LUCC Scam: 30.51 लाख निवेशकों से 10,314 करोड़ की ठगी, ED ने सागा ग्रुप के रवि शंकर तिवारी को किया गिरफ्तार

30 लाख से ज्यादा निवेशकों से 10,314 करोड़ की ठगी, ED ने PMLA के तहत की कार्रवाई

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LUCC Scam: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में फैले एक बेहद विशाल वित्तीय घोटाले ने लाखों छोटे निवेशकों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) और इससे जुड़ी अन्य फर्जी शेल कंपनियों ने भोले-भाले लोगों को कम समय में दोगुना मुनाफा देने का बड़ा लालच देकर करीब 30.51 लाख निवेशकों से कुल 10,314 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध रूप से जुटाई थी। इस महाघोटाले पर कड़ा एक्शन लेते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत सागा ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी रवि शंकर तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे हड़कंप मच गया है।

ED की बड़ी दंडात्मक कार्रवाई, रवि शंकर तिवारी की गिरफ्तारी और कोर्ट की 10 दिन की रिमांड

प्रवर्तन निदेशालय ने वित्तीय धोखाधड़ी के इस गंभीर मामले में मुख्य आरोपी रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को 14 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें अगले दिन दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता और भारी गबन को देखते हुए आरोपी को 10 दिनों की सख्त ईडी कस्टडी में भेज दिया है। ईडी की यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ समेत विभिन्न थानों में दर्ज कई प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। आरोपी रवि तिवारी वर्ष 2009 से ही सागा ग्रुप से जुड़ा हुआ था और उसने समूह की कई मुखौटा कंपनियों में वरिष्ठ प्रशासनिक पद संभालकर अवैध धन को ठिकाने लगाने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

सागा ग्रुप के प्रमोटर समीर अग्रवाल की भूमिका और ठगी के पैसे से खरीदी गई अवैध संपत्तियां

ईडी की प्रारंभिक वित्तीय जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट का नेतृत्व सागा ग्रुप के प्रमोटर समीर अग्रवाल द्वारा किया जा रहा है, जो वर्तमान समय में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए विदेश भाग गया है। रवि शंकर तिवारी सागा ग्रुप की मुख्य कंपनियों जैसे एडवांटेज ट्रेडकॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑप्शन वन इंडस्ट्रीज और एलयूसीसी में बेहद सक्रिय भूमिका निभाता था। जांच एजेंसी ने पाया कि निवेशकों की गाढ़ी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा रवि तिवारी और उसके परिवार के निजी बैंक खातों में अवैध रूप से ट्रांसफर किया गया था, जिसका उपयोग उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में आलीशान मकान, फ्लैट, दुकानें और व्यावसायिक संपत्तियां खरीदने में किया गया, जिन्हें ईडी ने अब अस्थायी रूप से कुर्क करना शुरू कर दिया है।

LUCC Scam: मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों में पारदर्शिता का संकट और निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

यह व्यापक घोटाला भारतीय गांवों और छोटे कस्बों में काम करने वाले स्थानीय एजेंटों के जरिए फैलाया गया था, जहां लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश कर दी थी। यह संकट एक बार फिर से देश की मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों में वित्तीय पारदर्शिता और नियामक निगरानी की भारी कमी को साफ उजागर करता है, जिससे लाखों परिवार आज आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

निष्कर्ष: एलयूसीसी द्वारा की गई यह 10,314 करोड़ रुपये (LUCC Scam) की ऐतिहासिक ठगी देश के बैंकिंग और कॉपरेटिव इतिहास का एक बड़ा काला अध्याय है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय अब पैसे के अंतिम बहाव (मनी ट्रेल) का पता लगाने में जुटा है। देश के वित्तीय विशेषज्ञों ने सभी आम नागरिकों को यह कड़ी व्यावहारिक सलाह दी है कि वे भविष्य में किसी भी अनधिकृत कॉपरेटिव सोसाइटी या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) में अपनी गाढ़ी कमाई का निवेश करने से पहले सरकार के केंद्रीय रजिस्ट्रार और आरबीआई द्वारा जारी वैध लाइसेंस की गहन जांच अवश्य कर लें।

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