World Bank Report 2026: कमोडिटी की कीमतों में 23% उछाल का अनुमान, भारत पर क्या होगा असर?

वैश्विक बाजार में ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक धातुओं की कीमतें बढ़ने से भारत की महंगाई, आयात बिल और सरकारी सब्सिडी पर पड़ सकता है असर।

0

World Bank Report 2026: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर महंगाई और आपूर्ति संकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्ष, समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन बाधाओं के बीच विश्व बैंक (World Bank) ने अपनी द्विवार्षिक ‘कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक’ रिपोर्ट में एक गंभीर चेतावनी जारी की है। विश्व बैंक के ताजा विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2026 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी की कीमतों में औसतन 23 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इस संभावित उछाल में सबसे बड़ा झटका ऊर्जा क्षेत्र को लगने का अनुमान है, जबकि कृषि उत्पाद, उर्वरक और औद्योगिक धातुएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक महंगी हो सकती हैं। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था और ऊर्जा व खाद्य तेलों के बड़े आयातक के रूप में भारत के लिए यह रिपोर्ट नीतिगत और आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

World Bank Report 2026: कच्चे तेल की कीमतों में 32 प्रतिशत तक तेजी का जोखिम, ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार जाने के आसार

विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक 2026 में वैश्विक ऊर्जा सूचकांक में 32 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि देखने को मिल सकती है। मध्य पूर्व के संवेदनशील तेल उत्पादक क्षेत्रों में जारी सैन्य तनाव के चलते तेल की दैनिक आपूर्ति और रिफाइनिंग तंत्र पर लगातार दबाव बना हुआ है। रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल का औसत भाव, जो वर्ष 2025 में लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा था, वह 2026 में उछलकर 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यदि भू-राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंचा तो इसके 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी छूने की आशंका बनी हुई है।

इसके साथ ही वर्ष 2026 में वैश्विक कच्चे तेल के कुल उत्पादन में 5.2 प्रतिशत की अप्रत्याशित गिरावट आने का अनुमान है। वर्ष 2020 की वैश्विक महामारी के दौर को यदि छोड़ दिया जाए, तो विगत चार दशकों से अधिक समय में वैश्विक स्तर पर तेल उत्पादन में आने वाली यह सबसे बड़ी सालाना गिरावट दर्ज होगी। भारत अपनी घरेलू पेट्रोलियम आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के महंगे होने से देश के आयात बिल, चालू खाता घाटे (CAD) और विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे लॉजिस्टिक्स, माल ढुलाई और विनिर्माण लागत में इजाफा होने की संभावना बढ़ जाती है।

वैश्विक खाद्य आपूर्ति शृंखला पर गहराया संकट, कृषि उत्पादों में 18 प्रतिशत की संचयी वृद्धि की चेतावनी

ऊर्जा के पश्चात खाद्य कमोडिटी का बाजार वैश्विक नीति-निर्माताओं के लिए दूसरी सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरा है। विश्व बैंक के अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक खाद्य कमोडिटी की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत और वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है, जो दोनों वर्षों को मिलाकर कुल 18 प्रतिशत की भारी संचयी बढ़ोतरी बनती है।

इस संभावित खाद्य संकट के पीछे कई बहुआयामी कारक सक्रिय हैं। पश्चिम एशिया का संघर्ष, लाल सागर और स्वेज नहर के जरिए होने वाले समुद्री आवागमन में बार-बार पैदा होने वाली रुकावटें और काला सागर गलियारे में खाद्यान्न पोतों की सुरक्षा से जुड़ी अनिश्चितताएं अनाज के वैश्विक प्रवाह को बाधित कर रही हैं। इसके साथ ही प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ और मौसम के अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव ने लैटिन अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में फसल उत्पादन को अनिश्चित बना दिया है। हालांकि भारत खाद्यान्न के मामले में बड़े पैमाने पर आत्मनिर्भर है और देश के पास गेहूं व चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध रहता है, किंतु खाद्य तेलों और दालों के वैश्विक स्तर पर महंगे होने से घरेलू खुदरा मुद्रास्फीति पर अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है।

उर्वरकों में 14 प्रतिशत और औद्योगिक धातुओं में 25 प्रतिशत तक तेजी का दबाव

खेती-किसानी के लिए अनिवार्य उर्वरकों (खाद) की वैश्विक कीमतों में वर्ष 2026 के दौरान 14 प्रतिशत की उछाल आने की बात कही गई है। प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ने और रासायनिक संयंत्रों की परिचालन लागत में वृद्धि के कारण यूरिया, डीएपी और पोटाश के अंतरराष्ट्रीय दाम चढ़ सकते हैं। भारत के लिए यह विषय इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि वैश्विक खाद के दाम बढ़ते हैं तो केंद्र सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का वित्तीय भार बढ़ सकता है, यद्यपि सरकारी प्रयासों से किसानों को नियंत्रित दरों पर खाद उपलब्ध कराई जाती रही है।

औद्योगिक धातुओं की श्रेणी में एल्युमीनियम, तांबा, जिंक और टिन की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की तीव्र वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी, सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), उन्नत बैटरी निर्माण और आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटरों की स्थापना में इन धातुओं की मांग लगातार ऐतिहासिक उच्च स्तर पर बनी हुई है। धातुओं के महंगे होने से ऑटोमोबाइल विनिर्माण, बुनियादी ढांचा निर्माण और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की इनपुट लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।

World Bank Report 2026: सेफ हेवन के रूप में सोने-चांदी में 40 प्रतिशत तक उछाल, 2027 के राहत अनुमान पर अनिश्चितता

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अस्थिरता के इस माहौल में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने और कीमती धातुओं की तरफ निवेशकों का आकर्षण अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि वर्ष 2026 के दौरान कीमती धातुओं के वैश्विक मूल्य सूचकांक में 40 प्रतिशत तक की जबर्दस्त तेजी देखने को मिल सकती है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा भंडारों में सोने की भारी खरीद और अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों के चक्र में नरमी के संकेत इस तेजी को अतिरिक्त बल प्रदान कर रहे हैं। भारत में सोने की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों के अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और आयात शुल्क संरचना से तय होती हैं, जिसके चलते घरेलू सर्राफा बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतें नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।

विश्व बैंक के आर्थिक मॉडल के अनुसार यदि वैश्विक तनाव शांत होता है, तो वर्ष 2027 में कुल कमोडिटी दरों में लगभग 7 प्रतिशत की सुधारात्मक गिरावट आने की आशा है। हालांकि यह संभावना पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि ऊर्जा आपूर्ति में नए व्यवधान उत्पन्न हुए, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक उच्च ब्याज दरों और चिपचिपी मुद्रास्फीति (Sticky Inflation) से जूझना पड़ सकता है। भारत के संदर्भ में सरकार के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, खाद्यान्न प्रबंधन नीतियां और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाले कदम इन वैश्विक झटकों से आम नागरिकों की सुरक्षा करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.