Period Food Cravings: पीरियड्स के दौरान बार-बार कुछ खाने का मन क्यों करता है? चॉकलेट-चिप्स की क्रेविंग के पीछे छिपा है ये कारण

Period Food Cravings: पीरियड्स में क्यों होती है फूड क्रेविंग?

0

Period Food Cravings: पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले या उस दौरान अचानक से डार्क चॉकलेट, मसालेदार आलू चिप्स, बर्गर या मीठी पेस्ट्री खाने की तीव्र इच्छा होना एक बेहद आम अनुभव है, जिससे दुनिया भर की करोड़ों महिलाएं और लड़कियां हर महीने गुजरती हैं। अक्सर ज्यादातर महिलाओं को यही लगता है कि यह सब सिर्फ उनके बदलते मूड (मूड स्विंग्स) या मन की कमजोरी की वजह से हो रहा है, लेकिन मेडिकल साइंस की नजर में यह कहानी इतनी साधारण नहीं है। पीरियड्स के दिनों में होने वाली यह फूड क्रेविंग केवल एक सामान्य इच्छा नहीं है, बल्कि इसके पीछे महिला के शरीर में होने वाले कई हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव, मस्तिष्क की रासायनिक प्रक्रियाएं और न्यूट्रिशन (पोषण) की अंदरूनी जरूरतें जिम्मेदार होती हैं। जब भी शरीर में किसी खास मिनरल या एनर्जी की कमी होती है, तो हमारी बॉडी कुछ खास चीजें खाने के मजबूत संकेत यानी ‘क्रेविंग्स’ भेजती है।

Period Food Cravings: हॉर्मोन्स का खेल और सेरोटोनिन का गिरता स्तर

मासिक धर्म के दौरान होने वाली तीव्र इच्छाओं का सीधा संबंध महिला के मेंस्ट्रुअल साइकिल के ‘ल्यूटियल फेज’ (Luteal Phase) से होता है। ल्यूटियल फेज असल में ओव्यूलेशन और पीरियड्स शुरू होने के बीच का समय होता है। इस खास फेज के दौरान महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नाम के दो मुख्य हॉर्मोन्स के स्तर में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव आता है।

शरीर में होने वाले इसी हॉर्मोनल बदलाव की वजह से हमारे दिमाग का एक बेहद महत्वपूर्ण केमिकल ‘सेरोटोनिन’ (Serotonin) प्रभावित होता है। सेरोटोनिन को साइंस की भाषा में ‘फील-गुड या हैप्पी केमिकल’ भी कहा जाता है, जो इंसान के मूड को खुशहाल रखने और मानसिक संतुलन को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। पीरियड्स के दौरान सेरोटोनिन के स्तर में अचानक आई इस भारी गिरावट की वजह से लड़कियां बहुत उदास, चिड़चिड़ी या लो-एनर्जी महसूस करने लगती हैं। इसी समय हमारा दिमाग शुगर और हाई-कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स की डिमांड करता है, क्योंकि ऐसे मीठे और भारी फूड्स खाने से दिमाग में अस्थाई तौर पर सेरोटोनिन का उत्पादन बढ़ जाता है, जिससे महिलाओं को एक शॉर्ट-टर्म इमोशनल कंफर्ट और राहत मिलती है।

अलग-अलग क्रेविंग्स और उनके पीछे छिपे गुप्त शारीरिक कारण

डॉक्टर वैशाली शर्मा ने बताया कि शरीर में होने वाली हर अलग तरह की क्रेविंग का एक खास बायोलॉजिकल मतलब होता है, जिसे समझकर महिलाएं अपनी सेहत का बेहतर ख्याल रख सकती हैं:

1. चॉकलेट खाने की इच्छा होना

पीरियड्स के दिनों में चॉकलेट की क्रेविंग सबसे ज्यादा आम मानी जाती है। इसके पीछे केवल मानसिक संतुष्टि नहीं, बल्कि एक गहरा शारीरिक कारण भी छिपा है। डार्क चॉकलेट के अंदर प्रचुर मात्रा में ‘मैग्नीशियम’ (Magnesium) पाया जाता है। मैग्नीशियम हमारी मांसपेशियों को आराम देने (Muscles Relaxation), गर्भाशय के क्रैम्प्स (दर्द) को कम करने, मूड को बैलेंस करने और शरीर की थकान मिटाने के लिए बेहद जरूरी मिनरल है। मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के शरीर में मैग्नीशियम का स्तर काफी कम हो जाता है, जिससे बॉडी चॉकलेट की मांग करती है। इसके अलावा, चॉकलेट खाने से मस्तिष्क में डोपामाइन और सेरोटोनिन हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो चिड़चिड़ेपन को तुरंत दूर कर ऊर्जा का अहसास कराते हैं।

2. नमकीन, अचार और चिप्स खाने का मन करना

कई लड़कियों का मन पीरियड्स के दौरान तीखा, चटपटा, अचार, फ्राइज या अत्यधिक नमकीन स्नैक्स खाने के लिए मचलने लगता है। डॉक्टर इस स्थिति को शरीर में होने वाले ‘फ्लूइड रिटेंशन’ (शरीर में पानी जमा होना) और हॉर्मोनल बदलावों से जोड़कर देखते हैं। इस दौरान प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन के असंतुलन से पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या होती है। नमक की यह तीव्र इच्छा शरीर में माइल्ड डिहाइड्रेशन (पानी की हल्की कमी) या इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन का संकेत भी हो सकती है। हालांकि, इस समय ज्यादा पैकेट वाले प्रोसेस्ड नमकीन खाने से ब्लोटिंग की समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है, इसलिए महिलाओं को बाजार के चिप्स की जगह रोस्टेड नट्स, मखाने, सीड्स या हल्के मसाले वाले होममेड स्नैक्स का चुनाव करना चाहिए।

