Weekend Trip: मसूरी-नैनीताल नहीं, उत्तराखंड की इन 4 शांत जगहों पर बनाएं घूमने का प्लान; जानें रूट और ट्रैवल टिप्स

चौकोड़ी, मुनस्यारी, एबट माउंट और बिनसर में पाएं सुकून, प्रकृति और हिमालय का शानदार नजारा

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Weekend Trip: दफ्तर की भागदौड़, दैनिक तनाव और सप्ताहांत पर मसूरी या नैनीताल के मॉल रोड पर लगने वाले भारी जाम से यदि आप बचना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श विकल्प है। सामान्यतः दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों से पर्यटकों की पहली पसंद देहरादून, मसूरी या नैनीताल होती है, किंतु छुट्टियों के दौरान वहां बढ़ने वाली भीड़ सुकून की तलाश में निकले यात्रियों को निराश कर देती है। ऐसे में कुमाऊं अंचल के चार अपेक्षाकृत शांत और प्राकृतिक रूप से समृद्ध गंतव्य—चौकोड़ी, मुनस्यारी, एबट माउंट और बिनसर—एक यादगार और शांत वीकेंड यात्रा के लिए बेहतरीन स्थल सिद्ध होते हैं।

Weekend Trip: चौकोड़ी

पिथौरागढ़ जिले में लगभग 2,010 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चौकोड़ी एक ऐसी सुरम्य घाटी है जहां से हिमालय की नंदा देवी, नंदा कोट और पंचाचूली चोटियों के स्पष्ट और भव्य दर्शन होते हैं। ब्रिटिश काल में विकसित किए गए चाय के बागानों के साथ-साथ फलों के बगीचे और बांज व बुरांश के सघन जंगल इस स्थान को विशेष सौंदर्य प्रदान करते हैं।

चौकोड़ी में सुबह और शाम का समय अत्यंत शांत और सुहावना रहता है, जहां प्रकृति के बीच लंबी सैर का आनंद लिया जा सकता है। इसके समीप स्थित पाताल भुवनेश्वर की भूमिगत गुफाएं, धरमघर और बेरीनाग के प्रसिद्ध नाग मंदिर भी दर्शनीय हैं। चौकोड़ी पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो वहां से लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर है। दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा हल्द्वानी, अल्मोड़ा और सेराघाट होते हुए लगभग 460 किलोमीटर का सफर तय करके चौकोड़ी पहुंचा जा सकता है।

मुनस्यारी: पंचाचूली की चोटियां और रोमांचक ट्रेकिंग

पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक जोहार घाटी में स्थित मुनस्यारी उन पर्यटकों के लिए सर्वथा उपयुक्त है जो पहाड़ों के साथ साहसिक गतिविधियों और ट्रेकिंग में रुचि रखते हैं। स्थानीय बोली में ‘बर्फ के स्थान’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र पंचाचूली की पांचों पर्वत चोटियों के अत्यंत निकट और विहंगम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह मिलम और रालम ग्लेशियर ट्रेक का प्रमुख बेस कैंप भी माना जाता है।

मुनस्यारी का परिवेश शहर की हलचल से कोसों दूर एक शांत और शुद्ध हिमालयी जीवनशैली का अनुभव कराता है। यहां बिर्थी जलप्रपात और महेश्वरी कुंड प्रमुख आकर्षण के केंद्र हैं। दिल्ली से मुनस्यारी की सड़क दूरी लगभग 560 किलोमीटर है, जिसके लिए आनंद विहार से पिथौरागढ़ और वहां से आगे सड़क मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। अत्यधिक दूरी और घुमावदार पहाड़ी रास्तों के कारण इस यात्रा के लिए कम से कम चार से पांच दिनों का समय नियोजित करना व्यावहारिक रहता है।

एबट माउंट: औपनिवेशिक विरासत और देवदार के वनों का सन्नाटा

चंपावत जिले के लोहाघाट से मात्र सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित एबट माउंट लगभग 1,981 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक छोटा सा हिल स्टेशन है। 20वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेज व्यवसायी जॉन हेरोल्ड एबट द्वारा बसाई गई यह यूरोपीय शैली की बस्ती अपने पुराने ब्रिटिश कॉटेज, ऐतिहासिक चर्च और देवदार के वनों के लिए जानी जाती है।

काली कुमाऊं क्षेत्र का यह कोना आज भी अत्यधिक व्यावसायिकता से अछूता है, जिससे यहां का एकांत पर्यटकों को सुकून देता है। यहां बर्ड वाचिंग, शांत वादियों में नेचर वॉक और फोटोग्राफी का आनंद लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त आसपास स्थित बाणासुर का किला और स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों से जुड़ा मायावती आश्रम भी मुख्य पर्यटन स्थल हैं। एबट माउंट के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर (लगभग 90 किमी) और काठगोदाम (लगभग 160 किमी) हैं, जबकि दिल्ली से सड़क मार्ग की कुल दूरी लगभग 420 किलोमीटर है।

बिनसर: सघन वन्यजीव अभयारण्य और हिमालय का पैनोरमा

अल्मोड़ा से लगभग 30 किलोमीटर दूर 2,420 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बिनसर जंगल और वन्यजीवन के बीच समय बिताने के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य है। बिनसर का मुख्य आकर्षण 47 वर्ग किलोमीटर में फैली बिनसर वाइल्डलाइफ सेंचुरी है, जहां चीड़, ओक और बुरांश के पेड़ों के बीच तेंदुआ, काकड़ और 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं।

सेंचुरी के भीतर स्थित जीरो पॉइंट तक की पैदल यात्रा प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष अनुभव सिद्ध होती है। यहां से केदारनाथ, चौखंबा, त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली तक लगभग 300 किलोमीटर विस्तृत हिमालयन श्रृंखला का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। दिल्ली से गाजियाबाद, मुरादाबाद, हल्द्वानी और अल्मोड़ा होते हुए सड़क मार्ग से बिनसर की दूरी लगभग 400 किलोमीटर है, जबकि निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जहां से नियमित टैक्सियां सुलभ रहती हैं।

Weekend Trip: पहाड़ों के सफर से पूर्व मौसम और मार्ग की सतर्कता

उत्तराखंड के इन सुदूर और शांत पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा की योजना बनाते समय कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना अनिवार्य है। पर्वतीय मार्गों पर मौसम अचानक परिवर्तित हो सकता है, इसलिए रवानगी से पूर्व स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी सड़क स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।

इन ऑफबीट स्थलों पर बड़े होटलों के बजाय स्थानीय होमस्टे और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के विश्राम गृह उपलब्ध रहते हैं, जिनकी अग्रिम बुकिंग करा लेना यात्रा को सुगम बनाता है। इसके साथ ही पहाड़ी घाटियों में ईंधन स्टेशनों और एटीएम की दूरी अधिक होने के कारण मुख्य शहरों से ही पर्याप्त नकदी और ईंधन की व्यवस्था करके आगे बढ़ना समझदारी का कदम होगा।

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