Lack of Sleep Effects: क्या नींद की कमी से बढ़ता है हाई बीपी? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया 6 घंटे से कम सोने का खतरा
Lack of Sleep Effects: क्या नींद की कमी से बढ़ता है हाई बीपी? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया 6 घंटे से कम सोने का खतरा
Lack of Sleep Effects: रात देर तक फोन चलाना अब आदत बन चुका है। ऑफिस का काम भी बेड तक खिंच आता है। कई लोग मान लेते हैं कि पांच-छह घंटे की नींद काट लेने से दिन निकल जाएगा। कार्डियोलॉजिस्ट कहना है कि लगातार कम सोना सिर्फ थकान या चिड़चिड़ापन नहीं लाता। लंबे समय में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन का खतरा भी बढ़ सकता है। सबसे तीखी बात आगे है। अच्छी डाइट और दवा के बावजूद नींद अधूरी रहे तो सुबह का बीपी ऊंचा रह सकता है।
शहर की जिंदगी में नींद सबसे पहले कटती है। वेब सीरीज एक एपिसोड और बढ़ जाती है। सुबह अलार्म पर आंखें खुलती हैं, चाय से दिन शुरू होता है। डॉक्टर की चेतावनी इन्हीं रातों से जुड़ी है। शरीर रात को आराम मांगता है। मिलता नहीं तो नसें जागती रहती हैं।
Lack of Sleep Effects: गहरी नींद में शरीर क्या करता है
गहरी नींद में शरीर रेस्ट मोड में चला जाता है। दिमाग की हलचल धीमी पड़ती है। दिल की धड़कन कम होती है। रक्त वाहिकाएं ढीली पड़ती हैं। दिल पर दबाव घटता है और ब्लड प्रेशर नीचे आने लगता है। यह रात का वह हिस्सा है जब हृदय को दिन की भागदौड़ से राहत मिलती है।
कम सोने वाला व्यक्ति यही राहत गंवा देता है। आंखें बंद हों, नींद उथली रहे, तो शरीर पूरा आराम नहीं कर पाता। देखने पर लगता है सो लिया। अंदर हार्ट रेट और दबाव वैसा नहीं गिरता जैसा गहरी नींद में गिरना चाहिए।
कम नींद बीपी कैसे चढ़ाती है
रोज अच्छी नींद न मिले तो शरीर अलर्ट मोड में अटका रहता है। स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ जाता है। धड़कन सामान्य से तेज रहती है। सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय बना रहता है। यही तंत्र आपातकाल में शरीर को जगाए रखता है। रोज-रोज जगा रहना ब्लड प्रेशर पर बोझ डालता है। समय के साथ हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है।
मामला कुछ इस तरह से बनता है कि आदमी नमक कम खा रहा हो, फिर भी सुबह का रीडिंग ऊंचा आए। वजह किचन के बाहर भी हो सकती है। रात दो बजे तक स्क्रीन और सुबह छह बजे दफ्तर, यह चक्र नसों को ठहरने नहीं देता।
6 घंटे से कम नींद पर क्या आंकड़ा बताया गया
डॉ. अमोनकर के अनुसार जो लोग नियमित रूप से छह घंटे से कम सोते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है। यह आंकड़ा डॉक्टर ने अपने वीडियो में रखा है। हर व्यक्ति पर एक जैसा प्रयोग नहीं माना जा सकता, लेकिन चेतावनी साफ है। कम घंटे काटने की आदत हल्की नहीं।
एक और बात उन्होंने कही जो दवा लेने वालों को छूती है। नर्वस सिस्टम को पर्याप्त आराम न मिले तो अकेली अच्छी डाइट समस्या पूरी तरह नहीं संभालती। कई मामलों में ब्लड प्रेशर की दवा का असर भी सीमित रह सकता है। अगली सुबह बीपी सामान्य से अधिक रह सकता है। यही छोटा ट्विस्ट है। गोली ली, सलाद खाया, नींद चार घंटे की रही, सुबह का आंकड़ा फिर ऊंचा।
आठ-नौ घंटे की नींद दिल के लिए क्यों बताई गई
पर्याप्त और गुणवत्ता वाली नींद शरीर को रिकवर होने का समय देती है। हार्ट रेट संभलता है। वाहिकाएं रिलैक्स होती हैं। तनाव घटता है। ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर ने हर रात आठ से नौ घंटे की अच्छी नींद जरूरी बताई।
पांच घंटे सोकर संडे को दस घंटे काटना उसी कमी को पूरा नहीं करता, यह बात स्रोत में अलग से नहीं कही गई। कही यही गई है कि नियमित अच्छी नींद चाहिए। एक रात की भरपाई हफ्ते भर की कटी नींद का हिसाब नहीं चुकता, यह अनुभव घरों में दिखता है। डॉक्टर का जोर नियमितता पर है।
ऑफिस से घर आने वाला व्यक्ति टीवी और फोन के बीच पड़ा रहता है। बच्चे परीक्षा के नाम पर देर तक जागते हैं। दोनों जगह नींद कटी तो सुबह का सिर दर्द आम शिकायत बन जाता है। बीपी मशीन घर में हो तो रीडिंग और साफ बोलती है।
Lack of Sleep Effects: डाइट और दवा काफी नहीं, अगर रात जागी रहे
जानकार बताते हैं कि हाइपरटेंशन की बात छिड़ी कि लोग तेल-नमक पर अटक जाते हैं। टहलना भी सूची में आ जाता है। नींद सूची के नीचे रह जाती है। डॉ. अमोनकर की बात उसी छूटी कड़ी को सामने लाती है। तंत्रिका तंत्र थका रहे तो खाना अकेला नियंत्रक नहीं बनता। दवा का असर भी सीमित रह सकता है।
इसका अर्थ दवा छोड़ना नहीं। अर्थ यह है कि इलाज के साथ सोने का समय भी इलाज का हिस्सा माना जाए। जो पहले से बीपी की गोली लेते हैं, उन्हें अचानक दवा बदलने की सलाह इस जानकारी में नहीं है। डॉक्टर से संपर्क अलग विषय है। यहां सिर्फ इतना कहा गया है कि नींद अधूरी रहे तो सुबह का दबाव चढ़ा रह सकता है।
शेयर करने लायक वाक्य यही बैठता है। छह घंटे से कम की आदत हाइपरटेंशन का खतरा 30-40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। दूसरी लाइन भी साफ है। नसों को आराम न मिले तो सिर्फ डाइट से बात नहीं बनती।
रात की कटी नींद को सिर्फ थकान मत समझिए। गहरी नींद में दिल की धड़कन धीमी पड़ती है और वाहिकाएं ढीली होती हैं। जागते रहने पर कॉर्टिसोल और सिम्पैथेटिक तंत्र सक्रिय रहते हैं। नियमित रूप से छह घंटे से कम सोने वालों में हाई बीपी का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक बताया गया है। आठ-नौ घंटे की गुणवत्ता वाली नींद हृदय के लिए जरूरी कही गई है। दवा और परहेज के बावजूद सुबह का रीडिंग ऊंचा रहे तो सोने के घंटे भी जांच लायक हैं। अगली जांच से पहले रात का समय कितना बचा, यही देखने वाली बात है।
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