UP Board 2027: 13 हजार से ज्यादा स्कूलों ने नहीं दी इन्फ्रास्ट्रक्चर की जानकारी, संकट में परीक्षा केंद्र निर्धारण

UP Board 2027: 13 हजार से ज्यादा स्कूलों ने नहीं दी जानकारी, परीक्षा केंद्र निर्धारण पर संकट

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UP Board 2027: उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी शैक्षणिक परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपीएमएसपी (UPMSP) द्वारा आयोजित की जाने वाली वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की राह में एक बड़ा प्रशासनिक रोड़ा अटक गया है। परीक्षा केंद्रों के निर्धारण के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का ब्यौरा बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तिथि बीत चुकी है, लेकिन प्रदेश के तेरह हजार से अधिक मान्यता प्राप्त विद्यालयों ने इस प्रक्रिया में गहरी रुचि नहीं दिखाई और डेटा अपलोड नहीं किया। समय-सीमा समाप्त होने के बाद अब शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस लापरवाही का सीधा असर आने वाले सत्र की परीक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।

UP Board 2027: पोर्टल पर केवल इतने विद्यालयों का विवरण हुआ दर्ज

बोर्ड प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि हर विद्यालय को अपने यहाँ उपलब्ध भौतिक संसाधनों की सही जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया के लिए निर्धारित की गई आखिरी तारीख 20 जुलाई थी। जब इस समय-सीमा के समाप्त होने के बाद पोर्टल के आंकड़ों की समीक्षा की गई, तो तस्वीर बेहद निराशाजनक सामने आई।

तय अवधि बीत जाने के बाद भी प्रदेशभर से केवल 15,291 विद्यालयों ने ही अपना डेटा पोर्टल पर सफलतापर्वूक दर्ज कराया है। इसका सीधा मतलब यह है कि तेरह हजार से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने इस अनिवार्य प्रक्रिया को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यालयों द्वारा डेटा अपलोड न किए जाने के कारण अब 2027 की परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्रों के गठन की पूरी योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

सचिव की समीक्षा बैठक में खुला था लापरवाही का राज

इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने जब इसकी समीक्षा की थी, तब स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक थी। पांच दिन पहले हुई उस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि कुल 28,834 मान्यता प्राप्त विद्यालयों में से करीब 25,000 संस्थानों ने अपनी सूचनाएं पोर्टल पर साझा ही नहीं की थीं।

उस वक्त इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए बोर्ड सचिव ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों यानी डीआईओएस (DIOS) को सख्त हिदायत दी थी कि वे अपने-अपने जिलों के स्कूलों से तुरंत संपर्क साधकर युद्ध स्तर पर डेटा अपलोड करवाना सुनिश्चित करें। हालांकि, अधिकारियों की तमाम कोशिशों और तारीख बढ़ाए जाने के बावजूद तेरह हजार से अधिक विद्यालय अंतिम समय तक खामोश रहे।

UP Board 2027: भौतिक संसाधनों का ब्यौरा देना था पूरी तरह अनिवार्य

बोर्ड के नियमों के मुताबिक, परीक्षा केंद्रों की पात्रता तय करने के लिए स्कूलों को कई तरह के बुनियादी मानकों को पूरा करना होता है और उनका डिजिटल प्रमाण देना होता है। विद्यालयों को अपने परिसरों में मौजूद कमरों की कुल संख्या, विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था, पीने के साफ पानी के इंतजाम, मजबूत बाउंड्री वॉल, सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता और अन्य सभी अवस्थापना सुविधाओं का पूरा चिट्ठा बोर्ड की वेबसाइट पर डालना था।

इस प्रक्रिया की शुरुआत 1 जुलाई को बोर्ड सचिव द्वारा जारी निर्देशों के साथ हुई थी। शुरुआती पखवाड़े यानी 15 जुलाई तक की समीक्षा में केवल 3,236 विद्यालयों ने ही डेटा अपलोड किया था, जिसे देखते हुए बोर्ड ने अंतिम तिथि बढ़ाकर 20 जुलाई तय की थी, ताकि सभी को पर्याप्त मौका मिल सके।

UP Board 2027: लापरवाह प्रधानाचार्यों और विद्यालयों पर गिरेगी गाज

निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी सूचनाएं ऑनलाइन साझा न करने वाले शिक्षण संस्थानों के खिलाफ अब शिक्षा विभाग कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। 20 जुलाई की देर रात तक पोर्टल खुला रहने के कारण आंकड़ों में मामूली बदलाव की संभावना जरूर जताई जा रही है, लेकिन तय नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।

बोर्ड प्रशासन की तरफ से ऐसे सभी दोषी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसमें उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि आखिर क्यों समय रहते निर्देशों का पालन नहीं किया गया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन स्कूलों की मान्यता या आगामी परीक्षाओं से जुड़ी गतिविधियों पर गंभीर प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद से स्कूल प्रबंधनों में हड़कंप का माहौल है।

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