FSSAI New Rules: FSSAI का बड़ा प्रस्ताव, स्कूल के 50 मीटर के दायरे में नहीं बिकेंगे चिप्स-कोल्ड ड्रिंक्स
FSSAI New Rules: FSSAI ने स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है। जानें बच्चों पर क्या पड़ेगा असर।
FSSAI New Rules: अगर आपका बच्चा भी स्कूल से लौटते वक्त गेट के बाहर से चिप्स, कुरकुरे या कोल्ड ड्रिंक खरीदने की जिद करता है, तो यह खबर आपके लिए खास मायने रखती है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI अब एक ऐसा बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है, जिससे स्कूल के आसपास मिलने वाले जंक फूड पर लगाम लग सकती है। दरअसल आज के दौर में बच्चों को घर के सादे खाने से ज्यादा बाहर का चटपटा जंक फूड लुभाता है, और यही आदत आगे चलकर उनकी सेहत के लिए मुसीबत बन सकती है। सवाल यह है कि आखिर FSSAI का यह प्रस्ताव है क्या, और अगर यह लागू हो गया तो बच्चों की जिंदगी में क्या बदलाव आएगा।
देखने पर लगता है कि यह सिर्फ एक नियम भर नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत को लेकर एक गंभीर चिंता से उपजा फैसला है। मामला कुछ इस तरह से है कि स्कूल के बाहर आसानी से मिलने वाला जंक फूड बच्चों में कम उम्र से ही गलत खानपान की आदत डाल रहा है, और यही आदत आगे चलकर कई बीमारियों की वजह बन सकती है।
FSSAI New Rules: क्या है FSSAI का यह नया प्रस्ताव
FSSAI के सीईओ के मुताबिक स्कूल कैंपस के अंदर और उसके 50 मीटर के दायरे में एचएफएसएस यानी हाई फैट, शुगर और सॉल्ट वाले फूड की बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। FSSAI का मानना है कि अगर बच्चों को स्कूल के आसपास ज्यादा जंक फूड आसानी से उपलब्ध ही नहीं होगा, तो शुरुआत से ही उन्हें इसे खाने की आदत नहीं पड़ेगी।
यह सोच काफी हद तक तार्किक भी लगती है, क्योंकि बचपन में बनने वाली खानपान की आदतें अक्सर लंबे समय तक साथ रहती हैं। अगर बच्चे शुरू से ही हेल्दी विकल्पों के आसपास रहेंगे, तो जंक फूड की तलब खुद-ब-खुद कम हो सकती है।
किन-किन चीजों पर लग सकती है रोक
FSSAI की तैयारी के मुताबिक स्कूल के 50 मीटर के दायरे में कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें ज्यादा फैट वाला खाना, कोल्ड ड्रिंक्स, चिप्स, ज्यादा शुगर वाला खाना और तेज नमक वाला खाना शामिल है। यानी वे सभी चीजें जिन्हें आमतौर पर बच्चे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं, इसी दायरे में आती हैं।
यहां एक जरूरी बात समझनी होगी कि यह सिर्फ किसी एक प्रोडक्ट पर बैन नहीं, बल्कि एक पूरी कैटेगरी को टारगेट किया जा रहा है, जो पोषण के लिहाज से बच्चों के लिए फायदेमंद नहीं मानी जाती।
अभी सिर्फ प्रस्ताव, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी बाकी
यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई लागू हो चुका नियम नहीं। FSSAI ने इस नियम से जुड़ा ड्राफ्ट रेगुलेशन तैयार कर लिया है और इसे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया है। लेकिन अभी इस पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आना बाकी है।
अगर सुप्रीम कोर्ट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तभी आने वाले समय में स्कूल के 50 मीटर के दायरे में कोल्ड ड्रिंक्स, चिप्स और इसी तरह के अन्य जंक फूड की बिक्री पर रोक लागू हो सकेगी। यह एक अप्रत्याशित पहलू भी है कि इतने बड़े और चर्चित प्रस्ताव का भविष्य अभी पूरी तरह अदालत के फैसले पर टिका है।
अगर लागू हुआ तो बच्चों पर क्या पड़ेगा असर
अगर यह प्रस्ताव मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाता है, तो इसका सीधा असर बच्चों की रोजमर्रा की आदतों पर दिखेगा। सबसे पहला बदलाव यह होगा कि स्कूल के आसपास कोल्ड ड्रिंक्स और चिप्स जैसे जंक फूड आसानी से मिलने बंद हो जाएंगे। जब यह चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं होंगी, तो धीरे-धीरे बच्चों की इन्हें खाने की आदत भी छूट सकती है।
जानकार बताते हैं कि जब बच्चों के पास जंक फूड का विकल्प सीमित होगा, तो वे स्वाभाविक रूप से घर का बना खाना और फल जैसे पौष्टिक स्नैक्स ज्यादा खाने लगेंगे। इससे लंबे समय में उन्हें जंक फूड की अधिकता से जुड़ी बीमारियों से बचाने में भी मदद मिल सकती है।
कम उम्र में आदत, लंबे समय का फायदा
इस प्रस्ताव के पीछे की सोच यह भी है कि अगर बच्चे कम उम्र से ही हेल्दी फूड खाने के आदी हो जाएं, तो बड़े होने पर उन्हें जंक फूड की क्रेविंग यानी तलब कम महसूस होगी। यह बात आम अभिभावकों के लिए राहत की खबर हो सकती है, जो अक्सर बच्चों की जिद के आगे मजबूर होकर उन्हें जंक फूड खरीद कर देते हैं।
आम तौर पर मां-बाप अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन स्कूल के बाहर आसानी से मिलने वाला जंक फूड उनकी कोशिशों पर पानी फेर देता है। ऐसे में अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह सीधे तौर पर हर घर के बच्चे और अभिभावक दोनों के लिए राहत की बात साबित हो सकता है।
FSSAI New Rules: आम परिवारों के लिए क्यों है यह खबर अहम
भारत में बचपन से ही जंक फूड की आदत लगना एक आम समस्या बन चुकी है, और इसका असर आगे चलकर मोटापे, डायबिटीज जैसी बीमारियों के रूप में सामने आता है। ऐसे में FSSAI का यह प्रस्ताव सीधे तौर पर हर उस परिवार को प्रभावित करेगा, जिनके बच्चे स्कूल जाते हैं। यह सिर्फ एक सरकारी नियम भर नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत सुधारने की दिशा में एक ठोस कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अगर यह नियम पूरे देश में लागू होता है, तो स्कूलों के आसपास का माहौल भी काफी हद तक बदल सकता है, जहां अभी जंक फूड की दुकानें और ठेले आम नजारा हैं।
FSSAI का यह प्रस्ताव बच्चों की सेहत को लेकर एक जरूरी और सराहनीय कदम माना जा रहा है, लेकिन इसका असल असर तभी दिखेगा जब सुप्रीम कोर्ट से इसे हरी झंडी मिलेगी। स्कूल के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर रोक लगने से बच्चों की खानपान की आदतें सुधर सकती हैं, और उन्हें कम उम्र से ही हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ मोड़ा जा सकता है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रस्ताव पर आखिर कब और क्या फैसला सुनाता है। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है।
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