Sonal Mansingh: पद्म विभूषण सोनल मानसिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से की अपील, शास्त्रीय नृत्य के दिग्गज कलाकारों को भी मिले भारत रत्न सम्मान
PM मोदी को लिखा पत्र, शास्त्रीय नृत्य के दिग्गजों को भारत रत्न देने की उठाई मांग
Sonal Mansingh: भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत की विख्यात नृत्यांगना, पूर्व राज्यसभा सांसद और पद्म विभूषण व पद्म भूषण से सम्मानित सोनल मानसिंह ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ (Bharat Ratna) को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सांस्कृतिक बहस छिड़ दी है। सोनल मानसिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर देश की महान नृत्य हस्तियों को भी ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में दुख जताते हुए कहा कि जहां संगीत (गायन व वादन) के क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को समय-समय पर भारत रत्न देकर सम्मानित किया गया है, वहीं शास्त्रीय नृत्य कला को समृद्ध करने वाले अमर नर्तकों और नृत्यांगनाओं को हमेशा इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वंचित रखा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस ऐतिहासिक असंतुलन को दूर करने का आग्रह किया है।
सोनल मानसिंह का पत्र, संगीत और नृत्य के बीच सम्मान के अंतर पर उठाया सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में सोनल मानसिंह ने उल्लेख किया कि भारत सरकार ने संगीत जगत की अमर हस्तियों—जैसे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित रविशंकर, पंडित भीमसेन जोशी, लता मंगेशकर और एमएस सुब्बुलक्ष्मी—को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया है, जो अत्यंत गौरव की बात है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जिस प्रकार गायन और वादन भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, उसी प्रकार ‘नृत्य’ भी भारतीय कला की संपूर्ण अभिव्यक्ति (नाट्यशास्त्र) का मूल आधार है। इसके बावजूद दशकों से देश की शास्त्रीय नृत्य शैलियों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाले महान डांसरों को भारत रत्न की सूची में स्थान नहीं मिला, जो नृत्य समुदाय के साथ एक प्रकार का परोक्ष अन्याय है।
चार महान नृत्य दिग्गजों का नाम प्रस्तावित, तंजौर बालासरस्वती से लेकर पंडित बिरजू महाराज तक
अपनी अपील में सोनल मानसिंह ने चार ऐसे अमर शास्त्रीय नृत्य साधकों के नामों का विशेष रूप से उल्लेख किया है, जिनका भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अतुलनीय योगदान रहा है। उन्होंने भरतनाट्यम की पुनरुद्धारक रुक्मिणी देवी अरुंडेल, भरतनाट्यम की महान रानी तंजौर बालासरस्वती, ओडिसी नृत्य को नया जीवन देने वाले गुरु केलूचरण महापात्र और कथक नृत्य को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाने वाले पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज के नाम प्रधानमंत्री को सुझाए हैं। सोनल मानसिंह का मानना है कि इन दिव्य हस्तियों को मरणोपरांत भारत रत्न देना पूरे शास्त्रीय नृत्य जगत और उनकी महान परंपराओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सोनल मानसिंह की सांस्कृतिक यात्रा, बहुमुखी कला और राजनीतिक योगदान
सोनल मानसिंह स्वयं भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सबसे सशक्त और प्रतिष्ठित आवाजों में से एक हैं। उन्होंने भरतनाट्यम, ओडिसी और मणिपुरी जैसी विभिन्न नृत्य शैलियों में महारत हासिल की है और भारतीय दर्शन व पौराणिक आख्यानों को नृत्य नाटिकाओं के माध्यम से मंच प्रदान किया है। केंद्र सरकार द्वारा कला क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ और ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, वे राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत राज्यसभा सांसद के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं, जहाँ उन्होंने देश की कला, संस्कृति और कलाकारों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को निरंतर उठाया है।
नृत्य कला का सांस्कृतिक महत्व और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत
भारतीय दर्शनशास्त्र और भरत मुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ के अनुसार, नृत्य केवल शारीरिक मुद्राओं का प्रदर्शन नहीं है बल्कि यह भाव, राग और ताल (भा-रा-त) का त्रिवेणी संगम है। सोनल मानसिंह का मानना है कि जब सरकार नृत्य कलाकारों को देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार प्रदान करेगी, तो इससे न केवल शास्त्रीय नृत्य को सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर उच्च दर्जा प्राप्त होगा, बल्कि यह आधुनिक युवा पीढ़ी को भी अपनी पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। यह कदम भारत की सॉफ्ट-पावर (Soft Power) को भी वैश्विक स्तर पर एक नई मजबूती प्रदान करेगा।
निष्कर्ष: सोनल मानसिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई यह भावुक (Sonal Mansingh) और तर्कसंगत अपील भारत के कला जगत में एक नई सांस्कृतिक चेतना लेकर आई है। शास्त्रीय नृत्य के संवर्धन में लगे लाखों कलाकारों और गुरुओं को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और आने वाले वर्षों में नृत्य जगत के दिग्गजों को भी ‘भारत रत्न’ से विभूषित कर देश की इस महान कला परंपरा को ऐतिहासिक सम्मान प्रदान करेगी।
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