Petrol-Diesel Price 1 June 2026: Lucknow में राहत बरकरार, जबकि Mumbai देश का सबसे महंगा ईंधन बाजार बना, कच्चे तेल और टैक्स संरचना पर टिकी आगे की दिशा
लखनऊ में स्थिर भाव, मुंबई में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल, उपभोक्ताओं को राहत
Petrol-Diesel Price 1 June 2026: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने जून महीने के पहले ही दिन आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। आज यानी 1 जून 2026 को देश के अधिकांश हिस्सों में ईंधन के दामों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक पेट्रोल और डीजल के भाव पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं। तेल कंपनियों द्वारा सुबह जारी की गई नई दरों के मुताबिक, घरेलू बाजार में पिछले कई दिनों से चल रही स्थिरता का दौर नए महीने में भी बरकरार है, जिससे आम जनता और परिवहन क्षेत्र ने राहत की सांस ली है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें इस समय 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास घूम रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की सीमित रेंज के कारण फिलहाल कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका नहीं है। हालांकि, देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) के अलग होने के कारण उपभोक्ताओं को ईंधन के लिए अलग-अलग कीमतें चुकानी पड़ रही हैं। मुंबई जैसे महानगरों में जहां तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं कुछ अन्य शहरों में दाम अपेक्षाकृत नियंत्रण में हैं।
लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में आज का भाव
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और इसके आस-पास के जिलों में रहने वाले वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि आज ईंधन के दामों में कोई इजाफा नहीं हुआ है। लखनऊ में आज पेट्रोल का भाव 101.85 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.50 रुपये प्रति लीटर पर टिकी हुई है। उत्तर प्रदेश के अन्य बड़े औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों जैसे कानपुर, वाराणसी, आगरा और गोरखपुर में भी लगभग इसी के आसपास तेल बिक रहा है।
उत्तर प्रदेश में ईंधन पर लगने वाले वैट के कारण कीमतें राष्ट्रीय औसत से थोड़ी अधिक दर्ज की जाती हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से कीमतों में कोई नया उछाल न आने से मध्यमवर्गीय परिवारों को बजट संभालने में मदद मिल रही है। स्थानीय व्यापारियों और दैनिक यात्रियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहने से उनकी दैनिक परिवहन लागत में कोई अप्रत्याशित बढ़ोतरी नहीं हुई है, जो इस त्योहारी और कामकाजी सीजन में एक बड़ी राहत है।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ईंधन का ताजा गणित
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में भी तेल की कीमतों में आज कोई फेरबदल नहीं किया गया है। दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल का भाव 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे सैटेलाइट शहरों में भी तेल के दाम इसी के आसपास बने हुए हैं।
दिल्ली सरकार और पड़ोसी राज्यों द्वारा ईंधन पर लगाए जाने वाले करों में फिलहाल कोई नया संशोधन नहीं किया गया है। इस स्थिरता का सबसे बड़ा फायदा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर में रोजाना हजारों की संख्या में वाणिज्यिक वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में ईंधन की दरों का स्थिर रहना आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने में मदद कर रहा है।
मुंबई और पश्चिमी भारत में महंगाई की मार सबसे ज्यादा
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और पश्चिमी भारत के राज्यों में ईंधन की कीमतें देश में सबसे ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई में आज एक लीटर पेट्रोल खरीदने के लिए उपभोक्ताओं को 111.21 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि डीजल का भाव 97.83 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। महाराष्ट्र में ईंधन पर लगने वाला भारी टैक्स और स्थानीय उपकर इस अत्यधिक महंगाई की मुख्य वजह हैं।
मुंबई के अलावा पुणे, नासिक, नागपुर के साथ-साथ गुजरात के सूरत और अहमदाबाद जैसे व्यापारिक शहरों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम काफी ऊंचे हैं। पश्चिमी भारत के परिवहन ऑपरेटरों का कहना है कि उच्च ईंधन लागत के कारण उनके परिचालन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लंबी दूरी की माल ढुलाई महंगी होने से इस क्षेत्र के विनिर्माण और व्यापार पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
कोलकाता, चेन्नई और दक्षिण भारतीय राज्यों की जमीनी स्थिति
पूर्वी और दक्षिणी भारत के महानगरों में भी ईंधन के दामों में स्थिरता का रुख साफ दिखाई दे रहा है। कोलकाता में आज पेट्रोल का भाव करीब 106.00 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.00 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 100.80 रुपये और डीजल का भाव 92.39 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे आईटी हब वाले शहरों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें 100 से 104 रुपये प्रति लीटर के दायरे में बनी हुई हैं। दक्षिण भारत के राज्यों में कृषि और सार्वजनिक परिवहन काफी हद तक डीजल की कीमतों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में तेल की कीमतों का नियंत्रण में रहना किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि डीजल महंगा होने से सिंचाई और फसलों की ढुलाई का खर्च सीधे बढ़ जाता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल मार्केट और भारतीय बाजार का संबंध
भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर होने वाली कोई भी हलचल सीधे तौर पर भारतीय पेट्रोल पंपों तक पहुंच जाती है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड ऑयल 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में की जाने वाली कटौती के फैसले आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
हाल ही में केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों को थोड़ी राहत देने के लिए निर्यात शुल्क में आंशिक कटौती की थी। इस कदम से तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन में सुधार हुआ है और वे अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का बोझ सीधे आम उपभोक्ताओं पर डालने से बच रही हैं। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहेगा, तब तक घरेलू बाजार में बड़ी वृद्धि की संभावना बेहद कम है।
आम उपभोक्ताओं की जेब और घरेलू बजट पर असर
भले ही आज कीमतें स्थिर हैं, लेकिन पेट्रोल और डीजल के मौजूदा ऊंचे स्तर ने आम आदमी की रसोई के बजट को प्रभावित कर रखा है। ईंधन की कीमतें बढ़ने या ऊंचे स्तर पर बने रहने से माल ढुलाई का किराया बढ़ जाता है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजें जैसे हरी सब्जियां, फल, दूध, दवाइयां और अन्य जरूरी राशन सामग्री पर पड़ता है, जिससे बाजार में खुदरा महंगाई का दबाव बढ़ जाता है।
लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों से यात्रा करने वाले लोगों को हर महीने अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च करना पड़ रहा है। छोटे व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि वेतन और मुनाफे में उस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिस अनुपात में पिछले कुछ वर्षों में ईंधन महंगा हुआ है। ऐसे में स्थिरता केवल तात्कालिक राहत देती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
वैकल्पिक ऊर्जा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव
पेट्रोल और डीजल की इन अनिश्चित और ऊंची कीमतों के कारण भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहा है। मध्यम वर्ग के उपभोक्ता अब पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कारों के बजाय तेजी से सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की तरफ रुख कर रहे हैं। देश के प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारों की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो ईंधन की निर्भरता को कम करने का एक बड़ा माध्यम बन रहा है।
दूसरी तरफ, सरकार देश में एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। अप्रैल 2026 से पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर तेजी से काम चल रहा है। इस कदम से न केवल कच्चे तेल के आयात बिल में भारी कमी आएगी, बल्कि घरेलू कृषि क्षेत्र को भी लाभ होगा। परिवहन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में वैकल्पिक ईंधन ही आम आदमी को इस महंगाई से पूरी तरह निजात दिला सकता है।
Petrol-Diesel Price 1 June 2026: क्या जून महीने में मिल सकती है टैक्स कटौती से राहत
देशभर में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच आम जनता और विभिन्न व्यापारिक संगठनों की ओर से टैक्स कम करने की मांग लगातार उठाई जा रही है। केंद्र सरकार ने पूर्व में एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके जनता को राहत दी थी, लेकिन अब गेंद राज्य सरकारों के पाले में है। कई राज्यों में वैट की दरें इतनी अधिक हैं कि वहां तेल की कीमतें सौ रुपये के पार बनी हुई हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि राज्य सरकारें अपनी कर नीतियों में थोड़ा लचीलापन लाएं और वैट की दरों में कटौती करें, तो आम आदमी को तुरंत 5 से 7 रुपये प्रति लीटर तक की राहत मिल सकती है। फिलहाल जून महीने की शुरुआत में किसी भी राज्य सरकार द्वारा टैक्स कम करने के संकेत नहीं मिले हैं, जिससे उपभोक्ताओं को मौजूदा दरों पर ही निर्भर रहना होगा।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावित चुनौतियां
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी जून और जुलाई के महीनों में घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें काफी हद तक वैश्विक राजनीतिक स्थिरता पर निर्भर करेंगी। यदि ओपेक देशों ने कच्चे तेल की आपूर्ति को और सीमित नहीं किया और वैश्विक मांग सामान्य रही, तो भारतीय बाजार में कीमतें इसी स्तर पर स्थिर रह सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे लंबी दूरी की यात्राओं के लिए सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें और अपने वाहनों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करें ताकि ईंधन की बर्बादी को रोका जा सके। तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे नई दरों की समीक्षा करती हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को किसी भी यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक स्रोतों से ताजा रेट की जानकारी अवश्य ले लेनी चाहिए।
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