Chitrakoot Flood: रामघाट की 400 दुकानें जलमग्न, सड़कों पर चलीं नावें; 23 साल का टूटा रिकॉर्ड, सेना के हेलीकॉप्टर से राहत अभियान
रामघाट की 400 दुकानें डूबीं, सड़कों पर नावें चलीं; 23 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
Chitrakoot Flood: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में मूसलाधार बारिश के चलते जीवनदायिनी मंदाकिनी नदी ने विकराल और प्रलयंकारी रूप धारण कर लिया है। जलग्रहण क्षेत्रों में 10 से 12 सेंटीमीटर से अधिक की निरंतर भारी वर्षा के कारण मंदाकिनी का जलस्तर महज आठ घंटे के भीतर खतरे के निशान को पार करते हुए रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इस जलप्रलय ने पवित्र तीर्थस्थल रामघाट समेत आसपास के दर्जनों रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया है।
बाढ़ की प्रचंडता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रामघाट की लगभग 400 दुकानें पानी में समा गई हैं और मुख्य बाजार व सड़कों पर मोटर बोट व नावें चलानी पड़ रही हैं। स्थानीय जानकारों और बुजुर्गों के अनुसार, मंदाकिनी का यह रौद्र रूप वर्ष 2003 के ऐतिहासिक सैलाब की याद दिलाता है और कई स्थानों पर जलस्तर ने 23 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
Chitrakoot Flood: रामघाट से जानकीकुंड तक जलप्रलय, दो मंजिला मकानों की छतों पर पहुंचे लोग
मंदाकिनी नदी का उफान इतनी तेजी से बढ़ा कि निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों और घाट किनारे व्यापार करने वाले दुकानदारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। रामघाट, भरत घाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, खटकाना मोहल्ला, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड क्षेत्र पूरी तरह पानी में घिर चुके हैं। कई प्रमुख आश्रमों, प्राचीन मंदिरों और मठों के गर्भगृह तक पानी भर जाने से नित्य पूजा-अर्चना का क्रम प्रभावित हुआ है।
जलस्तर बढ़ने से एक मंजिला मकान और दुकानें पूरी तरह डूब गईं, जबकि कई दो मंजिला मकानों की छतों तक पानी की लहरें टकराती नजर आईं। जान बचाने के लिए सैकड़ों लोगों ने अपने घरों की छतों पर शरण ली। सती अनसूया और गुप्त गोदावरी जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों के संपर्क मार्गों पर भी पानी भर गया है। रामघाट के समीप बने एक मुख्य पुल के ऊपर से पानी बहने लगा और उसकी सुरक्षा रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे प्रशासन ने एहतियातन आवागमन पूरी तरह रोक दिया।
व्यापारियों का करोड़ों का नुकसान: राशन, कपड़े और फर्नीचर पानी में बहे
चित्रकूट का रामघाट वह केंद्र है जहां साल के बारह महीने लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। घाट पर स्थित पूजा सामग्री, धार्मिक पुस्तकें, वस्त्र, पीतल के बर्तन, काष्ठ कला और खानपान की लगभग 400 दुकानें जलमग्न हो गईं। दुकानदारों का कहना है कि रात के अंधेरे में पानी इतनी तेजी से घुसा कि वे दुकानों से कीमती सामान और नकदी तक नहीं निकाल सके।
लाखों रुपये का किराना राशन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्नीचर पानी व कीचड़ की भेंट चढ़ गए। स्थानीय व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान पहुंचा है। पानी के साथ भारी मात्रा में आई गाद और सिल्ट ने दुकानों व घरों के अंदर तबाही के निशान छोड़ दिए हैं, जिन्हें सामान्य होने में हफ्तों का समय लगेगा।
यूपी-एमपी का संपर्क टूटा, पटरियों पर पानी भरने से ट्रेनें थमीं
बाढ़ के विकराल प्रभाव से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच का अंतरराज्यीय सड़क संपर्क कई स्थानों से टूट गया है। सतना-चित्रकूट मुख्य मार्ग पर जलभराव के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात को डायवर्ट करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली दर्जनों पुलियाएं और सड़कें कट चुकी हैं।
सड़क मार्ग के साथ-साथ रेल यातायात पर भी मंदाकिनी के उफान का असर पड़ा है। चित्रकूट धाम कर्वी रेलवे स्टेशन और आसपास के रेल ट्रैक्स पर पानी भरने के कारण ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने जलभराव वाले ट्रैक पर ट्रेनों की गति नियंत्रित कर दी और एक पैसेंजर ट्रेन को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा।
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ का महा-रेस्क्यू: 700 से अधिक लोग सुरक्षित निकाले गए
आपदा की गंभीरता को देखते हुए चित्रकूट जिला प्रशासन ने राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष रेस्क्यू टीमों को तुरंत तैनात किया। राहत एवं बचाव दलों ने रातभर बाढ़ में घिरे मोहल्लों में सर्च ऑपरेशन चलाया और अब तक 700 से अधिक नागरिकों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को मोटरबोट्स के जरिए सुरक्षित बाहर निकालकर सरकारी राहत शिविरों में पहुंचाया है।
दुर्गम स्थानों और छतों पर फंसे परिवारों को भोजन के पैकेट, तिरपाल, पीने का शुद्ध पानी और दवाइयां पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना और राज्य प्रशासन के हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स सक्रिय कर दी हैं ताकि जलजनित संक्रामक रोगों के प्रसार को रोका जा सके।
Chitrakoot Flood: मुख्यमंत्री ने लिया स्थिति का जायजा, प्रशासन को दिए चौबीसों घंटे निगरानी के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट में बाढ़ की गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए उच्चाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए और प्रभावित परिवारों को तत्काल राशन किट, आर्थिक सहायता और सुरक्षित आश्रय प्रदान किया जाए।
चित्रकूट और सतना जिला प्रशासन के आला अधिकारी लगातार नावों के जरिए जलमग्न इलाकों का दौरा कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने मंदाकिनी नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में उफनती नदी या क्षतिग्रस्त पुलों के पास न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। पानी उतरने के साथ ही राजस्व टीमों द्वारा फसल और संपत्ति के नुकसान का सर्वेक्षण कर मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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