Abhijeet Deepke: दिल्ली पुलिस में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ शिकायत, फैजान अंसारी ने लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली पुलिस से गिरफ्तारी की मांग, हमले और पेड प्रदर्शन के आरोपों की जांच की मांग

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Abhijeet Deepke: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक गहमगहमी के बीच सोशल मीडिया और युवा आंदोलनों से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। प्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में अंसारी ने आरोप लगाया है कि दीपके और उनके समर्थकों द्वारा उन पर महाराष्ट्र के पुणे और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में जानलेवा हमले करवाए गए।

अंसारी ने दिल्ली पुलिस से मामले की गंभीरता को देखते हुए अभिजीत दीपके की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। यह मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच आपसी रंजिश का नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शुरू हुए आंदोलनों और उनके पीछे की राजनीतिक चालबाजियों के बीच बढ़ते टकराव को भी उजागर करता है।

शिकायत में क्या हैं मुख्य आरोप?

फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय में प्रस्तुत अपनी शिकायत में घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा दिया है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में उनके ऊपर दो अलग-अलग मौकों पर हमले किए गए थे। पहला हमला पुणे विश्वविद्यालय के समीप हुआ, जहाँ सीजेपी द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान अंसारी और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। वहीं दूसरा मामला औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) का है, जहाँ उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की गई।

अंसारी का कहना है कि इन दोनों मामलों में महाराष्ट्र पुलिस के पास पहले से ही एफआईआर (FIR) और शिकायतें दर्ज हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास हमलों के प्रत्यक्ष वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे दिल्ली पुलिस की जांच टीम को सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

शिकायत पत्र में केवल हमलों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि अंसारी ने सीजेपी द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किए गए युवा विरोध प्रदर्शनों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं। अंसारी का आरोप है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन पूरी तरह से ‘स्पॉन्सर’ या ‘पेड’ थे। उनका दावा है कि दीपके ने प्रदर्शनों में भीड़ जुटाने और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए दिहाड़ी पर लोगों को बुलाया था तथा कई सोशल मीडिया सेलिब्रिटीज को पैसे देकर प्रमोट करने के लिए राजी किया था। अंसारी ने यह भी आरोप लगाया कि इस आंदोलन का इस्तेमाल निजी आर्थिक लाभ और कुछ खास राजनीतिक एजेंडे को हवा देने के लिए किया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत में अंसारी ने स्थानीय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि हाल ही में सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने से दिल्ली का माहौल बिगड़ने से बच गया। उन्होंने अंदेशा जताया कि दीपके जैसे लोग राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति को चुनौती दे सकते हैं, इसलिए उन पर सख्त और त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए।

अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का इतिहास

इस पूरे विवाद को समझने के लिए अभिजीत दीपके और उनके संगठन कॉकरोच जनता पार्टी की पृष्ठभूमि को जानना जरूरी है। मूल रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के निवासी अभिजीत दीपके एक पेशेवर राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं। उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में मास्टर डिग्री हासिल की है। इससे पहले वे आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशन टीम से भी जुड़े रहे हैं।

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद दीपके राष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे। दरअसल, एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कुछ फर्जी डिग्रियों वाले, बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स की गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए ‘कॉकरोच’ शब्द का सांकेतिक इस्तेमाल किया था। हालांकि बाद में अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह टिप्पणी केवल फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के संदर्भ में थी, लेकिन दीपके ने इसे एक राजनीतिक और सामाजिक अवसर के रूप में भुनाया।

दीपके ने सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के विरोध में व्यंग्यात्मक (सटायरिकल) रूप से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के गठन का ऐलान कर दिया। उन्होंने देश में बढ़ती बेरोजगारी, लगातार होते परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में खामियों और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को उठाकर सोशल मीडिया पर एक अभियान छेड़ दिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब पर हजारों युवा इस मुहिम से जुड़ गए।

जून 2026 में सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल छात्र प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई। हालांकि सीजेपी आधिकारिक तौर पर भारतीय चुनाव आयोग में पंजीकृत कोई राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन यह खुद को युवाओं का एक असंपादित और स्वतंत्र डिजिटल आंदोलन बताती है। दीपके का तर्क रहा है कि उनका संगठन किसी पारंपरिक राजनीतिक दल से फंड नहीं लेता और युवाओं के अधिकारों के लिए पूरी तरह समर्पित है।

