Petrol-Diesel Price 5 September 2026: देश भर में जारी हुए पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट, महानगरों में कीमतें स्थिर; जानिए दिल्ली, मुंबई, लखनऊ समेत प्रमुख शहरों में आज का भाव
दिल्ली, मुंबई, लखनऊ समेत प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज बदलाव नहीं
Petrol-Diesel Price 5 September 2026: देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने शनिवार, 5 सितंबर 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की ताजा खुदरा कीमतें जारी कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू खुदरा बाजार में आज ईंधन की दरों में कोई नया फेरबदल नहीं किया गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम अपने पूर्ववर्ती स्तरों पर पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं।
ईंधन की खुदरा दरें आम नागरिकों के दैनिक जीवन और मासिक बजट को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। आज दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल का भाव 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। पूर्वी भारत के महानगर कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि दक्षिण के प्रमुख केंद्र चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर पर ग्राहकों को उपलब्ध हो रहा है।
Petrol-Diesel Price 5 September 2026: वैट और टैक्स के कारण दरों में बड़ा अंतर
देश के चारों महानगरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में व्यापक भिन्नता देखने को मिलती है। इसका प्रमुख कारण विभिन्न राज्यों द्वारा लागू किए जाने वाले मूल्य वर्धित कर (VAT), स्थानीय निकाय उपकर और फ्रेट चार्जेस यानी ढुलाई लागत का अलग-अलग होना है। मुंबई और कोलकाता में स्थानीय करों की दरें अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण वहां दिल्ली के मुकाबले पेट्रोल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं।
दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेश होने के चलते टैक्स संरचना अन्य राज्यों से भिन्न है, जिसके कारण राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है, जो चारों महानगरों में सबसे कम है। इसके विपरीत कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर के साथ सबसे महंगा बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111 रुपये के पार होने से निजी वाहन चालकों के मासिक बजट पर लगातार दबाव बना हुआ है, हालांकि डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर मिलने से व्यावसायिक परिवहन को आंशिक राहत है। चेन्नई में डीजल की दर 99.55 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है, जो 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब बनी हुई है।
बेंगलुरु, हैदराबाद और लखनऊ में क्या हैं ईंधन की ताजा दरें?
दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक केंद्रों में भी पेट्रोल-डीजल की दरें ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आज पेट्रोल का भाव लगभग 111.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। वहीं तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में राज्य सरकार के स्थानीय करों के कारण ईंधन की दरें महानगरों को भी पीछे छोड़ती दिख रही हैं; यहां पेट्रोल 115.69 रुपये प्रति लीटर और डीजल 103.82 रुपये प्रति लीटर के भाव पर पहुंच चुका है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ईंधन के दाम दिल्ली के काफी करीब दर्ज किए गए हैं। लखनऊ में शनिवार को पेट्रोल का भाव 101.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश के भीतर भी विभिन्न जनपदों में डिपो से दूरी और ढुलाई लागत के आधार पर चंद पैसों का मामूली अंतर देखने को मिल सकता है, किंतु राज्य भर में दरें मोटे तौर पर इसी दायरे में स्थिर बनी हुई हैं।
प्रतिदिन सुबह 6 बजे तय होती हैं नई कीमतें: गतिशील मूल्य निर्धारण प्रणाली
भारत में जून 2017 से गतिशील मूल्य निर्धारण प्रणाली (Dynamic Fuel Pricing) लागू है, जिसके तहत विदेशी मुद्रा विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के 15 दिनों के औसत रोलिंग भाव के आधार पर तेल कंपनियां रोजाना सुबह ठीक 6 बजे नई दरों की घोषणा करती हैं। विदेशी बाजार में होने वाले किसी भी तकनीकी उतार-चढ़ाव को सैद्धांतिक रूप से दैनिक आधार पर समायोजित करने का प्रावधान इस व्यवस्था में निहित है।
