Mallikarjun Kharge News: खरगे के बयान पर भाजपा का पलटवार, अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना
पटना में मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला। अमित शाह समेत भाजपा नेताओं ने सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का मुद्दा उठाया।
Mallikarjun Kharge News: बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक सार्वजनिक मंच से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर की गई एक विवादास्पद टिप्पणी ने देश के सियासी पारे को गरमा दिया है। रविवार को पटना के बापू सभागार में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए खरगे ने श्रोताओं के बीच से आई एक आवाज पर तैश में आकर अमर्यादित बयान दे डाला। इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होते ही भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा हमला बोल दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हनन बताते हुए कांग्रेस का वैचारिक दिवालियापन करार दिया है।
Mallikarjun Kharge News: पटना के बापू सभागार में क्या हुआ, क्यों बिगड़े खरगे के बोल
पटना के बापू सभागार में आयोजित समारोह के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार कर रहे थे। अपने संबोधन में वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर भाजपा पर सवाल उठा रहे थे। इसी बीच मंच के सामने दर्शकों की दीर्घा में मौजूद एक व्यक्ति ने जोर से चिल्लाकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कहीं नहीं जाने वाले। इस व्यवधान से असहज और उत्तेजित हुए खरगे ने बिना संयम बरते मंच से माइक पर कहा कि केवल मोदी ही नहीं, बल्कि उनके पिता भी जाएंगे।
इस बयान के आते ही सभागार में हंगामा मच गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी करने वाले युवक को सभागार से बाहर कर दिया। इसके बाद खरगे ने आरएसएस और भाजपा की विचारधारा पर भी कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश में जब तक यह सोच रहेगी तब तक शांति नहीं हो सकती। हालांकि, उनके भाषण के अन्य अंश पीछे छूट गए और प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता पर की गई टिप्पणी मुख्य विवाद का केंद्र बन गई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तीखा पलटवार: मर्यादाएं तार-तार
कांग्रेस अध्यक्ष की इस टिप्पणी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश के प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर सार्वजनिक जीवन की सारी मर्यादाएं तार-तार कर दी हैं। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और उनके साधारण परिवार को अपनी भड़ास का शिकार बनाया है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार चुनावी शिकस्त झेलने के बाद कांग्रेस गहरे अवसाद और हताशा के दौर से गुजर रही है। जब किसी पार्टी के पास नीतियां, सिद्धांत और सकारात्मक विमर्श समाप्त हो जाता है, तो वह व्यक्तिगत हमलों और गाली-गलौज की राजनीति पर उतर आती है। उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी जिस स्तर की निम्नस्तरीय भाषा का इस्तेमाल कर रही है, उसे भारतीय लोकतंत्र कभी स्वीकार नहीं करेगा और जनता इसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।
भाजपा नेताओं का कड़ा रुख: गुंडे-मवालियों जैसी भाषा अपनाने का आरोप
गृह मंत्री के बयान के साथ ही भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष को कटघरे में खड़ा कर दिया। बिहार भाजपा के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेता जिस भाषा का सहारा ले रहे हैं, वह पहले असामाजिक तत्वों और गुंडे-मवालियों की बोली मानी जाती थी। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक राजनीतिक दल के बजाय अनियंत्रित गिरोह की तरह बर्ताव कर रही है, जहां गरिमा और शालीनता का कोई स्थान नहीं बचा है।
केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान और चिराग पासवान ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। चिराग पासवान ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और नीतियों की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन किसी के दिवंगत माता-पिता को राजनीतिक वाद-विवाद में घसीटना भारतीय संस्कृति और लोकतांत्रिक आचरण के बिल्कुल विपरीत है। भाजपा प्रवक्ताओं ने मांग की कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपने इस अभद्र बयान के लिए सार्वजनिक रूप से देश और प्रधानमंत्री से माफी मांगनी चाहिए।
Mallikarjun Kharge News: कांग्रेस का स्पष्टीकरण और बढ़ते सियासी टकराव के मायने
विवाद के तूल पकड़ने पर कांग्रेस की ओर से मामले को संभालने की कोशिश की गई। पार्टी के प्रवक्ताओं और नेताओं ने तर्क दिया कि खरगे के बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि खरगे का आशय किसी व्यक्ति विशेष के जैविक पिता से नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैचारिक पितृ संस्था यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से था, जिसकी नीतियों का वे विरोध कर रहे थे। उधर, सभा में व्यवधान पैदा करने वाले व्यक्ति ने भी बाद में मीडिया के सामने सफाई दी कि उसकी बात का गलत अर्थ निकाला गया।
हालांकि, इन सफाई बयानों के बावजूद राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। चुनावी माहौल और मतदाता सूची संशोधन जैसे ज्वलंत मुद्दों के बीच उभरे इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच संवाद की सीमाएं कितनी तल्ख हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे आगामी विधानसभा चुनावों की सरगर्मी बढ़ेगी, दोनों खेमों के बीच व्यक्तिगत आक्षेप और तीखे प्रहारों का यह सिलसिला भारतीय राजनीति के विमर्श को और अधिक तीखा बनाएगा।
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