Aaj Ka Mausam 1 June 2026: Delhi-NCR, Uttar Pradesh, Rajasthan और Haryana में लू का कहर जारी, जबकि दक्षिण और पूर्वी भारत में मानसून व प्री-मानसून बारिश से मिली राहत
उत्तर भारत में भीषण गर्मी, दक्षिण और पूर्वी राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज
Aaj Ka Mausam 1 June 2026: साल 2026 के जून महीने का यह पहला दिन पूरे देश के भीतर मौसम के दो बिल्कुल अलग और कड़े मिजाज के साथ शुरू हो रहा है। एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत के विशाल राज्य भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और जानलेवा लू के आक्रामक प्रकोप से बुरी तरह तप रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर दक्षिण और पूर्वी राज्यों के तटीय इलाकों में दक्षिण-पश्चिमी मानसून की दस्तक और प्री-मानसून की झमाझम बारिश ने मौसम को काफी सुहावना बना दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, आज 1 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बड़े भूभाग में दिन का अधिकतम पारा 40 डिग्री सेल्सियस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर जाएगा। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और इसके आसपास के जनपदों में आज दिन के समय चिलचिलाती धूप के साथ पारा 40 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज होने की प्रबल संभावना मौसम वैज्ञानिकों द्वारा जताई गई है।
इस नए महीने की शुरुआत के साथ ही हालांकि देश के कुछ हिस्सों में मानसून की प्रगति की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर मापी गई है, लेकिन इसके बावजूद बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के कारण देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में प्री-मानसून बारिश की गतिविधियां काफी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रही हैं। देश के जाने-माने कृषि और मृदा विज्ञान विशेषज्ञों का इस मौसमी बदलाव पर कहना है कि यदि आगामी जून के पूरे महीने में वर्षा का यह औसत ग्राफ सामान्य बना रहता है, तो यह देश भर के किसानों के लिए खरीफ की मुख्य फसलों की बुवाई के लिहाज से एक बेहद शानदार और सकारात्मक संकेत साबित होगा। लेकिन यदि तात्कालिक जमीनी हालातों को देखें, तो फिलहाल उत्तर भारत में जारी इस भीषण और असहनीय गर्मी के चलते आम नागरिकों का दैनिक जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और मौसम की ताजा जमीनी स्थिति
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और इसके आसपास के मैदानी इलाकों में आज सुबह से ही आसमान मुख्य रूप से पूरी तरह साफ और चमकीला बना रहेगा, जिसके चलते सूर्य की सीधी किरणें धरती के तापमान को बहुत तेजी से बढ़ाएंगी। मौसम विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार आज लखनऊ का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास कड़ाई से दर्ज किया जा सकता है। विशेष रूप से दोपहर के समय 12 बजे से लेकर 4 बजे के बीच सड़कों पर तेज तपती धूप और गर्म पछुआ हवाएं यानी लू चलने की पूरी आशंका बनी हुई है, जिसके कारण स्थानीय नागरिक प्रशासन ने आम जनता को बिना किसी जरूरी काम के दोपहर में बाहर न निकलने की विशेष सलाह दी है। हालांकि शाम ढलने के बाद पहाड़ों की तरफ से आने वाली हल्की हवाएं जरूर चलेंगी, लेकिन इसके बावजूद उमस का स्तर काफी ऊंचा रहेगा और बारिश की दूर-दूर तक कोई भी संभावना फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है।
लखनऊ के अलावा यदि उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े और औद्योगिक जनपदों की बात करें, तो कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, आगरा, झांसी और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में भी सूरज की तपिश का कड़ा प्रकोप लगातार बना हुआ है। हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ तटीय जिलों में स्थानीय वायुमंडलीय दबाव में आए बदलावों के कारण दोपहर के बाद आंशिक रूप से घने बादल छाए रह सकते हैं और वहां कुछ सीमित स्थानों पर तेज कड़क हवाओं के साथ हल्की प्री-मानसून बारिश की बौछारें पड़ने की उम्मीद भी मौसम विभाग ने जताई है। इसके बावजूद, पश्चिम और मध्य उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कड़े स्तर का हीट वेव अलर्ट जारी करते हुए लोगों को हर तरह से सतर्क और सावधान रहने को कहा है।
देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में लू का भयंकर तांडव
देश की राजधानी दिल्ली और इससे सटे दिल्ली-एनसीआर के इलाकों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आज 1 जून को गर्मी का मिजाज अपने चरम स्तर पर पहुंच सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आज दोपहर के समय दिल्ली के कुछ ऑटोमेटेड मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के बेहद कष्टदायक स्तर तक दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ ही रात का न्यूनतम तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस के ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण लोगों को रात के समय भी भयंकर गर्मी और चिपचिपी उमस का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली की सफदरजंग वेधशाला ने शहरवासियों को यह कड़ी सलाह दी है कि वे दिन में धूप के समय बाहर निकलते समय अपने चेहरे और सिर को सूती कपड़े या छाते से पूरी तरह ढक कर रखें। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी इस मौसम में शरीर के भीतर पानी की भारी कमी और अचानक होने वाले डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक से अपना कड़ा बचाव करने के लिए आम जनता को पूरे दिन में प्रचुर मात्रा में ओआरएस घोल, नींबू पानी और ताजे तरल पदार्थों का नियमित सेवन करने का कड़ा निर्देश दिया है।
दिल्ली से सटे अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और मरुस्थलीय राज्य राजस्थान में भी मौसमी हालात लगभग पूरी तरह से एक समान और चिंताजनक बने हुए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर और इसके रेतीले सीमावर्ती जिलों जैसे चुरू, बीकानेर और जैसलमेर में आज दिन का अधिकतम पारा 43 डिग्री सेल्सियस के करीब या उससे भी ऊपर रह सकता है, जिससे पूरी मरुभूमि इस समय एक भट्टी की तरह तप रही है। वहीं दूसरी ओर, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और पंजाब के मैदानी हिस्सों में पहाड़ों के करीब होने के कारण तापमान में मामूली सी आंशिक राहत जरूर देखी जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद वहां भी दिन का औसत तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस के बेहद गर्म दायरे के भीतर ही कड़ाई से दर्ज किया जाएगा।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई सहित संपूर्ण पश्चिमी भारत का मौसमी मिजाज और वहां वर्षा का दौर
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और इसके आस-पास के तटीय कोंकण क्षेत्रों में आज 1 जून को अरब सागर की तरफ से आने वाले मानसूनी बादलों की गतिविधियां काफी ज्यादा सक्रिय और आक्रामक दिखाई दे रही हैं। क्षेत्रीय मौसम केंद्र के अनुसार आज मुंबई महानगर का अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के बीच एक बेहद उमस भरे दायरे में बना रहेगा। मुंबई की आधुनिक लाइफलाइन लोकल ट्रेनों और सड़कों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए आज दिन भर आसमान में घने काले बादल छाए रहने और तटीय इलाकों में हल्की से लेकर मध्यम दर्जे की लगातार बारिश होने के साथ-साथ कुछ जगहों पर तेज कड़क हवाएं चलने की भी पूरी संभावना जताई गई है।
मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के ही खूबसूरत शहर पुणे, नासिक और पड़ोसी राज्य गुजरात के कुछ दक्षिणी हिस्सों व सौराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भी पिछले चौबीस घंटों के दौरान काफी अच्छी प्री-मानसून बारिश दर्ज की जा रही है, जो कि इस क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों के लिए कूटनीतिक रूप से एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर बनकर सामने आई है क्योंकि इससे खेतों की मिट्टी में जरूरी नमी लौट आई है और खेती के कामों को एक नई गति मिली है।
पूर्वी भारत के महानगर कोलकाता से लेकर दक्षिण के चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद का पूरा लाइव हाल
