Unified Pension Scheme: यूनिफाइड पेंशन स्कीम में सिर्फ 4 प्रतिशत एनपीएस सब्सक्राइबर शामिल, गारंटीड लाभ के बावजूद कम रुचि
गारंटीड पेंशन के बावजूद यूपीएस को मिली सीमित प्रतिक्रिया, सरकार ने बताई वजह
Unified Pension Scheme: केंद्र सरकार की यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को केंद्रीय कर्मचारियों से बेहद सीमित प्रतिक्रिया मिली है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जानकारी दी कि 19 जुलाई 2026 तक केवल 1 लाख 18 हजार 195 कर्मचारियों और पात्र रिटायर्ड लोगों ने ही इस योजना को चुना है। यह संख्या जून के अंत तक नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के लगभग 27.6 लाख केंद्रीय सरकारी सब्सक्राइबरों का महज 4.3 प्रतिशत है। यूपीएस में गारंटीड 50 प्रतिशत पेंशन, रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी जैसे महत्वपूर्ण लाभ शामिल होने के बावजूद कर्मचारियों का रुझान काफी कम रहा है। सरकार द्वारा योजना चुनने की समय सीमा बढ़ाए जाने के बाद भी इसे अपनाने की दर धीमी बनी रही। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यूपीएस में किसी भी प्रकार के बदलाव या इसे बदलने का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
यूपीएस के मुख्य प्रावधान और वित्तीय संरचना
यूनिफाइड पेंशन स्कीम अप्रैल 2025 से लागू हुई थी और इसे नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत एक सुरक्षित विकल्प के रूप में पेश किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद सुनिश्चित मासिक भुगतान देना है। 25 साल की योग्य सेवा पूरी करने पर कर्मचारी को अंतिम 12 महीनों के औसत बेसिक पे का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता है, जबकि कम सेवा अवधि पर आनुपातिक भुगतान का प्रावधान है। कम से कम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर 10 हजार रुपये का गारंटीड न्यूनतम मासिक भुगतान दिया जाता है। इस योजना में कर्मचारी बेसिक पे और महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत योगदान करते हैं, और सरकार भी समान 10 प्रतिशत का योगदान देती है। इसके अलावा, सरकार पेंशन को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए पूल कॉर्पस में अनुमानित 8.5 प्रतिशत का अतिरिक्त योगदान करती है।
Unified Pension Scheme: संसद में वित्त मंत्री का वक्तव्य
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से बताया कि 19 जुलाई 2026 तक कुल 1,18,195 सब्सक्राइबर यूपीएस से जुड़ चुके हैं। इनमें नए भर्ती हुए कर्मचारी, मौजूदा सेवारत कर्मचारी और 31 मार्च 2025 तक रिटायर हुए वे पात्र लोग शामिल हैं जिनके पास 10 साल से अधिक की नियमित सेवा का रिकॉर्ड था। सरकार ने यूपीएस चुनने वाले कर्मचारियों को एक बार पुनः एनपीएस में वापस जाने की ‘वन-वे स्विच’ सुविधा भी प्रदान की है। वित्त मंत्री ने कहा कि चूंकि योजना हाल ही में लागू हुई है, इसलिए इसकी व्यापक समीक्षा अभी नहीं की गई है और इसमें किसी बदलाव का कोई विचार नहीं है।
कम रुचि के कारण और समय सीमा का विस्तार
कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों के अनुरोध पर यूपीएस (Unified Pension Scheme) चुनने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 नवंबर 2025 किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अपनाने की दर में कोई खास बढ़ोतरी नहीं देखी गई। विशेषज्ञ इसके पीछे जागरूकता की कमी और विशेष रूप से पैरा मिलिट्री तथा रेलवे कर्मचारियों में मौजूद हिचकिचाहट को मुख्य कारण मानते हैं। ये दोनों वर्ग एनपीएस सब्सक्राइबरों का एक बड़ा हिस्सा हैं। उल्लेखनीय है कि पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) में अंतिम सैलरी का 50 प्रतिशत बिना किसी योगदान के पेंशन के रूप में मिलता था, जिसे 2004 में बंद कर बाजार आधारित एनपीएस लागू किया गया था। कई राज्यों और संगठनों की मांग के बाद केंद्र ने यूपीएस का यह बीच का रास्ता निकाला था।
एनपीएस और यूपीएस का तुलनात्मक अंतर
एनपीएस में संपूर्ण कॉर्पस बाजार के जोखिमों से जुड़ा होता है और इसमें पेंशन की कोई न्यूनतम राशि सुनिश्चित नहीं होती, जबकि यूपीएस में सरकार सुनिश्चित भुगतान का वादा करती है। यूपीएस में सरकार का कुल योगदान अधिक रहता है क्योंकि अतिरिक्त राशि पूल कॉर्पस में जमा की जाती है। यूपीएस चुनने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय 60 प्रतिशत तक कॉर्पस निकालने की सुविधा भी मिलती है और बाकी राशि से एन्युटी खरीदनी होती है। सुनिश्चित लाभों के बावजूद कम संख्या में कर्मचारियों का इसमें शामिल होना दर्शाता है कि कई लोग अभी भी या तो बाजार के उच्च रिटर्न पर भरोसा कर रहे हैं या पुरानी पेंशन योजना की पूर्ण बहाली की मांग पर कायम हैं।
Unified Pension Scheme: सरकार का रुख और भविष्य की संभावनाएँ
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि पुरानी पेंशन स्कीम (Unified Pension Scheme) को बहाल करने या यूपीएस को हटाने का कोई विचार नहीं है। सरकार का मानना है कि यूपीएस एक वित्तीय रूप से जिम्मेदार और संतुलन बनाने वाली योजना है। 25 हजार से अधिक रिटायर्ड कर्मचारियों को यूपीएस के तहत अतिरिक्त लाभ मिलने का हक बन चुका है। यद्यपि कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन की मांग को लेकर अड़े हैं, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि जैसे-जैसे योजना की बारीकियों और सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, समय के साथ और अधिक कर्मचारी यूपीएस को अपनाने के लिए आगे आएंगे।
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