Bihar Politics: बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दिया इस्तीफा, अब JDU के खाते में जा सकती है कुर्सी
सभापति पद खाली होने के बाद JDU के नए सभापति को लेकर रामवचन राय का नाम चर्चा में
Bihar Politics: बिहार की विधायी और गठबंधन की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह ने बिहार विधान परिषद के सभापति पद से आधिकारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधान परिषद के उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय को विधिवत सौंप दिया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर शीर्ष संवैधानिक और विधायी पदों के नए समीकरणों के तहत यह कदम उठाया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की स्पष्ट चर्चा है कि समझौते के तहत अब विधान परिषद के सभापति की कुर्सी जनता दल यूनाइटेड के हिस्से में जाएगी।
चार बार उच्च सदन के शीर्ष आसन को सुशोभित कर चुके अवधेश नारायण सिंह का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब राज्य में उच्च सदन की आठ सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया भी गतिमान है। उनके पद छोड़ने के साथ ही विधान परिषद में नए सभापति के औपचारिक चयन और मनोनयन की विधिक प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
Bihar Politics: उपसभापति रामवचन राय को सौंपा इस्तीफा
अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार, 28 सितंबर को विधान परिषद सचिवालय पहुंचकर उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय को अपना इस्तीफा सौंपा। पदमुक्त होने के बाद उन्होंने एक विस्तृत वक्तव्य जारी कर अपने कार्यकाल के दौरान सदन के सभी दलीय सदस्यों, सचिवालय के प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों से मिले आत्मीय सहयोग के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।
अपने सार्वजनिक बयान और इस्तीफे के पत्र में उन्होंने अपने दीर्घकालिक राजनीतिक सफर को रेखांकित करते हुए कहा कि एक साधारण भाजपा कार्यकर्ता से लेकर दल के विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों को निभाने तक उन्हें संगठन का निरंतर विश्वास प्राप्त हुआ। उन्होंने एनडीए के शीर्ष नेतृत्व और विशेष रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सतत सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि एनडीए शासनकाल के दौरान उन्हें चार अलग-अलग कार्यकालों में उच्च सदन के सभापति की गौरवमयी जिम्मेदारी संभालने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
एनडीए का आंतरिक सत्ता-साझेदारी फॉर्मूला: क्यों खाली हुआ पद?
अवधेश नारायण सिंह ने अपने त्यागपत्र में किसी व्यक्तिगत कारण या स्वास्थ्य संबंधी अड़चनों का कोई उल्लेख नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह इस्तीफा पूरी तरह एनडीए गठबंधन के भीतर पूर्व-सहमति से तय हुए पावर-शेयरिंग फॉर्मूले का हिस्सा है।
राज्य विधानसभा में स्पीकर का पद भाजपा के पास होने के चलते विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू के कोटे में दिए जाने पर गठबंधन स्तर पर सहमति बनी थी। अवधेश नारायण सिंह जून 2024 में सभापति चुने गए थे और दो वर्षों से अधिक समय तक इस दायित्व का निर्वहन करने के बाद उन्होंने गठबंधन के आंतरिक संतुलन को साधने के लिए सौहार्दपूर्ण ढंग से पद का त्याग किया है।
प्रो. डॉ. रामवचन राय का नाम सबसे आगे: कौन संभालेगा उच्च सदन की कमान?
सभापति का पद रिक्त होते ही जेडीयू कोटे से नए सभापति के चयन को लेकर हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में वर्तमान उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय का नाम नए सभापति के रूप में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है। रामवचन राय जेडीयू के वरिष्ठ विधान पार्षद हैं और संसदीय परंपराओं व विधायी नियमों के गहरे जानकार माने जाते हैं।
चूंकि उन्होंने ही अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा प्राप्त किया है, इसलिए नए सभापति के औपचारिक निर्वाचन या शपथ ग्रहण तक सदन की आवश्यक प्रक्रियात्मक जिम्मेदारियां उन्हीं के कंधों पर रहेंगी। हालांकि संसदीय नियमों के अनुसार विधिवत चुनाव प्रक्रिया या अधिसूचना जारी होने के बाद ही नए सभापति के नाम पर अंतिम आधिकारिक मुहर लगेगी।
परिषद की 8 सीटों पर चुनाव के बीच आया फैसला: राजनीतिक निहितार्थ
यह घटनाक्रम बिहार विधान परिषद की खाली हो रही आठ सीटों के लिए घोषित चुनाव कार्यक्रम के बीच घटित हुआ है। भारत निर्वाचन आयोग ने सितंबर माह में राज्य के चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराने की समय-सारिणी जारी की है, जहां निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर को पूरा होने जा रहा है।
हालांकि सभापति का इस्तीफा एक स्वतंत्र संवैधानिक निर्णय है, किंतु चुनावी माहौल के बीच सदन के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव एनडीए गठबंधन के भीतर दोनों प्रमुख दलों के आपसी तालमेल और चुनावी एकजुटता का कड़ा संदेश देता है। यद्यपि विपक्षी दलों जैसे जन सुराज ने इसे दबाव में कराया गया इस्तीफा करार देते हुए राजनीतिक बयानबाजी शुरू कर दी है, किंतु अवधेश नारायण सिंह के शालीन वक्तव्य और एनडीए नेताओं के रुख ने इसे गठबंधन के स्वाभाविक सत्ता-संतुलन का रूप दिया है।
Bihar Politics: विधायी प्रक्रियाओं के बाद होगी नए सभापति की ताजपोशी
बिहार विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय व्यवस्था का उच्च सदन है और इसके संचालन में सभापति की निष्पक्ष भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अवधेश नारायण सिंह के पद छोड़ने के बाद अब विधान परिषद सचिवालय द्वारा रिक्त पद के चुनाव को लेकर संवैधानिक अधिसूचना जारी की जाएगी।
अब संपूर्ण निगाहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए नेतृत्व के संयुक्त निर्णय पर टिकी हैं। आगामी सत्र या विशेष प्रक्रिया के माध्यम से जब जेडीयू के नामित सदस्य को सभापति की कुर्सी सौंपी जाएगी, तब राज्य की दोनों विधायी सभाओं में भाजपा और जेडीयू का शक्ति संतुलन औपचारिक रूप से पूर्ण हो जाएगा।
Read More Here
Aaj Ka Mausam 29 September 2026: यूपी, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में बारिश के आसार