Sikkim tunnel tragedy: सिक्किम टनल हादसे में बंगाल के 6 मजदूरों की मौत, सरकार ने 5 लाख मुआवजा और नौकरी का किया ऐलान

Sikkim tunnel tragedy: सिक्किम टनल हादसे में बंगाल के 6 मजदूरों की मौत, मुआवजे का ऐलान

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Sikkim tunnel tragedy: पड़ोसी राज्य सिक्किम से आई एक बेहद दुखद खबर ने पश्चिम बंगाल के उत्तर बंगाल क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। सिक्किम के रंगपो इलाके में चल रहे एक बड़े जलविद्युत निर्माण प्रोजेक्ट के दौरान टनल धंसने से एक बड़ा हादसा हो गया। इस भीषण दुर्घटना में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के छह युवा श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों के घरों से लेकर पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है, क्योंकि रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकले ये लोग कभी वापस जिंदा नहीं लौट सके। घटना के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के स्तर पर राहत व मदद के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

Sikkim tunnel tragedy: विधानसभा में हुआ मुआवजे और सरकारी नौकरी का ऐलान

सिक्किम सुरंग हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों की सुध लेते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को विधानसभा के पटल पर एक बड़ी राहत की घोषणा की। सरकार की ओर से यह साफ किया गया कि इस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले जलपाईगुड़ी के सभी छह मजदूरों के निकट परिजनों को पांच-स्रुपये का वित्तीय मुआवजा दिया जाएगा।

इसके साथ ही, शोक संतप्त परिवारों के एक-एक सदस्य को सिविक वॉलेंटियर के पद पर नौकरी देने का भी आधिकारिक ऐलान किया गया है, ताकि इन परिवारों को आर्थिक मोर्चे पर कुछ संबल मिल सके। राज्य के प्रशासनिक तंत्र द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द यह सहायता राशि और नौकरी के दस्तावेज सौंपे जा सकें।

तीस्ता स्टेज-6 प्रोजेक्ट के दौरान कैसे हुआ खौफनाक मंजर

हादसा सिक्किम के रंगपो के पास तीस्ता नदी पर चल रही महत्वपूर्ण तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग के भीतर हुआ। जानकारी के मुताबिक, सुरंग के अंदर नियमित रूप से खुदाई और निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर तैनात थे। काम के इसी सिलसिले के दौरान अचानक भारी-भरकम चट्टान और मिट्टी का मलबा सुरंग के भीतर भरभरा कर नीचे आ गिरा।

मलबे का यह दायरा इतना बड़ा था कि वहां काम कर रहे कई श्रमिक संभलने का मौका तक नहीं पा सके और सीधे उस मलबे के नीचे दब गए। घटना की जानकारी मिलते ही परियोजना से जुड़े अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमों ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और युद्धस्तर पर बचाव अभियान चलाया।

Sikkim tunnel tragedy: जलपाईगुड़ी के इन गांवों के रहने वाले थे मृतक

सुरंग के मलबे से कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाले गए शवों की जब शिनाख्त की गई, तो पता चला कि ये सभी मजदूर जलपाईगुड़ी जिले के माल महकमे यानी माल सब-डिवीजन के अलग-अलग गांवों से ताल्लुक रखते थे। इनमें क्रैंटी, ओदालाबारी और डांगाझार गांव के निवासी शामिल थे।

ये सभी युवा अपने परिवारों का पेट पालने और बेहतर भविष्य का सपना लेकर अपने घरों से दूर सिक्किम कमाने के लिए गए थे। जब इन छह युवाओं के शव तिरपाल से ढकी हुई गाड़ियों में उनके पैतृक गांवों तक पहुंचे, तो वहां का दृश्य बेहद मर्मस्पर्शी था। परिजनों की चीख-पुकार से पूरा गांव गमगीन हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि उनके इलाके के अधिकांश युवा रोजी-रोटी की मजबूरी के चलते सिक्किम की इन सुरंगों और डैम परियोजनाओं में खतरनाक हालात के बीच काम करने जाने को विवश हैं।

Sikkim tunnel tragedy: प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता

इस हृदयविदारक हादसे की सूचना मिलते ही जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन और स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधि तुरंत हरकत में आ गए। प्रशासनिक अधिकारी सीधे मृतकों के घर पहुंचे और शोकसंतप्त परिवारों को ढांढस बंधाया।

पश्चिम बंगाल सरकार का शीर्ष प्रशासन लगातार सिक्किम के स्थानीय प्रशासन और प्रोजेक्ट के उच्च अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि सुरंग के भीतर अभी भी कुछ अन्य लोग फंसे हुए हैं, तो उनका तुरंत पता लगाया जा सके। इसके साथ ही, कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर सभी मृतकों के पार्थिव शरीर को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ उनके स्वजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इस पूरी दुर्घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में चल रहे बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मजदूरों की जान की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

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