पूर्वी भारत के सबसे प्रमुख महानगर कोलकाता और पश्चिम बंगाल के गांगेय क्षेत्रों में आज नए महीने की शुरुआत के दिन मौसम आंशिक रूप से पूरी तरह बादलों से घिरा रहने वाला रहेगा। कोलकाता का अधिकतम तापमान आज 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जाएगा, लेकिन हवा में आर्द्रता का स्तर बहुत ऊपर चले जाने के कारण आम लोगों को पसीने वाली भयंकर चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, मौसम विभाग का यह भी कहना है कि जैसे-जैसे शाम नजदीक आएगी, वैसे ही सुंदरवन के डेल्टा की तरफ से उठने वाले कड़क बादलों के कारण शहर के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की गतिविधियां बहुत तेजी से बढ़ सकती हैं जो रात के समय तापमान को थोड़ा कम करेंगी।
इसके बिल्कुल विपरीत, यदि हम देश के सुदूर दक्षिण भारत के प्रमुख महानगरों जैसे चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद के मौसम का विश्लेषण करें, तो वहां हिंद महासागर और अरब सागर की जुगलबंदी के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून पहले ही पूरी तरह से अपनी कड़क रफ्तार पकड़ चुका है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आज दिन भर तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा और वहां आसमान में घने बादलों की मौजूदगी के कारण मध्यम दर्जे की मानसूनी बारिश होने की पूरी संभावना है। वहीं दूसरी ओर, कर्नाटक की राजधानी और आईटी हब बेंगलुरु में आज मौसम के भीतर एक बहुत ही सुखद और ठंडी वादियों जैसी ठंडक महसूस की जा सकती है, जहां दिन का अधिकतम तापमान मात्र 29 डिग्री सेल्सियस के बेहद आरामदायक स्तर तक सिमट कर रह जाएगा और हल्की रिमझिम फुहारें पूरे दिन शहर की खूबसूरती को बढ़ाएंगी।
वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिमी मानसून की जमीनी प्रगति और मौसम विभाग की ताजा दीर्घकालिक भविष्यवाणी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के राष्ट्रीय मुख्यालय द्वारा जारी किए गए नए संशोधित मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल देश के भीतर दक्षिण-पश्चिमी मानसून की कुल परफॉर्मेंस अपने सामान्य औसत मानकों से थोड़ी सी कमजोर या आंशिक रूप से असंतुलित रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जून के इस चालू महीने में पूरे देश के भीतर कुल मिलाकर औसत से थोड़ी कम मानसूनी बारिश दर्ज होने की आशंका है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने देश को यह कड़ा भरोसा भी दिलाया है कि आगामी जुलाई और अगस्त के मुख्य महीनों के दौरान मानसूनी पवनों की रफ्तार में बहुत ही शानदार सुधार होने की पूरी उम्मीद है जिससे पूरे देश में अच्छी वर्षा का कोटा पूरा हो जाएगा।
यदि उत्तर भारत के राज्यों की बात करें, तो इस साल मानसूनी हवाओं के मैदानी हिस्सों में पहुंचने के तय रोडमैप में थोड़ी प्रशासनिक देरी दर्ज की जा रही है। मौसम विज्ञान की पारंपरिक गणनाओं के अनुसार जो मानसून आमतौर पर हर साल 15 जून के आसपास दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश कर जाता था, वह इस बार वैश्विक जलवायु असंतुलन के कारण थोड़ा लेट हो सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर इस समय एक बहुत ही मजबूत कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो चुका है, जिससे प्रचुर मात्रा में नमी देश के पूर्वी राज्यों जैसे उड़ीसा, झारखंड और बिहार के रास्ते आगे बढ़ रही है, जो उत्तर भारत के मौसम को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
भीषण गर्मी के इस कड़े दौर में आम नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा और डॉक्टरों की जरूरी सलाह
देश भर में लगातार बढ़ती जा रही इस कड़े और भीषण गर्मी के कारण आम जनता के बीच कई तरह की गंभीर और संवेदनशील स्वास्थ्य समस्याएं काफी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रही हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों हीट स्ट्रोक, शरीर में पानी की अत्यधिक कमी यानी गंभीर डिहाइड्रेशन, टाइफाइड और पेट संबंधी विकारों जैसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की तादाद में भारी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए देश के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीम ने आम नागरिकों को यह सख्त हिदायत दी है कि वे दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक के सबसे गर्म समय के दौरान सीधे सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने और बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करें।
