Strait of Hormuz: अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर दागी मिसाइलें, तेहरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर किया पलटवार

लारक द्वीप पर अमेरिकी स्ट्राइक के बाद ईरान का पलटवार, जॉर्डन स्थित ठिकाने निशाने पर

0
Strait of Hormuz: मध्य पूर्व में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे संवेदनशील धमनी माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष एक बार फिर भड़क उठा है। लगभग एक महीने के विराम के बाद अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप (Larak Island) पर हवाई हमला कर दो सैन्य रॉकेट लॉन्चरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में समुद्री खदानें (Sea Mines) तैनात करने वाले रॉकेट दागने की तैयारी कर रहे थे।
29 जुलाई के बाद ईरानी भूभाग पर यह अमेरिका का पहला प्रत्यक्ष सैन्य हमला है। इस हमले के जवाब में ईरान ने तुरंत सख्त रुख अपनाते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से पलटवार किया है, जिससे समूचे खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा गहरा गया है।

लारक द्वीप पर अमेरिकी स्ट्राइक: समुद्री खदानें बिछाने की तैयारी बनी वजह

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि खुफिया निगरानी के दौरान आईआरजीसी बलों को लारक द्वीप से ऐसे रॉकेट्स को लोड करते हुए देखा गया था जो समुद्र में खदानें बिछाने में सक्षम हैं। पेंटागन के अनुसार, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खुला रखने के लिए इन दोनों लॉन्चरों पर त्वरित सटीक हमला किया गया।
लारक द्वीप रणनीतिक रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर बंदर अब्बास और केशम द्वीप के निकट स्थित है, जहां से पूरे समुद्री ट्रैफिक पर सीधी नजर रखी जा सकती है। अमेरिकी नौसेना ने पिछले सप्ताह ही इस मार्ग से दर्जनों समुद्री खदानों को हटाने का व्यापक अभियान पूरा किया था, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि नई खदानें बिछाने वाले किसी भी ईरानी प्लेटफॉर्म या पोत को तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।

ईरान का दावा: सैन्य कर्मियों सहित नागरिक हताहत, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला

ईरानी सरकारी मीडिया और आईआरजीसी के बयानों के अनुसार, लारक द्वीप पर किए गए अमेरिकी ड्रोन हमले में कई सैन्य कर्मियों और नागरिकों की मौत हुई है तथा अन्य घायल हुए हैं। आईआरजीसी के प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने इस हमले को ट्रंप प्रशासन की ‘रणनीतिक और घातक भूल’ करार दिया और चेतावनी दी कि वाशिंगटन को इसकी भारी सैन्य और आर्थिक कीमत चुकानी होगी।
इस चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई को अंजाम दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों—किंग हुसैन एयरबेस और अल-अजरक बेस—को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन के रक्षा सूत्रों ने अपने हवाई क्षेत्र में कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है, जबकि खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है।

सख्त आर्थिक रणनीति के बीच सैन्य टकराव की वापसी

यह ताजा सैन्य टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन ने प्रत्यक्ष सैन्य हमलों को सीमित करते हुए ईरान के खिलाफ कड़े वित्तीय और आर्थिक प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की नीति अपनाई थी। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हाल ही में उन अंतरराष्ट्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की थी जो तेहरान के साथ व्यापारिक लेन-देन जारी रखे हुए हैं।
अमेरिकी सेना में गोला-बारूद के घटते भंडार और खाड़ी सहयोगियों (कतर, सऊदी अरब और यूएई) द्वारा संयम बरतने की अपीलों के बाद 1 अगस्त को प्रत्यक्ष बमबारी रोक दी गई थी। हालांकि, लारक द्वीप पर हुई इस नई कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि जलमार्ग की सुरक्षा के मामले में अमेरिकी सेना किसी भी ईरानी गतिविधि को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।

Strait of Hormuz: होर्मुज में अवरोध और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जिसके जरिए सामान्य दिनों में वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। पिछले छह महीनों से जारी इस संघर्ष के चलते इस मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन पहले ही सामान्य स्तर से काफी नीचे आ चुका है। युद्ध से पूर्व रोजाना लगभग 130 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, जो अब घटकर महज 20 से 25 जहाजों तक सीमित रह गए हैं।
लारक द्वीप पर ताजा हमले और ईरान के जवाबी मिसाइल प्रहार के बाद अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में घबराहट फैल गई है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है और ब्रेंट क्रूड के भाव प्रति बैरल 90 डॉलर के पार पहुंच गए हैं। ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह तनाव आगे बढ़ता है और वाणिज्यिक टैंकरों पर हमले शुरू होते हैं, तो बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि और तेल आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

Strait of Hormuz: आगे की राह और कूटनीतिक चुनौतियां

दोनों पक्षों के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह ठप होने के बाद अब क्षेत्रीय कूटनीति के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एक ओर जहां अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को और सख्त कर रखा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने साफ कर दिया है कि वह जलडमरूमध्य पर अपने संप्रभु अधिकारों और सुरक्षा नियंत्रण से किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा।
आने वाले दिन इस बात पर निर्भर करेंगे कि जॉर्डन में हुए मिसाइल हमलों के बाद अमेरिका किस स्तर की जवाबी कार्रवाई चुनता है। क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से तत्काल संयम बरतने की अपील की है ताकि यह टकराव किसी व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में न बदल जाए।

Read more here

Petrol Diesel Price 31 August 2026: दिल्ली, मुंबई से लेकर हैदराबाद तक जानिए प्रमुख शहरों के ताजा रेट

Aaj Ka Mausam 31 August 2026: बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से 19 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट, जानिए दिल्ली-NCR से लेकर यूपी-बिहार तक का हाल

Hartalika Teej 2026: 13 या 14 सितंबर? गणेश चतुर्थी संग संयोग और व्रत का महत्व

Aaj Ka Rashifal 31 August 2026: सावन के बाद भाद्रपद की शुरुआत में चमकेगा इन राशियों का भाग्य, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक भविष्यफल

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.