Yoga for Anxiety: क्या योग सच में एंग्जाइटी को जड़ से मिटा सकता है? जानें माइंडफुलनेस योग के वैज्ञानिक फायदे, असरदार आसन और सही अभ्यास विधि
माइंडफुलनेस योग से एंग्जाइटी में कमी, GABA बढ़ता है, पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम सक्रिय, बालासन-शवासन-अनुलोम-विलोम के असरदार फायदे
Yoga for Anxiety: आज के भागदौड़ भरे और तनावपूर्ण जीवन में एंग्जाइटी यानी चिंता और बेचैनी एक बेहद सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया भर में करोड़ों लोग एंग्जाइटी डिसऑर्डर से पीड़ित हैं और भारत में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। एंग्जाइटी में व्यक्ति अत्यधिक और लगातार तनाव, बेचैनी, डर और घबराहट महसूस करता है। इससे न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। ऐसे में लोग दवाओं के अलावा वैकल्पिक और प्राकृतिक उपायों की तरफ देख रहे हैं और इनमें सबसे प्रमुख नाम है योग का।
एंग्जाइटी क्या है और यह कैसे होती है?
एंग्जाइटी केवल थोड़ी घबराहट या चिंता नहीं है। यह एक गंभीर मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के या सामान्य परिस्थितियों में भी अत्यधिक डर और बेचैनी महसूस करता है। एंग्जाइटी के लक्षणों में तेज दिल की धड़कन, पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी शामिल हैं। जब हम तनाव या खतरे में होते हैं तो मस्तिष्क कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन रिलीज करता है। यह शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है लेकिन एंग्जाइटी में यह प्रतिक्रिया बिना वास्तविक खतरे के भी लगातार सक्रिय रहती है।
योग और एंग्जाइटी का वैज्ञानिक संबंध
अब विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया है कि योग एंग्जाइटी को कम करने में वास्तव में प्रभावी है। कई अंतरराष्ट्रीय शोधों में यह पाया गया है कि नियमित योग अभ्यास से मस्तिष्क में GABA यानी गामा-एमिनोब्यूटिरिक एसिड का स्तर बढ़ता है। GABA एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क की उत्तेजना को कम करता है और शांति की अनुभूति देता है। योग के दौरान धीमी और गहरी सांस लेने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है जिसे रेस्ट एंड डाइजेस्ट सिस्टम भी कहते हैं। यह प्रणाली हृदय गति को धीमा करती है, रक्तचाप कम करती है और शरीर को शांत अवस्था में लाती है।
माइंडफुलनेस योग क्या है और यह क्यों है खास
माइंडफुलनेस योग परंपरागत योग और माइंडफुलनेस मेडिटेशन का संयोजन है। इसमें शारीरिक आसनों के साथ-साथ वर्तमान क्षण पर पूरा ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया जाता है। माइंडफुलनेस का अर्थ है वर्तमान क्षण में पूरी जागरूकता के साथ रहना बिना किसी निर्णय के। माइंडफुलनेस योग में हर आसन करते समय सांस की गति, शरीर की संवेदनाओं और मन में उठने वाले विचारों पर ध्यान दिया जाता है। यह अभ्यास धीरे-धीरे मन को अतीत की चिंताओं और भविष्य के डर से वर्तमान में लाता है जो एंग्जाइटी का सबसे बड़ा कारण होता है।
एंग्जाइटी के लिए सबसे असरदार योगासन
कुछ योगासन विशेष रूप से एंग्जाइटी को कम करने में प्रभावी पाए गए हैं। बालासन यानी Child Pose एंग्जाइटी के लिए सबसे आरामदायक आसनों में से एक है। इस आसन में शरीर भ्रूण की स्थिति में आता है जो मस्तिष्क को सुरक्षा और शांति का संदेश देता है। शवासन यानी Corpse Pose योग की सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक है। इसमें पूरे शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ दिया जाता है। यह गहरी विश्रामावस्था शरीर और मन दोनों को पुनर्जीवित करती है। विपरीत करणी यानी Legs Up the Wall Pose एक ऐसा आसन है जिसमें पैरों को दीवार के सहारे ऊपर उठाया जाता है। सेतुबंधासन यानी Bridge Pose छाती को खोलता है और सांस लेने की क्षमता बढ़ाता है।
प्राणायाम है एंग्जाइटी का सबसे असरदार उपाय
योगासनों के साथ-साथ प्राणायाम यानी सांस का नियंत्रण एंग्जाइटी को कम करने में अत्यंत प्रभावी है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम जिसे नाड़ी शोधन भी कहते हैं मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों को संतुलित करता है और मन को शांत करता है। भ्रामरी प्राणायाम जिसमें भौंरे जैसी आवाज निकालते हुए सांस छोड़ी जाती है तुरंत शांति देता है। 4-7-8 सांस तकनीक जिसमें 4 सेकंड सांस लेना, 7 सेकंड रोकना और 8 सेकंड में छोड़ना होता है एंग्जाइटी अटैक के दौरान बेहद प्रभावी है। यह तकनीक नर्वस सिस्टम को तुरंत रिलैक्स करने में मदद करती है।
Yoga for Anxiety: योग की सीमाएं भी जानें
यहां एक महत्वपूर्ण बात जाननी जरूरी है। योग एंग्जाइटी के लक्षणों को कम करने में निश्चित रूप से सहायक है लेकिन गंभीर एंग्जाइटी डिसऑर्डर जैसे Generalized Anxiety Disorder, Panic Disorder या PTSD के मामलों में केवल योग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थितियों में मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक की पेशेवर मदद लेना जरूरी है। योग को पेशेवर उपचार के पूरक के रूप में उपयोग किया जा सकता है लेकिन इसका स्थान नहीं ले सकता। हल्की से मध्यम एंग्जाइटी में नियमित योग अभ्यास बेहद लाभकारी है और इसके कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हैं।
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