यही कारण है कि पेट्रोल पंप पर जाने से पूर्व वाहन चालकों को अपने शहर की लाइव दरों की जांच करने की सलाह दी जाती है। उपभोक्ता इंडियन ऑयल के लिए ‘RSP <डीलर कोड>’ लिखकर 9224992249 पर, बीपीसीएल के लिए ‘RSP <डीलर कोड>’ लिखकर 9223112222 पर तथा एचपीसीएल के लिए ‘HPPRICE <डीलर कोड>’ लिखकर 9222201122 पर एसएमएस भेजकर अपने नजदीकी पेट्रोल पंप की सटीक कीमत तुरंत प्राप्त कर सकते हैं।
पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत का जटिल गणित: बेस प्राइस से पंप तक का सफर
आम उपभोक्ता जब एक लीटर पेट्रोल या डीजल खरीदता है, तो वह केवल कच्चे तेल की लागत का भुगतान नहीं करता, बल्कि उसमें कई स्तरों के कर और लाभांश जुड़े होते हैं। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयातित कच्चे तेल (Crude Oil) की रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों का मार्जिन जोड़कर बेस प्राइस तय किया जाता है। इसके पश्चात केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) जोड़ा जाता है।
इसके बाद तेल कंपनियां पेट्रोल पंप डीलरों को ईंधन की आपूर्ति करती हैं, जिसमें डीलर कमीशन जोड़ा जाता है। अंत में संबंधित राज्य सरकार अपना वैट (VAT) और स्थानीय सेस लगाती है। चूंकि विभिन्न राज्यों में वैट की दरें 15 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत से अधिक तक भिन्न हैं, यही कारण है कि दिल्ली से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित नोएडा या गुरुग्राम में ईंधन के दाम बदल जाते हैं और लखनऊ व मुंबई के बीच प्रति लीटर 9 से 10 रुपये तक का अंतर देखने को मिलता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में तेजी: वैश्विक तनाव के बीच क्यों स्थिर हैं भारतीय दरें?
वैश्विक जिंस बाजारों में पिछले कुछ दिनों से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव तथा सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित होने की आशंकाओं के चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में लगभग 6.1 प्रतिशत और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में करीब 8.3 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी दर्ज की गई है।
वैश्विक बाजार में इतनी भारी तेजी के बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू खुदरा कीमतों को जस का तस बनाए रखा है। इसका मुख्य कारण यह है कि तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को अपने रिफाइनिंग मार्जिन और पूर्व में अर्जित बफर मुनाफे से संतुलित करती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बहुत गिरती हैं, तब कंपनियां उपभोक्ताओं को तुरंत पूरी राहत न देकर अपने पिछले घाटे की भरपाई करती हैं, और इसी तरह जब वैश्विक कीमतें अचानक बढ़ती हैं, तब खुदरा कीमतों को स्थिर रखकर घरेलू अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति के झटके से बचाया जाता है।
Petrol-Diesel Price 5 September 2026: मुद्रास्फीति और आम बजट पर असर
घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की दरों में आखिरी बार व्यापक संशोधन 25 मई 2026 को देखा गया था, जब सरकारी कंपनियों ने पेट्रोल में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। उस संशोधन के बाद से तेल कंपनियों ने कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, जिसके चलते पिछले तीन महीनों से अधिक समय से खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ईंधन की दरों में स्थिरता का सीधा सकारात्मक असर देश की थोक और खुदरा महंगाई दर पर पड़ता है। डीजल की कीमतें स्थिर रहने से ट्रकों और मालवाहक वाहनों की भाड़ा लागत नियंत्रित रहती है, जिससे फल, सब्जियां, खाद्यान्न और दैनिक उपभोग की वस्तुओं (FMCG) की ढुलाई पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता। हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर बना रहता है, तो आगामी हफ्तों में तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है, जिसकी दिशा आगे चलकर घरेलू खुदरा दरों को भी प्रभावित कर सकती है।
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