Monday Shiva Puja: सोमवार की सुबह शिव पूजा में जल चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान, जानें सही विधि, नियम और धार्मिक मान्यताएं

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा, सामग्री और पूजा विधि से जुड़ी जरूरी बातें जानें

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Monday Shiva Puja: सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक वार किसी न किसी विशिष्ट देवी-देवता की उपासना के लिए समर्पित माना गया है। इनमें सोमवार का दिन देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पावन और फलदायी स्वीकार किया गया है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध और बेलपत्र अर्पित करने से साधक को मानसिक शांति, आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

अक्सर भक्तों के मन में यह संशय रहता है कि शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय दिशा, पात्र और सामग्री के क्या नियम होने चाहिए। धर्मग्रंथों में भगवान आशुतोष की पूजा-अर्चना को जितना सरल बताया गया है, उसके कुछ मूलभूत शास्त्रीय नियमों का पालन करना उतना ही आवश्यक माना गया है।

Monday Shiva Puja: सोमवार को भगवान शिव की पूजा क्यों मानी जाती है विशेष?

ज्योतिषीय और पौराणिक दृष्टिकोण से सोमवार का दिन चंद्र ग्रह से संबंधित माना गया है। भगवान शिव अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करते हैं, जिसके कारण उन्हें ‘चंद्रशेखर’ और ‘सोमेश्वर’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि जब भी कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो या जातक मानसिक तनाव, अनिर्णय और अशांति से जूझ रहा हो, तो सोमवार के दिन शिवजी की पूजा करने से चंद्र दोष का शमन होता है।

इसके अतिरिक्त, शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवान भोलेनाथ अत्यंत सरल स्वभाव के हैं और मात्र एक लोटा शुद्ध जल तथा सच्चे भाव से अर्पित किए गए बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि भक्त अपने दैनिक जीवन में संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सोमवार के दिन विशेष रूप से शिव मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय दिशा का ज्ञान होना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जलाभिषेक करते समय कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठना चाहिए, क्योंकि पूर्व दिशा भगवान शिव का प्रवेश द्वार मानी जाती है। इसी प्रकार दक्षिण दिशा की ओर मुख करना भी वर्जित है। जलाभिषेक के लिए सबसे उत्तम दिशा उत्तर मानी गई है, क्योंकि उत्तर दिशा भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थल मानी जाती है।

जल चढ़ाने के पात्र का चयन भी शास्त्रीय होना चाहिए। जलाभिषेक के लिए तांबे, पीतल या चांदी के लोटे का उपयोग सर्वोत्तम माना गया है। हालांकि, यदि आप शिवलिंग पर दूध अर्पित कर रहे हैं, तो तांबे के पात्र का प्रयोग कभी न करें। तांबे के संपर्क में आते ही दूध अम्लीय और अशुद्ध हो जाता है, इसलिए दूध अर्पित करने के लिए पीतल या चांदी के पात्र का ही इस्तेमाल करना चाहिए। जल हमेशा खड़े होकर नहीं, बल्कि शांत भाव से बैठकर और एक पतली व निरंतर धार के रूप में अर्पित करना चाहिए।

सोमवार की संपूर्ण शिव पूजा विधि: जानिए अभिषेक और अर्पण का क्रम

घर पर या मंदिर में शिव आराधना आरंभ करने से पूर्व स्नान कर स्वच्छ, विशेष रूप से श्वेत या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले गणेश जी, कार्तिकेय जी और माता पार्वती का स्मरण करते हुए जलाधारी पर जल अर्पित करें, फिर शिवलिंग के मुख्य भाग पर अभिषेक करें।

अभिषेक के बाद भगवान शिव को श्वेत चंदन का त्रिपुंड लगाएं और अक्षत यानी बिना टूटे हुए चावल अर्पित करें। इसके उपरांत तीन पत्तियों वाला स्वच्छ बेलपत्र, जिसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर हो, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं। इसके साथ धतूरा, मदार के फूल और श्वेत पुष्प अर्पित करें। अंत में धूप-दीप प्रज्वलित कर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें और कपूर से आरती उतारें।

पूजा में भूलकर भी न करें इन चीजों का प्रयोग

भगवान शिव की पूजा में कुछ विशिष्ट सामग्रियों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित माना गया है, जिनकी अनदेखी करने से पूजा का फल बाधित हो सकता है। पौराणिक कथा के अनुसार जालंधर वध के बाद से भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना सर्वथा निषेध माना गया है। इसी प्रकार ब्रह्मा जी के असत्य का साक्षी बनने के कारण महादेव ने केतकी और केवड़े के फूलों को भी अपनी पूजा से निष्कासित कर दिया था।

इसके अलावा सिंदूर, कुमकुम और हल्दी जैसी वस्तुएं सौभाग्य और स्त्री सौंदर्य का प्रतीक मानी जाती हैं, जबकि शिवजी वैरागी और संहारकर्ता स्वरूप में पूजे जाते हैं, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी या रोली नहीं चढ़ाई जाती। शंखचूड़ नामक दैत्य का संहार करने के कारण शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता है।

सोमवार को क्या दान करना माना जाता है शुभ?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करना अत्यधिक पुण्यकारी और चंद्र ग्रह को बल देने वाला होता है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्तियों को कच्चा दूध, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र, बताशा या दही का दान करना चाहिए।

यदि संभव हो तो किसी भूखे व्यक्ति को आदरपूर्वक सात्विक भोजन कराएं। यह दान जातक के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर पारिवारिक सुख-समृद्धि और मानसिक शांति में वृद्धि करता है।

Monday Shiva Puja: सोमवार की शिव पूजा से जुड़े मुख्य प्रश्न और उनके शास्त्रीय समाधान

शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल सूर्योदय से लेकर सुबह दस बजे तक का समय जलाभिषेक के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। हालांकि, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय भी शिव उपासना अत्यंत शुभ मानी गई है। इसके साथ ही महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने का समान शास्त्रीय विधान है।

शिवलिंग की परिक्रमा करते समय यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि जलाधारी यानी निर्मली को कभी लांघा नहीं जाता। जल जिस मार्ग से बाहर निकलता है, उसे सोमसूत्र कहा जाता है। इसलिए हमेशा आधी परिक्रमा चंद्राकार रूप में करके ही वापस लौट आना चाहिए।

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