IIT Bombay Student Death: हॉस्टल से हटेंगे सीलिंग फैन, डीन पर FIR के बाद कार्रवाई

साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT Bombay में सुरक्षा कदम, प्रोफेसर डूला पर FIR और कार्रवाई

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IIT Bombay Student Death: देश के अग्रणी तकनीकी संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के पवई स्थित परिसर में एक छात्र की असमय मृत्यु के उपरांत संस्थान का शीर्ष प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह हरकत में आ गया है। छात्र सुरक्षा को सुदृढ़ करने और छात्रावासों में अप्रिय घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से प्रशासन ने हॉस्टल के सभी कमरों से पारंपरिक सीलिंग फैन (छत के पंखे) हटाकर उनकी जगह वॉल-माउंटेड पंखे (दीवार पर लगने वाले पंखे) स्थापित करने का नीतिगत निर्णय लिया है। नए पंखों की पहली खेप संस्थान के परिसर में पहुंच चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से सभी छात्रावास कक्षों में लगाने की विधिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

पवई कैंपस में घटित इस हृदयविदारक घटना ने देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, अकादमिक दबाव और संस्थागत जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है। छात्रों के तीव्र आक्रोश और निरंतर विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रशासन ने कई प्राथमिक मांगों को स्वीकार करते हुए सख्त कदम उठाए हैं। प्रशासनिक पुनर्गठन के साथ-साथ छात्रावास अवसंरचना में व्यापक फेरबदल की शुरुआत कर दी गई है, ताकि परिसर में सामान्य शैक्षणिक वातावरण शीघ्र बहाल किया जा सके।

IIT Bombay Student Death: हॉस्टल कमरों में वॉल-माउंटेड पंखों की स्थापना

संस्थान द्वारा सीलिंग फैन हटाए जाने के निर्णय को लेकर छात्रों के मध्य तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस पर आईआईटी बॉम्बे प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टल कमरों में सीलिंग फैन के स्थान पर दीवार पर स्थिर रहने वाले वॉल-माउंटेड पंखे लगाने की योजना अचानक नहीं ली गई है, बल्कि यह संस्थान की दीर्घकालिक छात्रावास नवीनीकरण परियोजना का एक महत्वपूर्ण अंग थी। सूत्रों के अनुसार, विगत दो माह से सुरक्षा विशेषज्ञों और हॉस्टल समन्वय समिति के मध्य इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श चल रहा था, जिसे अब तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है।

परिसर में नए वॉल-माउंटेड पंखों का पहला बड़ा जत्था पहुंच चुका है और तकनीकी दल द्वारा पुराने सीलिंग फैन्स को उतारने का काम शुरू किया जा चुका है। प्रशासन का तर्क है कि यह भौतिक परिवर्तन छात्र सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमरों के ढांचागत आधुनिकीकरण में सहायक सिद्ध होगा। यद्यपि छात्र समुदाय का एक बड़ा वर्ग इसे केवल एक सतही और प्रतीकात्मक कदम मानते हुए मानसिक तनाव के मूल कारणों पर वार करने की मांग कर रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर बड़ा प्रहार: छात्र कल्याण डीन पदमुक्त, पुलिस में एफआईआर दर्ज

दिवंगत छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मृत्यु के उपरांत उपजे जनाक्रोश के दबाव में संस्थान ने प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्रवाई की है। सोमवार को छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स) के पद पर कार्यरत प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को उनके प्रशासनिक दायित्वों से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है।

दूसरी ओर, मृतक छात्र के परिजनों द्वारा दी गई औपचारिक विधिक शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने संबंधित प्रोफेसर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता और संबंधित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है। परिजनों का गंभीर आरोप है कि हाल ही में संपन्न हुई एक परीक्षा के दौरान घटी घटना को लेकर छात्र पर अनुचित दबाव बनाया गया और उसे अपमानित किया गया, जिससे वह गहरे मानसिक अवसाद में चला गया था।

क्राइम ब्रांच की सघन जांच: सीसीटीवी फुटेज और टाइमलाइन की पड़ताल

मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवालों को देखते हुए मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने जांच का दायरा विस्तृत कर दिया है। जांच दल परीक्षा भवन से लेकर छात्रावास तक के सभी सीसीटीवी कैमरों की डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग की फ्रेम-दर-फ्रेम तकनीकी संवीक्षा कर रहा है।

