Nepal Flood Disaster: अब तक 547 की मौत, करीब 977 लापता; रसुवा टनल में सेना का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, भारत ने भेजी 57.5 टन राहत सामग्री

रसुवा टनल में सेना का बड़ा रेस्क्यू अभियान, भारत ने 57.5 टन राहत सामग्री भेजी

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Nepal Flood Disaster: पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में भोटे कोशी नदी में आए अप्रत्याशित और विनाशकारी सैलाब के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। जलप्रलय की इस भयावह त्रासदी में जान गंवाने वालों की आधिकारिक संख्या बढ़कर 547 हो गई है, जबकि लगभग 977 नागरिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन के मलबे से 1,545 से अधिक घायल व फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक उपचार व राहत शिविरों तक पहुंचाया गया है।
नेपाल-तिब्बत सीमावर्ती क्षेत्रों और विशेष रूप से रसुवा जिले में बुनियादी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। मुख्य राजमार्गों, संपर्क पुलों, बिजली ग्रिड और टेलीकॉम नेटवर्क के ठप हो जाने के बावजूद नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा प्रतिक्रिया दल चौबीसों घंटे राहत कार्यों में जुटे हैं। स्थिति की विकरालता को देखते हुए भारत सरकार ने तत्काल प्रभाव से बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता और तकनीकी विशेषज्ञ दल काठमांडू भेज दिए हैं।

Nepal Flood Disaster: भोटे कोशी के उफान से 93 हजार लोग प्रभावित, रसुवा में बिजली परियोजनाओं पर आफत

नेपाल रेड क्रॉस के नवीनतम आकलन के अनुसार, इस प्रलयंकारी आपदा से सीधे तौर पर 93 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों पक्के मकान, बस्तियां और बाजार पानी के तेज बहाव में बह चुके हैं। सबसे अधिक तबाही रसुवा जिले के पहाड़ी अंचलों में देखी जा रही है, जहां भोटे कोशी नदी के किनारे संचालित प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे जलमग्न हो गए हैं।
बिजली परियोजनाओं के कार्यस्थलों और आवासीय परिसरों से बड़ी संख्या में स्थानीय कामगार व तकनीकी विशेषज्ञ लापता हैं। पहाड़ी ढलानों पर लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़कों के बह जाने से राहत दल कई दूरदराज के गांवों तक केवल हवाई मार्ग से ही पहुंच पा रहे हैं। इस प्राकृतिक विभीषिका में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ सुदूर इलाकों में ट्रैकिंग और तीर्थाटन पर निकले विदेशी नागरिक भी फंसे हुए हैं।

नेपाली सेना का विशाल अभियान: रसुवा टनल पर फोकस, 14 हजार से ज्यादा जवान तैनात

नेपाल सरकार ने बचाव कार्यों को गति देने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। नेपाली सेना के 14,533 से अधिक जवान, विशेष कमांडो और पुलिस बल के जवान अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों के साथ दुर्गम घाटियों में तैनात किए गए हैं। सेना का मुख्य ध्यान इस समय रसुवा टनल में केंद्रित है, जहां गाद और मलबे के नीचे कई लोगों के फंसे होने की आशंका है।
सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, अब तक 3,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर एयरलिफ्ट किया जा चुका है, जिनमें 25 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष आपातकालीन कोष जारी किया है और अब तक 90 टन से अधिक सूखा राशन, दवाइयां और आवश्यक जीवनरक्षक सामग्री वितरित की जा चुकी है।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पैनी नजर: सैकड़ों लोगों से हुआ संपर्क

भारत सरकार और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। महाराष्ट्र से नेपाल यात्रा पर गए 395 नागरिकों में से 325 यात्रियों से सुरक्षित संपर्क स्थापित कर लिया गया है और उन्हें सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं।
इसके अतिरिक्त, चीन-तिब्बत सीमा से नेपाल के रास्ते 96 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि तमिलनाडु के 21 नागरिक सुरक्षित नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। शेष लापता या संपर्क से बाहर चल रहे भारतीय नागरिकों की खोजबीन के लिए विदेश मंत्रालय और आपदा नियंत्रण कक्ष लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में हैं।

भारत का ‘ऑपरेशन मैत्री’: 57.5 टन राहत सामग्री और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की तैनाती

संकट के इस दौर में भारत ने एक बार फिर सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाते हुए नेपाल के साथ अपनी अटूट मित्रता का परिचय दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अनुसार, भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए अब तक कुल 57.5 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई जा चुकी है।
इस मानवीय सहायता में हेवी-ड्यूटी पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, रेडी-टू-ईट फूड पैकेट्स और बड़े पैमाने पर पानी को शुद्ध करने वाली क्लोरीन टैबलेट्स शामिल हैं। राहत सामग्री के साथ ही भारत ने 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय तकनीकी व मेडिकल दल भी भेजा है, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सक, पैरामेडिक्स और विशेष रूप से सुरंग बचाव कार्य (Tunnel Rescue) के अनुभवी इंजीनियर शामिल हैं, जो मलबे में दबी परियोजनाओं से लोगों को सुरक्षित निकालने में नेपाली सेना को सहयोग दे रहे हैं।

Nepal Flood Disaster: क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा और महामारियों का बढ़ता खतरा

बाढ़ प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती मलबे से पटी सड़कें और ध्वस्त पुल हैं, जिसके चलते भारी मशीनरी और एम्बुलेंस को आगे ले जाना असंभव साबित हो रहा है। इसके साथ ही कई इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर पुनः बढ़ने की चेतावनी जारी की गई है।
अस्थायी राहत शिविरों में शरण लिए हजारों बेघर परिवारों के बीच अब दूषित पेयजल और गंदगी के कारण जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) के फैलने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंपों में दवाओं का वितरण कर रही हैं, जबकि मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता सदमे से जूझ रहे बच्चों और परिवारों की काउंसलिंग में जुटे हैं। प्रशासन ने नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को अगले कुछ दिनों तक पूरी तरह सतर्क रहने और ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर ही ठहरने का कड़ा निर्देश दिया है।

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