Abhijeet Deepke: फैजान अंसारी का रुख और महाराष्ट्र के पुराने विवाद

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता फैजान अंसारी मुंबई से ताल्लुक रखने वाले एक चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्टिविस्ट हैं। वे इंस्टाग्राम पर अपने बयानों, जनहित याचिकाएं दायर करने और विभिन्न मुद्दों पर पुलिस में शिकायतें दर्ज कराने के लिए पहचाने जाते हैं।

अंसारी और दीपके के बीच विवाद कोई नया नहीं है। जून 2026 में भी फैजान अंसारी ने छत्रपति संभाजीनगर के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर दीपके के खिलाफ लिखित शिकायत सौंपी थी। उस दौरान अंसारी ने आरोप लगाया था कि दीपके अपने भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए युवाओं को भड़का रहे हैं तथा संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पुणे में हुए एक घटनाक्रम के दौरान भी दोनों पक्षों के समर्थक आपस में भिड़ गए थे। अंसारी का कहना है कि वे लगातार दीपके के ‘फर्जी आंदोलन’ का पर्दाफाश कर रहे हैं, इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उन पर हमले कराए जा रहे हैं। दिल्ली डीसीपी दफ्तर के बाहर मीडिया से बात करते हुए अंसारी ने कहा कि वे अब इस लड़ाई को अंजाम तक ले जाएंगे और अदालत के दरवाजे भी खटखटाएंगे।

सोशल मीडिया बनाम जमीनी आंदोलन: बढ़ता गतिरोध

यह मामला भारत में सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों और उनके बीच बनने वाले आपसी गुटों के बीच बढ़ते तनाव को भी सामने लाता है। आज के समय में जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए रातों-रात बड़े जनआंदोलन खड़े किए जा रहे हैं, वहीं इन आंदोलनों की पारदर्शिता, फंडिंग और निष्पक्षता पर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

सीजेपी समर्थक अंसारी के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते आ रहे हैं। उनका मानना है कि अंसारी किसी विरोधी राजनीतिक दल के इशारे पर युवाओं के इस वास्तविक आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। सीजेपी का कहना है कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और युवाओं की वास्तविक मांगों पर आधारित था।

हालांकि, दूसरी तरफ फैजान अंसारी का दावा है कि जब तक पुलिस गहनता से वित्तीय लेनदेन और व्हाट्सएप ग्रुप्स की जांच नहीं करेगी, तब तक इस आंदोलन के पीछे छिपे असली चेहरों का पता नहीं चल पाएगा।

दिल्ली पुलिस की संभावित कार्रवाई और आगे का रास्ता

फैजान अंसारी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद अब गेंद दिल्ली पुलिस के पाले में है। हालांकि दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या प्राथमिक रिपोर्ट (FIR) दर्ज होने की पुष्टि नहीं की गई है।

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, दिल्ली पुलिस पहले अंसारी द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों की जांच करेगी। चूंकि कथित हमलों की घटनाएं महाराष्ट्र (पुणे और औरंगाबाद) के क्षेत्राधिकार में आती हैं, इसलिए दिल्ली पुलिस महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क साधकर वहां दर्ज मामलों की स्थिति और केस डायरी की जानकारी मांग सकती है।

यदि जांच में यह पाया जाता है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में किसी प्रकार का वित्तीय हेरफेर या उकसावा हुआ था, तो दिल्ली पुलिस इस संबंध में अलग से मामला दर्ज कर सकती है। इसके अतिरिक्त, अगर जरूरत पड़ी तो अभिजीत दीपके को पूछताछ के लिए समन भी भेजा जा सकता है।

निष्कर्ष

अभिजीत दीपके के खिलाफ फैजान अंसारी (Abhijeet Deepke) की इस शिकायत ने एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी और उससे जुड़े विवादों को सुर्खियों में ला दिया है। एक तरफ जहां बेरोजगारी और शिक्षा सुधार जैसे गंभीर मुद्दों पर लड़ाई लड़ने का दावा करने वाला संगठन है, तो दूसरी तरफ उस पर हिंसा, फर्जीवाड़े और पेड-आंदोलन चलाने जैसे संगीन आरोप लग रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप से वास्तविक छात्र आंदोलनों की विश्वसनीयता को झटका लगता है। अब सभी की निगाहें दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच पर टिकी हैं कि क्या इस शिकायत के आधार पर कोई एफआईआर दर्ज होती है या यह मामला महज़ दो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच की रंजिश बनकर रह जाता है। निष्पक्ष पुलिस जांच के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम का सच जनता के सामने आ सकेगा।

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