घर से बाहर निकलते समय हमेशा पूरी तरह से हल्के रंग के ढीले-ठाले सूती कपड़ों का ही उपयोग करें, धूप के तीखे चश्मों, छाते या टोपी का इस्तेमाल आवश्यक रूप से करें और अपने घरों के भीतर नियमित अंतरालों पर नींबू पानी, ताजी छाछ, ओआरएस घोल और मौसमी रसीले फलों का सेवन काफी ज्यादा बढ़ा दें। इसके साथ ही डॉक्टरों ने घर के छोटे बच्चों, बुजुर्ग नागरिकों और गर्भवती महिलाओं को इस मौसम में विशेष रूप से अत्यधिक सतर्कता और इनडोर रहने की सलाह दी है, तथा एक सामाजिक जिम्मेदारी के तहत प्रबुद्ध नागरिकों से यह आत्मीय अपील भी की गई है कि वे बेजुबान पशु-पक्षियों की जान बचाने के उद्देश्य से अपने घरों की छतों, बालकनियों और बागों में पानी से भरे मिट्टी के बर्तन आवश्यक रूप से बाहर रखें ताकि इस तपन में उन्हें भी संबल मिल सके।
देश के बदलते मौसमी चक्र का हमारी भारतीय कृषि और खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रभाव
भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नजरिए से देखें तो जून महीने की यह शुरुआत देश के करोड़ों किसानों के लिए अपने खेतों के भीतर खरीफ की मुख्य फसलों की बुवाई और उनकी शुरुआती तैयारियों का एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय कालखंड माना जाता है। देश के जिन राज्यों और तटीय हिस्सों में पिछले दिनों अच्छी प्री-मानसून वर्षा सफलतापूर्वक दर्ज हुई है, वहां के अन्नदाता किसानों ने बिना कोई समय गंवाए अपने खेतों के भीतर मुख्य धान की नर्सरी लगाने, मक्का, ज्वार और बाजरा की बुवाई के काम को काफी ज्यादा तेज कर दिया है। लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत, यदि हम उत्तर और मध्य भारत के ग्रामीण अंचलों की जमीनी स्थिति को देखें, तो वहां पानी की भारी किल्लत और सूखे जैसे कड़े हालात बन जाने के कारण किसानों के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें साफ तौर पर उभर आई हैं।
इस कड़े संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों ने संयुक्त रूप से किसान भाइयों को यह विशेष तकनीकी सलाह जारी की है कि वे केवल मानसूनी बारिश के भरोसे न बैठकर अपने स्थानीय स्तर पर मौजूद नलकूपों, नहरों और आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का भरपूर उपयोग करें तथा अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी समय रहते आवश्यक रूप से ले लें। कृषि वैज्ञानिकों का यह कड़ा रणनीतिक मत है कि यदि इस साल जून महीने के बिल्कुल अंत तक भी मैदानी भागों में अच्छी और मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो जाता है, तो खरीफ फसलों के कुल उत्पादन और देश के समग्र अन्न भंडार के ग्राफ पर इसका एक बहुत ही सकारात्मक और बम्पर असर देखने को मिलेगा।
नए महीने की शुरुआत में लंबी यात्राओं पर निकलने वाले मुसाफिरों और सैलानियों के लिए जरूरी सलाह
यदि आप आज 1 जून के इस पहले दिन अपने परिवार या व्यावसायिक काम के सिलसिले में किसी लंबी अंतरराज्यीय यात्रा पर निकलने की कूटनीतिक योजना बना रहे हैं, तो घर से बाहर कदम रखने से पहले देश के अलग-अलग हिस्सों के इन बदलते मौसमी समीकरणों का विशेष ध्यान कड़ाई से रखें। यदि आपकी यात्रा का रूट मुख्य रूप से उत्तर या मध्य भारत के मैदानी राज्यों से होकर गुजरता है, तो आपको रास्ते में पड़ने वाली अत्यधिक भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के कारण भारी शारीरिक परेशानी और थकान का सामना करना पड़ सकता है, जबकि इसके बिल्कुल विपरीत यदि आप देश के दक्षिणी या पूर्वी हिस्सों की तरफ जा रहे हैं, तो वहां होने वाली भारी मानसूनी बारिश आपके यात्रा के समय को प्रभावित कर सकती है।
