Silent Ration Card पर सरकार की सख्ती, अक्टूबर से 1.58 करोड़ लाभार्थियों का राशन बंद, e-KYC के लिए मिलेंगे तीन महीने
Silent Ration Card पर सरकार की सख्ती, अक्टूबर से 1.58 करोड़ लाभार्थियों का राशन बंद, e-KYC के लिए मिलेंगे तीन महीने
Silent Ration Card: पिछले छह महीनों से राशन नहीं उठाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार अक्टूबर से करीब 1.58 करोड़ राशन कार्ड बंद करने की तैयारी में है। ये वे कार्ड हैं, जिन पर बीते छह महीनों में अनाज नहीं लिया गया। सरकार का मकसद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के डेटाबेस से निष्क्रिय, डुप्लीकेट और संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें सूची से अलग करना है। हालांकि नाम तुरंत स्थायी रूप से नहीं हटेंगे। संबंधित लाभार्थियों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा और इस अवधि में e-KYC पूरा करने पर कार्ड दोबारा चालू हो जाएगा।
Silent Ration Card: क्या है सरकार का फैसला
केंद्र सरकार PDS डेटाबेस की सफाई के लिए यह कदम उठा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इसकी जानकारी दी। उनके अनुसार, जिन लाभार्थियों के कार्ड पर छह महीने से राशन नहीं लिया गया, उनके कार्ड अक्टूबर से कुछ समय के लिए बंद किए जाएंगे।
अधिकारी ने साफ किया कि लाभार्थियों के नाम पीडीएस डेटाबेस से तुरंत नहीं हटाए जाएंगे। पहले उन्हें यह साबित करने का मौका दिया जाएगा कि वे असली और पात्र लाभार्थी हैं। इस दौरान कार्ड अस्थायी रूप से निष्क्रिय रहेंगे।
क्या होते हैं साइलेंट राशन कार्ड
सरकारी भाषा में ‘साइलेंट राशन कार्ड’ उन कार्डों को कहा जाता है, जिनसे बीते छह महीनों में अनाज नहीं उठाया गया। यानी कागज पर कार्ड मौजूद है, लेकिन उसके इस्तेमाल का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
सरकार इन कार्डों को संदेह की नजर से देख रही है। ऐसे कार्डों में डुप्लीकेट एंट्री, मृत लाभार्थी, दूसरी जगह जा चुके परिवार या अयोग्य लोग शामिल हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इनकी पहचान किए बिना अनाज के सही वितरण की व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती।
तीन महीने में पूरी करनी होगी e-KYC
संशोधित ‘टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) ऑर्डर’ में इस प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। इसके तहत ऐसे राशन कार्डों को कुछ समय के लिए निष्क्रिय किया जा सकेगा। उसके बाद अंतिम फैसला लेने से पहले तीन महीने के भीतर फील्ड वेरिफिकेशन और e-KYC की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अगर कोई लाभार्थी इस अवधि में e-KYC करा लेता है, तो उसका कार्ड फिर से चालू कर दिया जाएगा। ऐसे में जिन परिवारों के कार्ड इस श्रेणी में आते हैं, उनके लिए समय रहते प्रक्रिया पूरी करना सबसे अहम होगा।
डेटाबेस सुधार के पीछे सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि अनाज असली जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए डेटाबेस का दुरुस्त होना जरूरी है। डुप्लीकेट, मृत, दूसरी जगह जा चुके या अयोग्य लोगों के नाम सूची में बने रहने से अनाज की बर्बादी होती है और वास्तविक पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था कमजोर पड़ती है।
इसी वजह से सरकार साइलेंट कार्डों की जांच को प्राथमिकता दे रही है। तीन महीने की समय-सीमा में फील्ड वेरिफिकेशन और e-KYC के जरिए यह तय किया जाएगा कि कौन-सा कार्ड वास्तव में सक्रिय और पात्र है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं करोड़ों कार्ड
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने PDS डेटाबेस की सफाई का अभियान चलाया है। इससे पहले भी डिजिटाइजेशन, आधार सीडिंग और e-KYC का इस्तेमाल कर व्यवस्था को दुरुस्त करने की कोशिश की जा चुकी है।
खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2024 में बताया था कि इन प्रक्रियाओं के जरिए पीडीएस प्रणाली से करीब 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटाए गए थे। मंत्रालय ने इसे ‘डी-डुप्लीकेशन’ यानी डुप्लीकेट कार्ड हटाने की प्रक्रिया बताया था। उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सिर्फ पात्र लोग ही इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।
विशेषज्ञ ने उठाए सवाल
सरकार के इस तरीके पर अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्रन नारायणन ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पहले लाभार्थियों के कार्ड बंद करना और फिर उनसे पात्रता साबित करने को कहना उचित तरीका नहीं है।
उनके मुताबिक, किसी का नाम हटाकर उससे e-KYC या ऐसे ही दूसरे तरीकों से दोबारा सिस्टम में जुड़ने को कहना जवाबदेही का बोझ सरकार से नागरिकों पर डालने जैसा है। प्रो. नारायणन ने यह भी कहा कि अधिकार आधारित कल्याणकारी कार्यक्रम में डिफॉल्ट व्यवस्था लोगों को बाहर करने की नहीं, बल्कि उन्हें शामिल करने की होनी चाहिए।
लाभार्थियों को क्या करना चाहिए
जिन उपभोक्ताओं ने पिछले छह महीनों से राशन नहीं लिया है, उनके लिए यह सतर्क होने का समय है। कार्ड बंद होने की स्थिति में उन्हें तीन महीने के भीतर e-KYC की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी कार्ड दोबारा सक्रिय हो सकेगा।
फील्ड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी इसी अवधि में होगी। इसलिए लाभार्थियों को अपने राशन कार्ड की स्थिति की जानकारी रखनी चाहिए और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। e-KYC की प्रक्रिया के विस्तृत चरणों और केंद्रों को लेकर अभी अलग से जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकार अक्टूबर से 1.58 करोड़ साइलेंट राशन कार्ड को अस्थायी रूप से बंद करने की तैयारी में है, लेकिन नाम तुरंत स्थायी रूप से नहीं हटेंगे। लाभार्थियों को तीन महीने के भीतर e-KYC कराकर अपनी पात्रता साबित करनी होगी, जिसके बाद कार्ड फिर से चालू किया जाएगा। सरकार इसे अनाज की बर्बादी रोकने और असली जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने का जरूरी कदम बता रही है, जबकि विशेषज्ञ इसे नागरिकों पर बोझ डालने वाला तरीका मानते हैं। आने वाले महीनों में फील्ड वेरिफिकेशन और e-KYC की प्रक्रिया से साफ होगा कि इस कवायद का जमीन पर कितना असर पड़ता है।
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