Stock Market 22 September 2026: मामूली बढ़त के साथ खुला शेयर बाजार, IT शेयरों में दबाव
सेंसेक्स 74,947 और निफ्टी 23,455 के स्तर पर खुले, IT शेयरों में बिकवाली से तेजी सीमित रही
Stock Market 22 September 2026: घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को सतर्कता के बीच सीमित बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। विदेशी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक रुझानों के दम पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों हरे निशान में खुले। शुरुआती सत्र में जहां उपभोक्ता, एविएशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में लिवाली देखने को मिली, वहीं दिग्गज सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों के शेयरों में बने बिकवाली के दबाव ने मुख्य सूचकांकों की तेजी के दायरे को सीमित रखा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का उच्च स्तर पर टिके रहना और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली भी निवेशकों की धारणा को सतर्क बनाए हुए है।
सत्र के आरंभ में बाजार का रुख मिलाजुला बना रहा। जहां ब्रॉडर मार्केट में चुनिंदा सेक्टरों में स्थिरता देखी गई, वहीं हैवीवेट आईटी काउंटर्स में मुनाफावसूली ने बाजार की गति को थामने का प्रयास किया।
Stock Market 22 September 2026: सेंसेक्स 74,900 के पार, निफ्टी में 40 अंकों की बढ़त
घरेलू शेयर बाजार के शुरुआती टिक में बीएसई सेंसेक्स 88.33 अंकों यानी 0.12 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 74,947.32 के स्तर पर खुला। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी 50 भी 40.85 अंकों यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,455.15 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।
कारोबार शुरू होने से पूर्व गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से भी सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए थे, जहां सुबह के सत्र में यह 23,506 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग 59.70 अंकों के प्रीमियम को दर्शा रहा था। हालांकि बाजार खुलने के उपरांत ऊपरी स्तरों पर आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों में बिकवाली हावी होने से सूचकांक अपनी शुरुआती तेजी को अधिक विस्तार नहीं दे सके।
आईटी सेक्टर पर बिकवाली का दबाव: इन्फोसिस और एचसीएल टेक फिसले
मंगलवार के शुरुआती सत्र में आईटी सूचकांक बाजार के लिए सबसे बड़ा अवरोधक सिद्ध हुआ। वैश्विक मैक्रो अनिश्चितताओं और तकनीकी खर्चों को लेकर जारी सतर्कता के बीच फ्रंटलाइन आईटी कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई।
इन्फोसिस के शेयर में शुरुआती घंटों के दौरान लगभग 0.44 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। वहीं एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर करीब 0.80 प्रतिशत टूटकर लाल निशान में कारोबार करता नजर आया। टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसी अन्य दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में भी सुस्ती और बिकवाली का रुख देखा गया। चूंकि निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही सूचकांकों में आईटी दिग्गजों का संयुक्त भारांक अत्यधिक है, अतः इस सेक्टर की कमजोरी ने बाजार की समग्र तेजी को थामने का काम किया।
इन प्रमुख काउंटर्स में दिखी मजबूती: ट्रेंट और इंडिगो चमके
आईटी शेयरों के विपरीत रिटेल, एविएशन और पेंट्स क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को नीचे गिरने से सहारा प्रदान किया। टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट लिमिटेड के शेयर में 1.07 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखने को मिला, जिससे यह सुबह के सत्र के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहा।
विमानन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) के शेयर में भी लगभग 0.97 प्रतिशत की मजबूत तेजी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त एशियन पेंट्स करीब 0.76 प्रतिशत की बढ़त पर टिका रहा, जबकि इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) में लगभग 0.47 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इन काउंटर्स में आई लिवाली ने बाजार के व्यापक अंडरटोन को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सोमवार की तेजी के बाद संभलने का प्रयास