जांच अधिकारी छात्र के परीक्षा कक्ष में प्रवेश से लेकर परीक्षा समाप्त होने के पलों, वहां ड्यूटी पर तैनात प्राध्यापकों के साथ हुए संवाद और उसके उपरांत छात्र के सीधे अपने हॉस्टल कक्ष में जाने तक की संपूर्ण समय-सारणी (टाइमलाइन) की कड़ियां जोड़ रहे हैं। हॉस्टल के प्रवेश द्वार के फुटेज से यह तथ्य प्रमाणित हुआ है कि कमरे में जाने के पश्चात छात्र बाहर नहीं निकला था। पुलिस इस बात का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रही है कि परीक्षा कक्ष में ऐसा क्या घटित हुआ जिसने इस मेधावी छात्र को इतना आत्मघाती कदम उठाने पर विवश कर दिया।

कैंपस में छात्रों का उग्र प्रदर्शन: केवल पंखा बदलना समाधान नहीं, संस्थागत सुधार जरूरी

घटना के पश्चात आईआईटी बॉम्बे परिसर में छात्रों द्वारा निकाले गए कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासनिक नीतियों की पोल खोल कर रख दी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रशासन द्वारा केवल कमरों से सीलिंग फैन हटा देना समस्या से मुंह मोड़ने जैसा है। छात्रों का स्पष्ट मत है कि जब तक संस्थान के भीतर अकादमिक तनाव कम करने, जातिगत पूर्वाग्रहों को समाप्त करने और एक पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना नहीं की जाती, तब तक वास्तविक सुरक्षा संभव नहीं है।

छात्र प्रतिनिधियों ने मांग की है कि परिसर में चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाली पूर्णकालिक मनोवैज्ञानिक परामर्श सेवाएं, स्वतंत्र छात्र लोकपाल की नियुक्ति और संकाय सदस्यों के संवेदीकरण (सेंसिटाइजेशन) की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। छात्रों के अनुसार, कठोर ग्रेडिंग प्रणाली, बैकलाग का भय और प्राध्यापकों का सख्त रुख युवा मस्तिष्कों पर असहनीय बोझ डालता है, जिसे दूर करना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य अवसंरचना पर पुनर्विचार: विशेषज्ञों की राय

आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे देश के शीर्षस्थ संस्थानों में छात्रों द्वारा उठाए जाने वाले ऐसे आत्मघाती कदम लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। समाजशास्त्रियों और मनोरोग विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भौतिक बाधाएं (जैसे सीलिंग फैन हटाना) खड़ी कर देने से अवसादग्रस्त छात्र को बचाया नहीं जा सकता। इसके लिए एक संवेदनशील, सुलभ और पूर्वाग्रह-मुक्त मानवीय समर्थन प्रणाली की दरकार होती है।

आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वह अपनी मेंटल हेल्थ विंग का पुनर्गठन कर रहा है। हॉस्टलों में सहपाठियों के ‘बडी सिस्टम’ (पीयर सपोर्ट) को सक्रिय किया जाएगा ताकि किसी भी छात्र के व्यवहार में आने वाले अचानक एकाकीपन या अवसाद के लक्षणों को समय रहते पहचाना जा सके और उसे विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

IIT Bombay Student Death: निष्कर्ष

आईआईटी बॉम्बे में घटित यह त्रासद घटना उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर दर्पण प्रस्तुत करती है। सीलिंग फैन हटाकर वॉल-माउंटेड पंखे लगाना और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को पद से हटाना तात्कालिक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, किंतु यह स्थायी समाधान कदापि नहीं है। जब तक देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक परिसरों में सफलता की परिभाषा से अमानवीय प्रतिस्पर्धा और भय को समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक युवा प्रतिभाओं का जीवन सुरक्षित नहीं हो सकता। पुलिस की निष्पक्ष विधिक जांच और संस्थान के भीतर अकादमिक संस्कृति का मानवीय पुनर्गठन ही दिवंगत छात्र के प्रति वास्तविक न्याय सिद्ध होगा।

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