इसीलिए रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और विमानन कंपनियों द्वारा यह साझा एडवाइजरी जारी की गई है कि सभी यात्री अपने सफर की शुरुआत करने से पहले संबंधित परिवहन माध्यमों के डिजिटल पोर्टल्स पर जाकर ट्रेनों, उड़ानों और रास्तों के लाइव रनिंग स्टेटस और नवीनतम वेदर अपडेट्स को एक बार अच्छी तरह चेक कर लें। इसके अलावा, जो सैलानी इस गर्मी से बचने के लिए देश के प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थलों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख और कश्मीर की वादियों की तरफ रुख कर रहे हैं, उनके लिए पहाड़ों का मौसम पूरी तरह से साफ, ठंडा और सुहावना रहने की उम्मीद है, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय पहाड़ी जिला प्रशासनों ने एहतियात के तौर पर कुछ संवेदनशील ऊंचे दर्रों पर अचानक होने वाले भूस्खलन की कड़क चेतावनी जारी करते हुए सैलानियों को केवल चिह्नित सुरक्षित मार्गों पर ही सफर करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का जून के तापमान और लंबी अवधि के पूर्वानुमानों पर सीधा असर
देश और दुनिया के प्रतिष्ठित पर्यावरणविदों और मौसम वैज्ञानिकों का इस बदलते वेदर पैटर्न पर यह कड़ा दृष्टिकोण है कि वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ते जा रहे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों के कारण ही अब हर साल जून जैसे मुख्य महीनों में गर्मी का यह आक्रामक रौद्र रूप अपनी पुरानी सभी सीमाओं को तोड़कर सामने आ रहा है। यदि पिछले कुछ सालों के मौसम विज्ञान के पुराने सांख्यिकी विवरणों और आंकड़ों का गहराई से मिलान किया जाए, तो यह कड़वा सच साफ तौर पर सामने आता है कि उत्तर भारत के कई शहरों में अब गर्मी के दिनों में रिकॉर्ड तोड़ उच्चतम तापमान दर्ज किए रहे हैं जो पर्यावरण के संतुलन के लिए एक बेहद गंभीर और कूटनीतिक रूप से कड़ा संकेत माना जा सकता है।
इसी संवेदनशीलता को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक अत्याधुनिक उपग्रहों और रडार प्रणालियों के माध्यम से देश के वायुमंडल की पल-पल की लाइव निगरानी बहुत ही कड़ाई से कर रहे हैं। मौसम विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यद्यपि आने वाले कुछ ही दिनों के भीतर प्री-मानसून की गतिविधियों के तेज होने से देश के कुछ चुनिंदा राज्यों को इस भीषण तपन से आंशिक राहत मिलने की उम्मीद जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन इसके बावजूद यह पूरी तरह से तय है कि साल 2026 का यह पूरा जून महीना देश की जनता के लिए अत्यधिक कड़क गर्मी, भीषण उमस और अचानक होने वाली मानसूनी बारिश का एक बहुत ही अनोखा व चुनौतीपूर्ण कूटनीतिक मिश्रण साबित होने जा रहा है।
निष्कर्ष
आज 1 जून 2026 को देश के अधिकांश और मुख्य हिस्सों के भीतर सूरज देवता के आक्रामक तेवर और भीषण गर्मी का यह चौतरफा प्रकोप पूरी तरह से अपनी कड़क रफ्तार पकड़े हुए है, लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत देश के सुदूर दक्षिण और पूर्वी हिस्सों में समय पर सक्रिय हुई मानसूनी बारिश ने वहां के नागरिकों और सूखी धरती को एक बहुत बड़ी और सुखद राहत प्रदान की है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित पूरे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों को इस समय मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए अपने स्वास्थ्य के प्रति अत्यधिक सजगता दिखाने और लू के इन थपेड़ों से अपना कड़ा बचाव करने की तात्कालिक और अनिवार्य आवश्यकता है।
आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मानसूनी हवाएं आगे बढ़ेंगी, वैसे-वैसे देश के अन्य राज्यों के मौसम के समीकरणों में भी कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। अतः इस बदलते मौसम के दौर में खुद को पूरी तरह स्वस्थ रखें, शरीर में जल के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रचुर मात्रा में पानी पिएं और देश के मौसम से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी नई प्रामाणिक खबर पर अपनी पैनी नजरें हमेशा कड़ाई से बनाए रखें, ताकि आप और आपका पूरा परिवार हर मौसम में पूरी तरह सुरक्षित और खुशहाल बना रहे।
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