इससे पूर्व सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार, 21 सितंबर को भारतीय बाजारों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। बीएसई सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74,894.86 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,414.30 के स्तर पर बंद हुआ था।
सोमवार को बाजार को बैंक और ऑटोमोबाइल शेयरों की खरीदारी का मजबूत समर्थन प्राप्त हुआ था। मंगलवार को बाजार उस तेजी को आगे बढ़ाने के लिए नए उत्प्रेरकों की तलाश में दिखाई दिया, किंतु तेल की ऊंची कीमतों और आईटी की नरमी ने गति को धीमा कर दिया।
संस्थागत निवेशकों का रुख: घरेलू फंड्स का समर्थन, विदेशी निवेशक बिकवाल
शेयर बाजार के नकदी प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के बीच का विरोधाभासी रुख स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। 21 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध बिकवाली का रुख अपनाते हुए लगभग 576.20 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में तरलता का मजबूत आधार बनाए रखा और लगभग 2,797.27 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली दर्ज की। जानकारों का मानना है कि खुदरा निवेशकों की मासिक एसआईपी (SIP) और घरेलू म्यूचुअल फंड्स की निरंतर खरीदारी ही विदेशी बिकवाली के दबाव को पूरी तरह बेअसर कर बाजार को ऐतिहासिक ऊंचाइयों के करीब बनाए रखने में ढाल का कार्य कर रही है।
वैश्विक बाजारों की स्थिति: वॉल स्ट्रीट में रिकॉर्ड तेजी, एशियाई बाजार भी संभले
वैश्विक मोर्चे से मिले संकेत भारतीय बाजारों के लिए काफी हद तक अनुकूल रहे। अमेरिकी बाजारों में सोमवार को भारी खरीदारी का दौर देखा गया, जहां नैस्डैक कंपोजिट 2.26 प्रतिशत की छलांग लगाकर 27,122.09 के नए रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 सूचकांक 1.49 प्रतिशत चढ़कर 7,764.70 पर बंद हुआ, जबकि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 366.19 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 52,048.83 के स्तर पर पहुंचा।
एशियाई बाजारों में भी मंगलवार सुबह अधिकांश सूचकांकों में मजबूती रही। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक करीब 2 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख सूचकांक एसएंडपी/एएसएक्स 200 लगभग 0.3 प्रतिशत ऊपर रहा। जापानी वित्तीय बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण मंगलवार को बंद रहे।
कच्चा तेल और बॉन्ड यील्ड: घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख निगरानी बिंदु
भारतीय बाजार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की चाल चिंता का मुख्य कारण बनी हुई है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 0.64 प्रतिशत चढ़कर 100.98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 0.55 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.87 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज किया गया। भारत द्वारा अपनी तेल आवश्यकताओं का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करने के कारण कच्चे तेल का 100 डॉलर के पार जाना घरेलू मुद्रा और राजकोषीय गणित के लिए एक संवेदनशील पहलू है।
दूसरी ओर अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में मामूली नरमी आई और यह 4.951 प्रतिशत के स्तर पर आ गई। डॉलर इंडेक्स भी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले 100.39 के दायरे में स्थिर रहा। बॉन्ड यील्ड में आने वाली स्थिरता उभरते बाजारों में पूंजी के बहिर्वाह को रोकने में सहायक मानी जाती है।
Stock Market 22 September 2026: निष्कर्ष
22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सतर्क आशावाद के साथ हुई है। जहां एक ओर वॉल स्ट्रीट की रिकॉर्ड तेजी और मजबूत घरेलू संस्थागत निवेश बाजार को सहारा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईटी सेक्टर में जारी मुनाफावसूली और 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचे कच्चे तेल के भाव बाजार को एकतरफा उछाल लेने से रोक रहे हैं। दिन के शेष सत्र में बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यूरोपीय बाजारों की शुरुआत कैसी रहती है और क्या निचले स्तरों पर बैंकिंग व आईटी काउंटर्स में नए सिरे से लिवाली लौटती है या नहीं।
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