Nepal Floods 2026: 781 मौतों की पुष्टि, 2,502 लोग अब भी लापता; त्रिशूली और रसुवा टनल में रेस्क्यू तेज, भारत से पहुंचीं फॉरेंसिक व विशेषज्ञ टीमें

त्रिशूली और रसुवा टनल में रेस्क्यू तेज, भारत ने फॉरेंसिक विशेषज्ञ टीम भेजी

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Nepal Floods 2026: हिमालयी राष्ट्र नेपाल में लांगटांग री हिमाल क्षेत्र में हिमस्खलन और हिमनद टूटने (Glacier Collapse) के बाद भोटेकोशी व त्रिशूली नदियों में आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के चौथे दिन रविवार को मलबे और गाद से निरंतर निकल रहे शवों के बीच आधिकारिक मृतकों की संख्या बढ़कर 781 के पार पहुंच गई है, जबकि 2,502 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA), नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान लगातार दुर्गम घाटियों में जीवन रक्षा के प्रयासों में जुटे हैं।

नेपाल-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों से उठी बाढ़ और कीचड़ की इस विशाल सुनामी ने चितवन, नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम, गोरखा, नुवाकोट, धादिंग, तनहुं और रसुवा जिलों में भारी तबाही मचाई है। सड़कें, संपर्क पुल, टेलीकॉम टावर और प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं मलबे के नीचे समा चुकी हैं।

जिलों में तबाही के आंकड़े: चितवन में सबसे ज्यादा 264 शव बरामद

नेपाल गृह मंत्रालय और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा रविवार शाम जारी बुलेटिन के अनुसार, नदियों के बहाव क्षेत्र में आने वाले जिलों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। चितवन जिला इस जलप्रलय से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है, जहां अब तक 264 से अधिक शव निकाले जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त नवलपरासी पूर्व में 194, नवलपरासी पश्चिम में लगभग 120, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धादिंग में 50, तनहुं में 37 और रसुवा में 13 लोगों के शव बरामद किए गए हैं।

अस्पतालों के शवगृहों में क्षमता से अधिक शव पहुंचने के कारण प्रशासन को खुले परिसरों और मोबाइल मॉर्च्युरी वैन में अस्थायी प्रबंध करने पड़ रहे हैं। कई शवों की स्थिति अत्यंत क्षत-विक्षत होने के कारण उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर डीएनए सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है।

लापता 2,502 लोगों में विभिन्न निर्माणाधीन और संचालित जलविद्युत परियोजनाओं के 933 मजदूर, 592 विदेशी पर्यटक व पर्वतारोही तथा विदेशी दलों के साथ गाइड के रूप में गए 127 स्थानीय नेपाली नागरिक शामिल हैं। राहत की बात यह है कि सेना और सुरक्षा बलों ने अब तक 8,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर राहत शिविरों तक पहुंचाया है।

भारत की त्वरित मदद: 149 नागरिकों को बचाया, DNA जांच के लिए भेजी फॉरेंसिक टीम

आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए जमीनी और तकनीकी स्तर पर बड़े पैमाने पर सहायता अभियान छेड़ दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, रविवार शाम तक बाढ़ प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों में फंसे 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और उनकी आधिकारिक सूची जारी कर दी गई है। सुरक्षित निकाले गए कई भारतीय नागरिकों को काठमांडू के सुरक्षित होटलों और भारतीय दूतावास के समन्वय से दिल्ली भेजने की व्यवस्था की जा रही है।

इसके साथ ही, अज्ञात शवों की त्वरित और सटीक पहचान के लिए भारत से विशेष फॉरेंसिक विशेषज्ञों का दल अत्याधुनिक डीएनए टेस्टिंग उपकरणों के साथ काठमांडू पहुंच चुका है। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भारतीय विशेषज्ञ दल से मिलकर राहत कार्यों के समन्वय की समीक्षा की।

भारत की ओर से मलबे में दबी परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष टनल रेस्क्यू इंजीनियर, आपातकालीन दवाइयां, जल-शोधन उपकरण और भारी राहत सामग्री निरंतर भेजी जा रही है।

Nepal Floods 2026: चीन सीमा पर झील का संकट टला, त्रिशूली प्रोजेक्ट पर चीनी टीम का ऑपरेशन

सीमा पार से आने वाले अतिरिक्त पानी के खतरे को लेकर भी राहत भरी खबर सामने आई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को आधिकारिक जानकारी दी कि तिब्बत के जिरोंग काउंटी में ल्हेन्दे नदी पर भूस्खलन के मलबे से बनी प्राकृतिक झील का पानी धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से निकल चुका है। इस अवरोध में जमा करीब 20 लाख घन मीटर पानी अब सामान्य गति से बह रहा है, जिससे निचले इलाकों में द्वितीयक बाढ़ (Secondary Flash Flood) का तात्कालिक खतरा काफी हद तक टल गया है।

दूसरी ओर, नुवाकोट में स्थित त्रिशूली जलविद्युत परियोजना (सुरंग नंबर 3) में फंसे कामगारों को निकालने के लिए चीन से आई विशेष तकनीकी टीम ने नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। भारी गाद और पत्थरों को हटाने के लिए हैवी-ड्यूटी सक्शन पंप और कटर मशीनों का सहारा लिया जा रहा है।

Nepal Floods 2026: क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा और महामारियों का मंडराता खतरा

बाढ़ प्रभावित दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में राहत कार्यों की राह में ध्वस्त हो चुकी सड़कें और टूटे हुए पुल सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। नुवाकोट के देवीघाट सहित कई प्रमुख नदी तटीय क्षेत्रों में ड्रोन फुटेज से स्पष्ट हुआ है कि सैकड़ों मकान कीचड़ में डूबे हैं और नदी के किनारे मलबे का अंबार लगा हुआ है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के जलस्तर में रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण पुनः हलचल देखी जा रही है, जिसके चलते नदी के निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने और सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर ही शरण लेने की हिदायत दी गई है।

अस्थायी राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवाओं के वितरण के लिए नेपाल सरकार ने आपातकालीन राहत कोष जारी किया है। हालांकि, हजारों बेघर परिवारों के बीच अब दूषित पानी और गंदगी के कारण संक्रामक महामारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंपों में क्लोरीन की गोलियां बांट रही हैं और पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध करा रही हैं। यह आपदा आधुनिक इतिहास में हिमालयी क्षेत्र की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक त्रासदियों में दर्ज हो चुकी है।

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