Vande Mataram Bill: वंदे मातरम बिल राज्यसभा में पेश, राष्ट्रगीत के अपमान या गायन में बाधा डालने पर 3 साल तक की सजा का प्रस्ताव

राष्ट्रगीत के अपमान और गायन में बाधा डालने पर 3 साल तक की जेल का प्रस्तावित प्रावधान

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Vande Mataram Bill: भारतीय संसद के बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र के शुभारंभ के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा के पटल पर एक ऐतिहासिक और विधिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक—‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक’ (Prevention of Insults to National Honour Amendment Bill) पेश करने जा रहे हैं, जिसे व्यापक रूप से ‘वंदे मातरम बिल’ कहा जा रहा है। इस प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के समान ही पूर्ण कानूनी व संवैधानिक सुरक्षा कवच प्रदान करना है। प्रस्तावित कानून के विनिर्देशों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा उत्पन्न करता है, इसका सार्वजनिक रूप से अनादर करता है या इसका अपमान करता पाया जाता है, तो उसे अधिकतम 3 साल की सजा, भारी जुर्माना या दोनों की कानूनी सजा दी जा सकती है। सरकार यह ऐतिहासिक विधेयक वंदे मातरम की रचना के 150वें गौरवशाली वर्ष के उपलक्ष्य में सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रही है।

विधेयक के मुख्य कानूनी प्रावधान, 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन और सजा का दायरा

विधिक विनिर्देशों के अनुसार, वर्तमान में लागू ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) के तहत केवल भारत के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे), भारत के संविधान और राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के अपमान या गायन में बाधा डालने पर ही दंड का विधिक प्रावधान था, जबकि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को इस वैधानिक सुरक्षा से बाहर रखा गया था। नया संशोधन विधेयक इस ऐतिहासिक विसंगति को पूरी तरह समाप्त करते हुए वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान संवैधानिक दर्जा और सुरक्षा प्रदान करता है। नए नियमों के तहत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के दौरान जानबूझकर शोर मचाना, खड़े होने से इनकार करना, असम्मानजनक मुद्रा अपनाना या इसके पाठ को विकृत करना एक गैर-जमानती और दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा, जिसके लिए वही सजा निर्धारित की गई है जो राष्ट्रगान के अपमान पर लागू होती है।

वंदे मातरम गायन के प्रस्तावित प्रोटोकॉल, 3 मिनट 10 सेकंड की अवधि और 6 अंतरों का नियम

संसदीय ड्राफ्ट और गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के औपचारिक गायन और वादन को लेकर कुछ अत्यंत कड़े और स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किए गए हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, भारत सरकार के सभी आधिकारिक व प्रशासनिक कार्यक्रमों की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ का बजाया और गाया जाना अनिवार्य किया जाएगा। इसके अलावा, देश भर के सभी प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षण संस्थानों में दैनिक सुबह की सभा (Prayer) में इसे गाना mandatory होगा। औपचारिक कार्यक्रमों के दौरान इसके सभी छह अंतरों (Six Stanzas) का पूर्ण पाठ किया जाएगा, जिसके गायन की कुल मानक समय-सीमा 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है; इस दौरान राष्ट्रगान की ही भांति प्रत्येक नागरिक को सावधान मुद्रा (Attention Position) में खड़े होकर पूर्ण सम्मान प्रकट करना अनिवार्य होगा।

वंदे मातरम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना और 1896 का पहला गायन

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय चेतना के अभ्युदय से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। इस महान कालजयी गीत की रचना महान साहित्यकार और उपन्यासकार बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को मूल रूप से संस्कृत और बांग्ला भाषा के अत्यंत सुंदर मिश्रण से की थी, जिसे बाद में उनके सुप्रसिद्ध राजनीतिक उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया था। इस गीत को पहली बार वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्वरबद्ध कर गाया गया था। अंग्रेजी हुकूमत के दमन चक्र के खिलाफ ब्रिटिश काल में ‘वंदे मातरम’ का नारा पूरे देश के स्वतंत्रता सेनानियों और भारत माता के सपूतों के लिए राष्ट्रभक्ति, क्रांति और अटूट वंदन का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया था।

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 अंतरों का प्रामाणिक व मूल रूप

बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस कालजयी राष्ट्रगीत के छह अंतरों का मूल और प्रामाणिक स्वरूप इस प्रकार है:

वंदे मातरम! सुजलाम सुफलाम मलयजशीतलाम शस्य श्यामलाम मातरम्।

शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम् फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम् सुखदाम वरदाम मातरम्।

कोटि-कोटि कंठ कल-कल निनाद कराले कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले अबला केन मा एत बले बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीम् मातरम्।

तुमि विद्या तुमि धर्म तुमि हृदि तुमि मर्म त्वं हि प्राणाः शरीरे बाहु ते तुमि मां शक्ति हृदये तुमि मां भक्ति तोमाराई प्रतिमा गढ़ी मंदिरे-मंदिरे।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणीम् कमला कमलदल विहारिणी वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम् नमामि कमलाम् अमलाम अतुलाम सुजलाम सुफलाम मातरम्।

श्यामलाम सरलाम सुस्मिताम भूषिताम धरणीम् भरणीम् मातरम्।

संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक घमासान, विपक्ष के तेवर और फ्लोर मैनेजमेंट

संसद के मानसून सत्र में इस बिल के पेश होते ही राजनीतिक तापमान अत्यधिक बढ़ गया है। जहाँ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दल इसे राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक सम्मान, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक विरासत को पुनस्र्थापित करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बता रहे हैं, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और ‘INDIA’ गठबंधन के घटक दल इसके कानूनी प्रावधानों की आक्रामकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रभक्ति दिल से आती है और इसके लिए तीन साल की जेल जैसे दंडात्मक प्रावधानों का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है। संसद में अन्य ज्वलंत मुद्दों जैसे प्रतियोगी परीक्षा सुधारों, क्षेत्रीय परिसीमन और लद्दाख आंदोलन के साथ-साथ यह बिल पूरे सत्र के दौरान गरमा-गरम बहस का मुख्य केंद्र बने रहने की संभावना है।

निष्कर्ष: ‘वंदे मातरम बिल’ का राज्यसभा (Vande Mataram Bill) में पेश होना भारत के संवैधानिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया मोड़ है। राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा प्रदान करने का यह कदम जहाँ एक ओर देशवासियों के भीतर राष्ट्रभक्ति और सम्मान की भावना को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन और संसदीय बहसों के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का परीक्षण भी करेगा। यदि आप भी इस विधेयक के विधिक ड्राफ्ट, गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक गजट अधिसूचनाओं, संसद के दोनों सदनों की लाइव कार्यवाही के बुलेटिनों और संविधान विशेषज्ञों के प्रमाणित कानूनी विश्लेषणों की प्रामाणिक डिजिटल जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के आधिकारिक वेब पोर्टल अथवा संसद टीवी (Sansad TV) के प्रमाणित डिजिटल सूचना पटल पर जाकर लाइव अपडेट्स अवश्य चेक कर लें।

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