Tuesday Pooja Vidhi 29 September 2026: मंगलवार को ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि

29 सितंबर को हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और मंगलवार व्रत के जरूरी नियम जानें

0

Tuesday Pooja Vidhi 29 September 2026: सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी विशिष्ट देवी-देवता की उपासना के लिए निर्धारित है, जिसमें मंगलवार का दिन शक्ति, पराक्रम, निष्ठा और भक्ति के जीवंत प्रतीक पवनपुत्र भगवान हनुमान को पूर्णतः समर्पित माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के अनन्य सेवक बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा और स्मरण करने से साधक के जीवन के समस्त संकट, भय, मानसिक अवसाद और अज्ञात भय का समूल नाश हो जाता है। 29 सितंबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के दौरान मंगलवार का शुभ संयोग बन रहा है।

इस विशेष तिथि पर प्रातःकालीन या संध्याकालीन वेला में स्वच्छ मन और निष्ठापूर्वक की गई आराधना साधक को आंतरिक आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि कलयुग में हनुमान जी प्रत्यक्ष जाग्रत देव हैं, जो अपने भक्तों की पुकार अति शीघ्र सुनते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि 29 सितंबर 2026 को हनुमान जी की पूजा का सबसे शुभ समय क्या है, उनकी शास्त्रीय पूजन विधि क्या है और किन नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

Tuesday Pooja Vidhi 29 September 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और पंचांग गणना

धार्मिक पंचांग के अनुसार 29 सितंबर 2026 को प्रातःकाल सूर्योदय लगभग 06:13 बजे और संध्याकाल सूर्यास्त लगभग 06:09 बजे होगा। यद्यपि ईश्वर की भक्ति के लिए हृदय की शुद्धि और निष्कपट भाव ही प्रधान है, किंतु विशिष्ट अनुष्ठानों और संकल्पित साधनाओं के लिए शास्त्रों में शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व रेखांकित किया गया है।

इस दिन का सर्वार्थसिद्ध और अत्यंत प्रशस्त ‘अभिजीत मुहूर्त’ पूर्वाह्न 11 बजकर 47 मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक प्रभावी रहेगा। किसी भी नवीन संकल्प, सुंदरकांड के पाठ के आरंभ अथवा विशेष नैवेद्य अर्पण के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त, जो भक्त प्रातःकाल पूजा करना चाहते हैं, वे ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय के तुरंत बाद पूजा संपन्न कर सकते हैं। वहीं जो साधक दिनभर की व्यस्तता के कारण सुबह समय नहीं निकाल पाते, वे गोधूलि वेला यानी सूर्यास्त के समय भी मंदिर अथवा घर में चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित कर बजरंगबली की स्तुति कर सकते हैं।

मंगलवार को क्यों की जाती है बजरंगबली की विशेष आराधना?

पौराणिक धर्मग्रंथों में मंगलवार को मंगल ग्रह और भगवान हनुमान दोनों से संबद्ध माना गया है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जब किसी जातक की जन्मपत्रिका में मंगल ग्रह निर्बल अथवा दोषयुक्त होता है, तो उसके जीवन में रक्त विकार, क्रोध, भूमि संबंधी विवाद और साहस की कमी देखने को मिलती है। हनुमान जी की उपासना करने से मंगल दोष का शमन स्वतः हो जाता है।

इसके साथ ही, आध्यात्मिक धरातल पर हनुमान जी को सेवाभाव और अगाध निष्ठा की पराकाष्ठा माना जाता है। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में निस्वार्थ भाव से केवल प्रभु श्रीराम की आज्ञाओं का पालन किया और असंभव दिखने वाले कार्यों को भी सुगम बनाया। इसी कारण मंगलवार के दिन उनका ध्यान करने से व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन के संघर्षों, व्यावसायिक बाधाओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए अदम्य धैर्य और शक्ति प्राप्त होती है।

चरणबद्ध पूजन विधि: इस प्रकार करें घर पर सरल व प्रामाणिक पूजा

मंगलवार के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व शैया त्यागकर दैनिक नित्यकर्मों से निवृत्त हों और शुद्ध जल से स्नान करें। इस दिन लाल या पीले रंग के स्वच्छ व धुले हुए वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। तत्पश्चात अपने घर के ईशान कोण अथवा पूर्व दिशा में बने पूजा स्थल की भली-भांति सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें।

लकड़ी की एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान हनुमान तथा उनके हृदय में विराजमान प्रभु श्रीराम व माता सीता के चित्र या प्रतिमा को स्थापित करें। तांबे के पात्र में जल भरकर रखें और स्वयं कुशा या ऊन के शुद्ध आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। सबसे पहले हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और पुष्प लेकर आचमन करें तथा पूजा का मानसिक संकल्प लें।

