Nepal Flood: 734 शव मिले, पहचान कैसे होगी? डीएनए सैंपल और एयरटाइट बैग वाली तैयारी समझिए
Nepal Flood: 734 शव मिले, पहचान कैसे होगी? डीएनए सैंपल और एयरटाइट बैग वाली तैयारी समझिए
Nepal Flood: नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के चार दिन बाद तस्वीर और सख्त हो गई है। अब तक 734 शव बरामद हो चुके हैं। 2,498 लोग अभी भी लापता बताए गए हैं। 4,500 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है। मुर्दाघर भर चुके हैं। कई शवों की पहचान नहीं हो पाई है। सरकार ने ऐसे पार्थिव अवशेषों को एयरटाइट बैग में रखकर दफनाना शुरू कर दिया है। दफनाने से पहले डॉक्टर डीएनए सैंपल ले रहे हैं। सवाल यही अटकता है कि परिवार बाद में अपने लोगों तक कैसे पहुंचेंगे।
घटना बुधवार को हुई। सर्च और रेस्क्यू जारी है। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों के जीवित मिलने की संभावना अब बहुत कम रह गई है। आने वाले दिनों में मलबे से और शव निकल सकते हैं। प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। साथ ही यह भी साफ किया कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी, उनका अंतिम संस्कार सरकार कर रही है। पहचान का काम यहीं खत्म नहीं हो रहा। नमूने और जगह का रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
Nepal Flood: मुर्दाघर भर गए, पहचान अधूरी क्यों है
बाढ़ का सबसे बड़ा बोझ चितवन पर दिखा। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वहां 233 शव मिले। इनमें से सिर्फ छह की पहचान होकर परिजनों को सौंपे गए। बाकी अभी बेनाम हैं। मलबे, कीचड़ और तेज बहाव में पहचान के सामान्य तरीके काम नहीं आ रहे। कपड़े बह गए। चेहरा बदल गया। दस्तावेज गायब हैं।
शव तेजी से सड़न पकड़ रहे हैं। ठंडक की कमी और जगह की तंगी ने डॉक्टरों का समय छोटा कर दिया है। अधिकारियों ने कुछ घरों को कोल्ड सेंटर बना दिया है ताकि अवशेष थोड़े समय सुरक्षित रह सकें। फिर भी हर शव को अस्पताल में रखना संभव नहीं बचा। मामला कुछ इस तरह से खड़ा है कि अंतिम संस्कार रोकने से स्वास्थ्य संकट बढ़ेगा, बिना रिकॉर्ड दफनाने से परिवार अधूरे रह जाएंगे।
डीएनए सैंपल क्यों लिया जा रहा है
अज्ञात शव दफनाने से पहले डॉक्टर डीएनए सैंपल ले रहे हैं। भविष्य में परिजन अपना सैंपल देकर मिलान करा सकें, यही मकसद है। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग पूरी बताई गई। इन्हें बाद में दफनाया गया। कुल 135 शवों से सैंपल लिए जाने की जानकारी अधिकारियों ने दी।
सैंपल के साथ और भी बातें नोट हो रही हैं। शरीर पर कोई खास निशान हो तो उसका ब्योरा लिखा जा रहा है। शव किस जगह से मिला, यह भी दर्ज है। जानकार बताते हैं कि बाढ़ जैसी आपदा में नाम पट्टी अक्सर नहीं बचती। तब डीएनए और स्थान का रिकॉर्ड ही परिवार को अवशेष तक ले जाता है। प्रोफाइलिंग के लिए कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल तथा काठमांडू और पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों से समन्वय चल रहा है।
एयरटाइट बैग और 1.5 मीटर की गहराई का मतलब
शवों को एयरटाइट बैग में रखकर करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जा रहा है। बैग इसलिए है कि अवशेष बिखरें नहीं और बाद में निकालना संभव रहे। दो शवों के बीच 40 सेंटीमीटर का फासला रखा जाएगा। डीएनए से जब कोई नाम मिलेगा, अधिकारी उसी जगह से सही बैग निकाल सकें।
दफन स्थल पर साइनबोर्ड लगेगा। पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियो भी बन रही है। यह कागजी काम सूखा लगता है, परिवार के लिए यही आखिरी कड़ी है। बिना नक्शे और बिना फासले के दफन हुआ शव बाद में खोजना लगभग नामुमकिन हो जाता है। सरकार का दावा है कि यह तरीका अस्थायी व्यवस्था है, हमेशा के लिए गुम नहीं करना।
Nepal Flood: चितवन सबसे ज्यादा प्रभावित, नदी फिर उफान पर
अधिकांश शव चितवन जिले से निकले हैं। वहीं बचाव दल अभी भी मलबे में काम कर रहे हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है। बाढ़ प्रभावित जिलों में लोगों और रेस्क्यू टीमों से सतर्क रहने को कहा गया है। चीन में बनी अस्थायी झील का आकार बड़ा बताया जा रहा है। अधिकारी कह रहे हैं कि अगर यह झील टूटी तो नेपाल में पहले से भारी बाढ़ का खतरा है।
चार दिन बाद भी लापता आंकड़ा ढाई हजार के करीब है। हर नया शव एक परिवार की प्रतीक्षा से जुड़ा है। साथ ही हर चेतावनी बचाव कर्मियों की जान से भी जुड़ी है। देखने पर लगता है कि राहत और पहचान का काम एक साथ दौड़ रहा है, संसाधन दोनों तरफ कम हैं।
नेपाल बाढ़ में अब तक 734 शव मिल चुके हैं। 2,498 लोग लापता हैं। मुर्दाघर भर जाने के बाद अज्ञात शवों को डीएनए सैंपल लेकर एयरटाइट बैग में 1.5 मीटर नीचे दफनाया जा रहा है। चितवन में 233 शवों में से छह ही परिवारों तक पहुंचे। 40 सेंटीमीटर का फासला, साइनबोर्ड और वीडियो रिकॉर्ड बाद की पहचान के लिए रखे जा रहे हैं। भोटेकोशी का जलस्तर फिर चढ़ा है। अस्थायी झील का खतरा भी बना हुआ है। बचाव और मिलान की ताजा स्थिति आने वाले घंटों में बदल सकती है। परिवार और प्रशासन दोनों की नजर अगले रेस्क्यू अपडेट पर है।
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