Jamia Students Protest: जामिया में 17 दिन से डटे छात्र चुनाव की तारीख पर अड़े, शिक्षा मंत्री ने गुंडागर्दी पर चेताया

Jamia Students Protest: जामिया में 17 दिन से डटे छात्र चुनाव की तारीख पर अड़े, शिक्षा मंत्री ने गुंडागर्दी पर चेताया

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Jamia Students Protest: दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में पिछले करीब दो दशकों से रुके हुए छात्र संघ चुनावों को बहाल करने की मांग अब बड़े विवाद में बदल गई है। छात्र लगातार 17 दिनों से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनकी सीधी मांग है कि चुनाव की पक्की तारीख का ऐलान किया जाए और यूनियन के संविधान को तुरंत लागू किया जाए। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए गुंडागर्दी बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने कैंपस में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की। इंतजामिया की तरफ से जारी तस्वीरों में टूटे शीशे और नुकसान पहुंचाए गए सीसीटीवी कैमरे दिखाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि छात्रों को आश्वासन दिया गया था कि यूनियन संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव करा लिए जाएंगे। लेकिन छात्र सिर्फ इस वादे से संतुष्ट नहीं हैं और तय तारीख की मांग कर रहे हैं।

छात्रों की मांग क्या है और आंदोलन कितने दिन से चल रहा है?

जामिया में छात्र संघ चुनाव 2006 के बाद से निलंबित हैं। छात्रों का कहना है कि यह उनका लोकतांत्रिक हक है। वे चाहते हैं कि चुनाव की पक्की तारीख घोषित की जाए और यूनियन संविधान लागू हो। पिछले 17 दिनों से वे कैंपस में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग साफ है कि बिना तारीख के सिर्फ वादे से काम नहीं चलेगा।

आंदोलन के दौरान कई बार हालात तनावपूर्ण हो गए। छात्र किसी भी हाल में पीछे नहीं हट रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ठोस ऐलान की मांग की है। दो दशकों से रुके चुनावों को बहाल करने की उनकी मांग अब और तेज हो गई है।

प्रशासन ने क्या आरोप लगाए और तस्वीरें क्या दिखाती हैं?

विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कैंपस में जबरन घुसने और तोड़फोड़ करने का इल्जाम लगाया है। जारी तस्वीरों में टूटे हुए शीशे और नुकसान पहुंचाए गए सीसीटीवी कैमरे साफ दिख रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि उन्होंने छात्रों को तसल्ली दी थी कि संविधान मंजूरी के 15 दिनों के अंदर चुनाव हो जाएंगे।

इसके बावजूद छात्र सिर्फ वादे पर भरोसा नहीं कर रहे और पक्की तारीख मांग रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि हंगामा बढ़ने से कैंपस की शांति भंग हो रही है। दोनों पक्षों के बीच भरोसे का संकट बना हुआ है।

शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने क्या चेतावनी दी?

बुधवार को बढ़ते विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पूरी घटना को अफसोसनाक बताया और साफ कहा कि सरकार किसी भी तरह की गुंडागर्दी या नकाब पहनकर किए जाने वाले उपद्रव को बर्दाश्त नहीं करेगी।

मंत्री ने याद दिलाया कि 2006 में हुए भारी बवाल और हिंसा के बाद ही यहां चुनाव निलंबित किए गए थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मांग की आड़ में विश्वविद्यालय विरोधी हरकतों में शामिल हैं। उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई है। दिल्ली पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच करने की अपील भी की गई है।

7 सदस्यीय कमेटी क्यों बनाई गई और आगे क्या हो सकता है?

छात्रों की जायज शिकायतों को सुनने और मामले को सुलझाने के लिए सीनियर डीन और प्रोफेसरों की एक 7-सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों की चिंताओं पर गौर किया जाएगा। अब देखना यह है कि यह नई कमेटी लगभग दो दशकों से चले आ रहे चुनावी गतिरोध को शांति से खत्म कर पाएगी या नहीं।

कमेटी का काम छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करना और समाधान निकालना होगा। अगर कमेटी प्रभावी ढंग से काम करती है तो हंगामा थम सकता है। लेकिन छात्रों की पक्की तारीख की मांग और प्रशासन के आश्वासन के बीच फर्क बना हुआ है।

जामिया में चुनाव बहाली का भविष्य क्या है?

जामिया में छात्र संघ चुनाव 2006 के हिंसा के बाद से बंद हैं। छात्रों का आंदोलन अब 17वें दिन पहुंच गया है। वे संविधान लागू करने और चुनाव की तारीख तय करने पर अड़े हुए हैं। प्रशासन ने तोड़फोड़ का आरोप लगाया है जबकि शिक्षा मंत्री ने गुंडागर्दी पर सख्त चेतावनी दी है।

7 सदस्यीय कमेटी बनने से संवाद का रास्ता खुला है। लेकिन पक्की तारीख की मांग अभी भी बनी हुई है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कमेटी कितनी जल्दी और प्रभावी समाधान निकाल पाती है। कैंपस में शांति बनाए रखना और छात्रों की लोकतांत्रिक मांग को संतुलित करना दोनों पक्षों के लिए चुनौती बना हुआ है।

कुल मिलाकर जामिया का यह आंदोलन अब सिर्फ चुनाव बहाली की मांग तक सीमित नहीं रहा। इसमें हिंसा के आरोप, प्रशासनिक आश्वासन और मंत्री की चेतावनी जुड़ गई है। कमेटी के गठन से उम्मीद जगी है लेकिन दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाल करना अभी बाकी है। आगे के दिनों में स्थिति साफ हो सकती है कि चुनाव की पक्की तारीख मिलती है या हंगामा जारी रहता है।

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