3. मीठा, पास्ता, ब्रेड और हेवी कार्ब्स की चाहत

पेस्ट्री, केक, पास्ता, नूडल्स या सफेद ब्रेड जैसे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स की क्रेविंग भी सेरोटोनिन के स्तर को तुरंत ऊपर उठाने की एक शारीरिक कोशिश होती है। ये फूड्स खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर लेवल को बहुत तेजी से ऊपर ले जाते हैं, जिससे कुछ मिनटों के लिए तो थकान गायब हो जाती है और मूड बहुत बढ़िया हो जाता है। लेकिन यह एनर्जी बहुत ही अस्थाई होती है। थोड़ी ही देर बाद शरीर में ‘शुगर क्रैश’ होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नीचे गिर जाता है और इसके बाद महिला को पहले से भी कहीं अधिक थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन अनहेल्दी ऑप्शंस की जगह ओट्स, साबुत अनाज, ताजे फल, और शकरकंद जैसे कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन करना चाहिए, जो शरीर की ऊर्जा को लंबे समय तक स्थिर रखते हैं।

4. रेड मीट और बर्गर खाने की इच्छा

कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भारी खाना, जैसे बर्गर या रेड मीट खाने की बहुत तेज इच्छा होती है। डॉक्टर बताते हैं कि यह लक्षण विशेषकर उन महिलाओं में देखा जाता है जिन्हें पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग (अत्यधिक रक्तस्राव) का सामना करना पड़ता है। ब्लीडिंग की वजह से शरीर में ‘आयरन’ (Iron) तत्व की भारी कमी हो जाती है, जिससे भयंकर कमजोरी, थकान और सांस फूलने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। शरीर इसी आयरन की कमी की भरपाई करने के लिए इन चीजों की क्रेविंग ट्रिगर करता है। इस स्थिति से बचने के लिए महिलाएं अपने खानपान में नेचुरल आयरन रिच फूड्स जैसे-पालक, अनार, दालें, फलियां, खजूर, लीन मीट और चुकंदर को शामिल कर सकती हैं।

इमोशनल ईटिंग और शरीर की असली जरूरत के अंतर को पहचानें

डॉक्टर वैशाली शर्मा ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि पीरियड्स के दौरान होने वाली हर क्रेविंग के पीछे केवल शारीरिक या पौष्टिक जरूरत ही नहीं होती, बल्कि बहुत बड़ा हाथ हमारी ‘इमोशनल ईटिंग’ (Emotional Eating) का भी होता है। पीरियड्स के दिनों में मूड स्विंग्स, एंग्जायटी, काम का तनाव और शारीरिक दर्द के कारण महिलाएं खुद को मानसिक रूप से कमजोर महसूस करती हैं। ऐसे में भोजन या पसंदीदा स्नैक्स उनके लिए एक हीलिंग या कंफर्ट टूल की तरह काम करते हैं।

डॉक्टरों की सलाह है कि इन इच्छाओं को अंदर ही अंदर दबाने या खुद को पूरी तरह से रोकने की जरूरत बिल्कुल नहीं है, क्योंकि अपनी इच्छाओं को जबरन दबाने से मानसिक तनाव और क्रेविंग्स दोनों कई गुना ज्यादा बढ़ जाती हैं। सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि आप अपनी सेहत और स्वाद के बीच एक सही संतुलन (Balance) बनाएं। खुद को किसी अनहेल्दी फूड की लत से बचाते हुए, कभी-कभार अपनी पसंदीदा डार्क चॉकलेट या स्नैक का एक छोटा सा हिस्सा बिना किसी आत्म-ग्लानि (Guilt) के खाना पूरी तरह से सुरक्षित और सही है।

इन 4 आसान लाइफस्टाइल टिप्स की मदद से क्रेविंग्स को करें कंट्रोल

अपने खानपान में सुधार करने के साथ-साथ आप अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके भी इन अनहेल्दी क्रेविंग्स की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकती हैं:

  • भरपूर मात्रा में पानी पिएं: कई बार हमारा दिमाग पानी की प्यास और भोजन की भूख के बीच अंतर नहीं समझ पाता। डिहाइड्रेशन होने पर भी भूख या क्रेविंग जैसा महसूस होने लगता है। इसलिए दिनभर खुद को अच्छी तरह हाइड्रेटेड रखें।

  • 7-8 घंटे की गहरी नींद लें: पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन्स (घ्रेलिन और लेप्टिन) का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिससे हाई-शुगर और हाई-फैट वाले जंक फूड्स खाने की इच्छा दोगुनी हो जाती है।

  • हल्की फिजिकल एक्सरसाइज: पीरियड्स के दिनों में या उससे पहले नियमित रूप से हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग या प्राणायाम करें। एक्सरसाइज करने से शरीर में नेचुरल फील-गुड एंडोर्फिन हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो तनाव को कम कर बेवजह की क्रेविंग्स को शांत करते हैं।

  • समय पर बैलेंस्ड मील लें: व्यस्तता के कारण खाना छोड़ने या भोजन स्किप करने से बचें। जब आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं, तो ब्लड शुगर का स्तर अस्थिर हो जाता है, जिससे रिफाइंड कार्ब्स और मीठा खाने की क्रेविंग बहुत तेज हो जाती है।

Read More Here:- 

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.