दिल्ली-NCR की हवा हुई बेहद जहरीली, गाजियाबाद में AQI 704 के पार; निर्माण कार्यों पर रोक का दावा
दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने के बीच गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर बेहद ऊंचे AQI आंकड़े बताए गए हैं।
Delhi NCR Pollution: उत्तर भारत में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण ने विकराल और खतरनाक रूप धारण कर लिया है। हवा की गति थमने और वायुमंडलीय तापमान में गिरावट के चलते दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की आबोहवा ‘गंभीर’ से भी बदतर श्रेणी में पहुंच गई है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 600 के खतरनाक स्तर को पार कर गया है, जबकि गाजियाबाद के कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर यह भयावह आंकड़ा 700 के पार दर्ज किया गया। हवा में घुले इस जानलेवा धुएं और स्मॉग की मोटी चादर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन कदम उठाते हुए 5 नवंबर से आगामी 20 नवंबर तक धूल फैलाने वाली सभी निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है।
गुरुवार की सुबह दिल्ली का न्यूनतम तापमान गिरकर लगभग 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। बदलते मौसम के बीच आसमान में छाई धुंध और जहरीले पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) के सघन जमावड़े ने आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों, हृदय रोगियों और बच्चों के लिए सांस लेना तक दूभर कर दिया है। शहर के अधिकांश इलाकों में दृश्यता काफी घट गई है और लोग आंखों में जलन, गले में भारी खराश व खांसी की शिकायत कर रहे हैं।
Delhi NCR Pollution: दिल्ली और गाजियाबाद में हवा का स्तर अत्यंत गंभीर
नवंबर माह की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण के स्तर में आई तीव्र वृद्धि ने प्रशासनिक तंत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बीते दिन बुधवार, 4 नवंबर को दिल्ली का समग्र औसत AQI 377 दर्ज किया गया था, जो पहले ही वर्ष के सर्वाधिक चिंताजनक आंकड़ों में शामिल था। परंतु गुरुवार को स्थिति और अधिक बिगड़ गई और शहर के लगभग सभी निगरानी केंद्रों पर मीटर लाल निशान से भी ऊपर पहुंच गया।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के सोनिया विहार स्टेशन पर एक्यूआई 662, विवेक विहार में 660 और आनंद विहार में 637 दर्ज किया गया। वहीं बाहरी दिल्ली के पूठ खुर्द में यह सूचकांक 629 और पर्यटन विहार में 553 तक जा पहुंचा। गाजियाबाद जनपद में हालात और भी बदतर रहे, जहां पूरे शहर का समग्र औसत एक्यूआई 704 रिकॉर्ड किया गया। गाजियाबाद के प्रमुख रिहायशी क्षेत्रों जैसे राज नगर एक्सटेंशन में एक्यूआई 713 और संजय नगर केंद्र पर 711 दर्ज हुआ, जो मानव स्वास्थ्य के लिए आपातकालीन स्थिति को दर्शाता है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हवा में भी घुला जहर
प्रदूषण का यह गंभीर प्रकोप केवल दिल्ली और गाजियाबाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती जनपद गौतमबुद्ध नगर के औद्योगिक व आवासीय सेक्टर भी इसकी सीधी चपेट में हैं। नोएडा का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 636 के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 में स्थिति सर्वाधिक नाजुक रही, जहां एक्यूआई 675 दर्ज किया गया।
इसके अतिरिक्त नोएडा के प्रमुख सेक्टरों की बात करें तो सेक्टर-128 में सूचकांक 641 और सेक्टर-78 में 616 रिकॉर्ड किया गया। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-2 स्थित स्टेशन पर भी स्तर 624 बना रहा। सुबह और देर शाम के समय समूचे क्षेत्र में धुएं और कोहरे के मेल से बना ‘स्मॉग’ जमीन की सतह के पास जम रहा है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और चिकित्सकों ने लोगों को अनावश्यक रूप से खुले में टहलने से बचने की सलाह दी है।
20 नवंबर तक गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ पर पूर्ण पाबंदी
हवा में धूलकणों की बढ़ती मात्रा को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के कड़े नियमों को लागू करते हुए दिल्ली-एनसीआर में 5 नवंबर से 20 नवंबर तक सभी प्रकार की गैर-जरूरी निर्माण (Construction) और ध्वस्तीकरण (Demolition) गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगा दी है। इसके तहत निजी भवनों के निर्माण, वाणिज्यिक परियोजनाओं की खुदाई, बोरिंग, कंक्रीट मिक्सिंग और मलबे की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
हालांकि, जनसुविधा और बुनियादी ढांचे की निरंतरता बनाए रखने के लिए कुछ आवश्यक राष्ट्रीय परियोजनाओं को इस पाबंदी से छूट प्रदान की गई है। इनमें रेलवे, दिल्ली मेट्रो, हवाई अड्डा विस्तार, सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रक्षा परियोजनाएं शामिल हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि छूट प्राप्त इन सभी परियोजनाओं को भी धूल नियंत्रण और जल छिड़काव के सभी अनिवार्य पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा।
सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम लागू
सड़कों पर वाहनों के दबाव और उनसे होने वाले हानिकारक कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रशासन ने कार्यस्थलों के लिए भी आपात व्यवस्था लागू की है। 5 से 20 नवंबर की अवधि के दौरान दिल्ली के साथ-साथ एनसीआर के प्रमुख जिलों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में स्थित सरकारी व निजी प्रतिष्ठानों को अपने कार्यालयों में अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ संचालन करने का निर्देश दिया गया है।
शेष 50 प्रतिशत कर्मियों को अनिवार्य रूप से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) की सुविधा देने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सड़कों पर निजी वाहनों, टैक्सियों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही में भारी कमी आएगी, जिससे ऑटोमोबाइल जनित धुएं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। आपातकालीन सेवाओं, अस्पतालों, नगर निगम, जलापूर्ति और बिजली से जुड़े आवश्यक कर्मचारियों को इस नियम से मुक्त रखा गया है।
Delhi NCR Pollution: सर्दियों में क्यों गैस चैंबर में तब्दील हो जाता है दिल्ली-एनसीआर?
राजधानी क्षेत्र में हर वर्ष सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण के चरम पर पहुंचने के पीछे कई भौगोलिक, मौसमी और स्थानीय कारण एक साथ जिम्मेदार होते हैं। प्रमुख स्थानीय कारकों में लाखों वाहनों का अनवरत धुआं, सड़कों और कच्चे रास्तों से उड़ने वाली धूल, रिहायशी इलाकों में खुले में कचरा जलाया जाना और औद्योगिक उत्सर्जन प्रमुख हैं। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेतों में धान की कटाई के बाद बड़े पैमाने पर जलाई जाने वाली पराली का धुआं उत्तर-पश्चिमी हवाओं के साथ दिल्ली की ओर बहकर आता है।
सर्दियों के महीनों में हवा का तापमान तेजी से गिरता है, जिससे वातावरण में ‘थर्मल इन्वर्जन’ (तापमान का व्युत्क्रमण) की स्थिति बन जाती है। हवा की गति बेहद मंद होने के कारण भारी और ठंडी हवा ऊपर उठने के बजाय जमीन के पास ही स्थिर हो जाती है, जिससे सभी हानिकारक गैसें और धूलकण वायुमंडल में फंस जाते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तक तेज हवाएं नहीं चलतीं या बारिश नहीं होती, तब तक एनसीआरवासियों को इस दमघोंटू हवा से तत्काल राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।
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