Meerut Blue Drum Murder Case: सौरभ राजपूत हत्याकांड में 30 सितंबर को आएगा फैसला, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के भविष्य पर टिकी नजर
मेरठ जिला अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस पूरी, अब फैसले का इंतजार
Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसे अपराध जगत और स्थानीय हलकों में ‘नीला ड्रम कांड’ के नाम से जाना जाता है, में न्याय की घड़ी अत्यंत समीप आ गई है। मेरठ की जिला अदालत में दोनों पक्षों की ओर से चली लंबी विधिक जिरह और अंतिम बहस पूरी कर ली गई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करते हुए निर्णय सुनाने के लिए 30 सितंबर 2026 की तिथि नियत की है। इस सनसनीखेज मुकदमे में मृतक सौरभ राजपूत की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसका सहयोगी साहिल शुक्ला मुख्य आरोपी के रूप में न्यायिक हिरासत में जेल में निरुद्ध हैं। दोनों ही पक्षों की दलीलें समाप्त होने के बाद अब समूचे मेरठ की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।
Meerut Blue Drum Murder Case: मार्च 2025 का खौफनाक घटनाक्रम
मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में मार्च 2025 के दौरान यह मामला तब प्रकाश में आया था जब पूर्व मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत अचानक लापता हो गए थे। पुलिस जांच के दौरान जब परतें खुलीं, तो सौरभ का शव एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपाया हुआ बरामद हुआ। शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के इस तरीके के चलते ही इस पूरी घटना को ‘ब्लू ड्रम केस’ का नाम दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने की सुसंगत धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
प्रेम विवाह से उपजा तनाव और अवैध संबंधों के गंभीर आरोप
अदालत में प्रस्तुत अभियोजन अभिलेखों के अनुसार, सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था और दोनों का दांपत्य जीवन कुछ वर्षों तक सामान्य रहा। इस दौरान दोनों की एक संतान भी हुई। सौरभ मर्चेंट नेवी में कार्यरत होने के कारण लंबे समय तक समुद्री यात्राओं और विदेशी दौरों पर रहते थे। अभियोजन का आरोप है कि सौरभ की अनुपस्थिति के दौरान मुस्कान और साहिल शुक्ला के बीच निकटता बढ़ी, जिसको लेकर सौरभ के लौटने पर वैवाहिक विवाद शुरू हो गया। इसी गृह क्लेश और कथित संबंधों के चलते सौरभ की हत्या की आपराधिक साजिश रची गई। हालांकि बचाव पक्ष इन आरोपों को हमेशा सिरे से खारिज करता रहा है।
अभियोजन की अंतिम दलीलें और गवाहों के महत्वपूर्ण बयान
मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता (क्रिमिनल) केके चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए घटनाक्रम की कड़ियों को सिलसिलेवार ढंग से अदालत के समक्ष रखा। अभियोजन ने मृतक सौरभ की मां के बयान, करीबी मित्रों की गवाही, घटना स्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक व फोरेंसिक साक्ष्य और उस दुकानदार की गवाही को प्रमुख आधार बनाया जिससे शव छिपाने के लिए ड्रम खरीदा गया था।
अंतिम चरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने चार महत्वपूर्ण गवाहों को कुछ अतिरिक्त बिंदुओं पर पूछताछ के लिए पुनः तलब करने का आवेदन दिया था, जिसे बचाव पक्ष की लिखित आपत्ति के उपरांत अदालत ने निरस्त कर दिया था। इसके पश्चात दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी अंतिम बहस पूरी की और पत्रावली को निर्णय सुरक्षित करने के लिए रख दिया गया।
जेल में बच्ची का जन्म और डीएनए जांच को लेकर उपजा विवाद
मुकदमे की विचारण अवधि के दौरान यह प्रकरण तब एक बार फिर सुर्खियों में आया था जब जेल में निरूद्ध रहने के दौरान नवंबर 2025 में मुस्कान रस्तोगी ने एक बच्ची को जन्म दिया था। उस समय जेल प्रशासन द्वारा जच्चा-बच्चा के समुचित उपचार और देखभाल की व्यवस्था की गई थी।
इस घटनाक्रम के उपरांत सौरभ के परिजनों ने नवजात शिशु के पितृत्व निर्धारण हेतु डीएनए (DNA) परीक्षण कराए जाने की मांग उठाकर मामले को नया मोड़ दे दिया था। इसके साथ ही सौरभ की पूर्व संतान की अभिरक्षा (कस्टडी) को लेकर भी सौरभ के परिवार और मुस्कान के मायके पक्ष के बीच कानूनी खींचतान की स्थिति बनी रही। हालांकि यह पारिवारिक और कस्टडी विवाद मुख्य हत्या के आपराधिक मुकदमे से भिन्न विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत आता है।
Meerut Blue Drum Murder Case: 30 सितंबर को तय होगा आरोपियों का विधिक भविष्य
लगभग अठारह माह तक चली सघन न्यायिक प्रक्रिया, दर्जनों गवाहों के परीक्षण और फोरेंसिक रिपोर्टों के गहन मंथन के बाद अब यह बहुचर्चित मामला अपने अंतिम मुकाम पर पहुंच गया है। जिला जज की अदालत 30 सितंबर को यह तय करेगी कि अभियोजन पक्ष मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के विरुद्ध हत्या और षड्यंत्र के आरोपों को बिना किसी संदेह के विधिक रूप से साबित करने में कितना सफल रहा है।
यदि अदालत दोनों को दोषी करार देती है तो इसके उपरांत सजा की अवधि पर बहस होगी, वहीं साक्ष्यों के अभाव की स्थिति में विधिक प्रावधानों के अनुसार निर्णय दिया जाएगा। कानून की दृष्टि से अंतिम फैसला आने तक दोनों आरोपी हैं, और 30 सितंबर को न्यायालय द्वारा दिए जाने वाले अंतिम निर्णय से ही इस सनसनीखेज हत्याकांड का कानूनी पटाक्षेप होगा।
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