्रीट लाइनिंग और पानी की निकासी के लिए अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम लगाया गया है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए वन्यजीवों के लिए सेफ कॉरिडोर और टनल के भीतर हाई-टेक वेंटिलेशन सिस्टम भी बनाया गया है। यह पूरा तकनीकी कार्य जापान की तकनीकी सहायता (JICA) के सहयोग से किया जा रहा है।

Bullet Train Project: आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 2 घंटे (सीमित स्टॉप के साथ) रह जाएगा, जिसमें वर्तमान में पारंपरिक ट्रेनों या सड़क मार्ग से 6-7 घंटे का समय लगता है। यात्रा समय में इस भारी कटौती से दोनों राज्यों के बीच व्यापार, पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों को एक नई रफ्तार मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट के जरिए वर्तमान में लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय युवाओं को विशेष तकनीकी और सेफ्टी ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे पालघर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सीधा बढ़ावा मिल रहा है।

निष्कर्ष

पालघर में तीसरी माउंटेन टनल का निर्माण पूरा होना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। रेलवे की पूरी इंजीनियरिंग टीम ने महज 5 महीनों में तीन जटिल टनल्स को अंजाम देकर भारत की मजबूत निर्माण क्षमता का परिचय दिया है। इस परियोजना का अंतिम लक्ष्य साल 2028 तक पूरी तरह परिचालन शुरू करने का है, और पालघर का यह सफल ब्रेकथ्रू देश को आधुनिक और बुलेट रफ्तार वाली परिवहन व्यवस्था के और करीब ले आया है।

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