इसके उपरांत शुद्ध घी अथवा चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती जलाएं। भगवान को रोली, चंदन, अक्षत और सिंदूर का तिलक लगाएं। हनुमान जी को लाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुड़हल या गुलाब के ताजे फूल और गेंदे की माला अत्यंत प्रिय हैं, अतः उन्हें श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। पूजा की शुरुआत में भगवान गणेश और प्रभु श्रीराम का स्मरण करना न भूलें, क्योंकि जहां श्रीराम का संकीर्तन होता है, वहां हनुमान जी स्वयं सूक्ष्म रूप से उपस्थित रहते हैं।

हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और सिद्ध मंत्र का जप

पूजन सामग्री अर्पित करने के पश्चात शांत और एकाग्र चित्त से श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। यदि समय उपलब्ध हो, तो श्रीरामचरितमानस के ‘सुंदरकांड’ का सस्वर पाठ करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। सुंदरकांड का पाठ करते समय शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और लयबद्ध होना चाहिए तथा मन में किसी प्रकार का सांसारिक विकार नहीं होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, हनुमान जी के परम प्रभावशाली द्वादशाक्षर मंत्र “ॐ हं हनुमते नमः” का रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला से कम से कम 108 बार (एक माला) जप करना चाहिए। जो साधक अपने जीवन में अत्यधिक मानसिक तनाव, अज्ञात भय अथवा शत्रुओं की बाधा से पीड़ित हैं, वे इस दिन ‘बजरंग बाण’ और ‘संकटमोचन हनुमानाष्टक’ का पाठ भी कर सकते हैं। यह मंत्र जप साधक के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आध्यात्मिक आभामंडल (Aura) का निर्माण करता है।

बजरंगबली का प्रिय भोग: क्या अर्पित करें और कैसे बांटें प्रसाद?

हनुमान जी को अत्यंत सात्विक और सहज सुलभ नैवेद्य प्रिय हैं। मंगलवार की पूजा में उन्हें भुने हुए देसी चने और शुद्ध गुड़ का भोग लगाना प्राचीन काल से अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अलावा बेसन के लड्डू, बूंदी, केसरिया पेड़ा अथवा लाल सेब और पके हुए केले अर्पित किए जा सकते हैं।

नैवेद्य अर्पित करते समय उसमें तुलसी दल अवश्य रखें, क्योंकि मान्यता है कि बिना तुलसी दल के हनुमान जी और उनके आराध्य श्रीराम भोग स्वीकार नहीं करते। पूजा संपन्न होने के उपरांत इस प्रसाद को सपरिवार ग्रहण करें और आस-पड़ोस के बच्चों व जरूरतमंदों में भी वितरित करें। किसी भी स्थिति में प्रसाद को बासी न होने दें और उसका सम्मान बनाए रखें।

मंगलवार व्रत और साधना के कड़े नियम: इन बातों से बरतें दूरी

मंगलवार का व्रत रखने वाले साधकों को कुछ अनिवार्य अनुशासनिक नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। इस दिन पूर्णतः सात्विक जीवनचर्या अपनाएं; तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन में केवल एक बार सायंकाल पूजा के उपरांत फलाहार या बिना नमक का मीठा भोजन (जैसे हलवा, खीर या दूध-फल) ग्रहण करना चाहिए। यदि स्वास्थ्य कारणों से नमक लेना आवश्यक हो, तो केवल सेंधा नमक का ही सीमित उपयोग करें।

मानसिक स्तर पर काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, कटु वचन और दूसरों की निंदा करने से पूरी तरह दूर रहें। किसी भी व्यक्ति के प्रति दुर्भावना न रखें और न ही किसी दुर्बल या बेजुबान जीव को कष्ट पहुंचाएं। घर में कलह-क्लेश का वातावरण न बनने दें। शारीरिक सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही निर्जला या कठोर व्रत का संकल्प लें; विशेष रूप से वृद्धजनों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को केवल मानसिक स्मरण और सात्विक आहार का ही पालन करना चाहिए।

Tuesday Pooja Vidhi 29 September 2026: पूजा की पूर्णता का आधार

सनातन धर्म में किसी भी पूजा और व्रत की पूर्णता दीन-दुखियों की सेवा और दान के बिना अधूरी मानी जाती है। मंगलवार के दिन पूजा संपन्न होने के पश्चात अपनी आर्थिक सामर्थ्य के अनुसार भूखे व्यक्तियों को भोजन कराएं, राहगीरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएं या किसी गौशाला में जाकर गायों को गुड़ और हरा चारा खिलाएं।

हनुमान जी स्वयं दीन-बंधु और सेवकों के रक्षक हैं, अतः समाज के वंचित और असहाय वर्ग की सहायता करने से वे अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को आडंबर या भय का माध्यम बनाने के बजाय उसे दया, करुणा, आत्मसंयम और सामाजिक सरोकार से जोड़ना ही सच्ची भक्ति का मूल तत्व है। 29 सितंबर 2026 को मंगलवार का यह शुभ दिन इन नैतिक मूल्यों को अपने अंतःकरण में उतारने का पावन अवसर है।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.