Stock Market Today: सेंसेक्स 260 अंक टूटा, निफ्टी 22,500 के नीचे; जानें गिरावट की वजह
कच्चे तेल की महंगाई, IT शेयरों में बिकवाली और Fed की बैठक से बाजार का मूड कमजोर
Stock Market Today: भारतीय घरेलू शेयर बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी बिकवाली और दबाव के साथ हुई है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक को लेकर निवेशकों के बीच बनी घबराहट ने दलाल स्ट्रीट पर धारणा को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा देश की दिग्गज आईटी कंपनियों में आई तीव्र बिकवाली ने बाजार को नीचे खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।
Stock Market Today: प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में तेज गिरावट, ब्रॉड मार्केट में भी सुस्ती
सोमवार सुबह जैसे ही घंटी बजी, बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ खुले और शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव बढ़ता चला गया। शुरुआती मिनटों में सेंसेक्स करीब 260 अंकों की गिरावट के साथ 72,833.84 के स्तर पर आ गया, जिसमें 0.36 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी 50 करीब 104 अंक या 0.46 प्रतिशत का गोता लगाकर 22,499.30 के स्तर पर फिसल गया, जिससे यह महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 22,500 के नीचे चला गया।
बाजार में बिकवाली का यह रुख केवल फ्रंटलाइन दिग्गज कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली हावी रही। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि खुदरा और संस्थागत निवेशक वर्तमान में नए जोखिम लेने से बच रहे हैं और पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए मुनाफावसूली या निकासी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर के पार, ऊर्जा संकट ने बढ़ाई भारतीय बाजार की बेचैनी
दलाल स्ट्रीट पर गिरावट की सबसे प्रमुख वजह वैश्विक ऊर्जा बाजार में उपजा संकट है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों के आसपास बढ़ते तनाव और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की चिंताओं ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में आग लगा दी है।
भारत अपनी कुल घरेलू कच्चे तेल की खपत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे (CAD) पर भारी दबाव डालती हैं। तेल महंगा होने से माल ढुलाई लागत बढ़ती है, जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि होती है और अंततः मुद्रास्फीति (महंगाई) भड़कने का खतरा पैदा होता है। साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर भी गिरावट का दबाव गहराने लगता है, जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को भारतीय शेयर बाजार से निकासी के लिए प्रेरित करता है।
आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, इन्फोसिस 3.4 फीसदी टूटा
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सोमवार की सुबह आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा गिरावट का शिकार हुआ। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती सत्र में ही करीब 2.3 प्रतिशत तक लुढ़क गया। देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई और कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 3.4 प्रतिशत तक टूट गया।
इन्फोसिस द्वारा अपने वार्षिक राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती किए जाने की खबरों ने निवेशकों के विश्वास को झटका दिया है। कंपनी के सबसे बड़े कमाई वाले बाजार यानी उत्तरी अमेरिका में क्लाइंट्स के विवेकाधीन खर्चों (डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग) में आ रही सुस्ती को इसके लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। इन्फोसिस के साथ-साथ टीसीएस, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसी अन्य आईटी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भी नरमी का रुख बना हुआ है, जिससे पूरे बाजार का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है।
Stock Market Today: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और वैश्विक संकेतों पर टिकी निगाहें
इस सप्ताह वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर केंद्रित हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और सख्त बॉन्ड यील्ड के बीच निवेशक यह भांपने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। यदि फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने के संकेत मिलते हैं, तो उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी का बहिर्वाह और तेज हो सकता है।
इसके अलावा पिछले कारोबारी सप्ताह में भी विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से लगातार भारी बिकवाली दर्ज की गई थी, जिसका नकारात्मक असर नए सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक पश्चिम एशिया से तनाव कम होने और कच्चे तेल के दामों में स्थिरता आने के संकेत नहीं मिलते, तब तक घरेलू बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई आक्रामक दांव लगाने के बजाय कंपनियों के आगामी दूसरी तिमाही के नतीजों और वैश्विक घटनाक्रमों पर सतर्क नजर बनाए रखें।
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