shigellosis: पेट दर्द और दस्त को न समझें आम! केरल में फैले ‘शिगेलोसिस’ के हो सकते हैं संकेत, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Shigellosis: केरल में बढ़ रहे शिगेलोसिस के मामले, जानें लक्षण, खतरे और बचाव के जरूरी उपाय।

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Shigellosis: देश में बदलते मौसम और मानसून की दस्तक के बीच दक्षिण भारतीय राज्य केरल से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। केरल के कई हिस्सों में इन दिनों ‘शिगेलोसिस’ (Shigellosis) नाम की एक खतरनाक बीमारी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले केरल के कोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाड और अलप्पुझा जिलों में दर्ज किए गए हैं। इन इलाकों में संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य टीमें पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं।

चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आम तौर पर लोग पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याओं को मामूली मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर खुद से ही कोई दवा खा लेते हैं। लेकिन इस बदलते मौसम में ऐसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को लगातार पेट दर्द, ऐंठन या तेज दस्त की शिकायत हो रही है, तो यह साधारण फूड पॉइजनिंग नहीं बल्कि शिगेलोसिस संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और उचित सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

Shigellosis: क्या है शिगेलोसिस संक्रमण?

शिगेलोसिस वास्तव में एक तरह का गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन (जीवाणु संक्रमण) है। यह संक्रमण मुख्य रूप से ‘शिगेला’ (Shigella) नामक बैक्टीरिया की वजह से इंसानी शरीर में फैलता है। जब यह बैक्टीरिया किसी भी माध्यम से हमारे शरीर के भीतर प्रवेश करता है, तो यह सबसे पहले हमारी आंतों को अपना शिकार बनाता है। इस संक्रमण का आंतों पर सबसे ज्यादा और बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण आंतों में सूजन आ जाती है और वे सही तरीके से काम करना बंद कर देती हैं।

इस संक्रमण की वजह से मरीज को तीव्र दस्त लगने लगते हैं, जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘एक्यूट डायरिया’ (Acute Diarrhea) कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शिगेलोसिस मुख्य रूप से मनुष्यों से मनुष्यों में ही फैलता है। इसका मतलब यह है कि एक संक्रमित व्यक्ति बहुत ही आसानी से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को बीमार कर सकता है। हालांकि, इंसानों के अलावा इसके फैलने के और भी कई माध्यम हैं, जिन पर ध्यान देना और जिन्हें रोकना बेहद आवश्यक है।

शिगेलोसिस संक्रमण कैसे फैलता है? 

शिगेलोसिस संक्रमण के फैलने की मुख्य वजह दूषित पानी और दूषित भोजन का सेवन करना है। जब कोई व्यक्ति साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखता है, तो यह बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलता है। उदाहरण के लिए, अपने आसपास गंदगी रखना, खाना खाने से पहले या शौच जाने के बाद अच्छी तरह से हाथ न धोने की गंदी आदत के कारण लोग बहुत आसानी से इस खतरनाक बैक्टीरिया की चपेट में आ जाते हैं। दूषित पानी में मौजूद यह बैक्टीरिया खाने-पीने की चीजों के माध्यम से सीधे पेट में पहुंच जाता है।

इसके अलावा, यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे संपर्क के जरिए भी फैल सकता है। यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहते हैं या उसकी देखभाल करते समय आवश्यक सावधानी नहीं बरतते हैं, तो आपको भी यह बीमारी हो सकती है। स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, यह संक्रमण यौन संपर्क (Sexual Contact) के माध्यम से भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर हो सकता है। इसलिए इस बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और शारीरिक दूरी का ध्यान रखना अनिवार्य है।

शिगेलोसिस के मुख्य लक्षण क्या हैं?

शिगेलोसिस संक्रमण की चपेट में आने के बाद शरीर में कई तरह के बदलाव और लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इन लक्षणों को पहचानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस बीमारी के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • पेट में तेज दर्द और ऐंठन: संक्रमण की शुरुआत होते ही मरीज को पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और मरोड़ महसूस होने लगती है।
  • तेज बुखार: बैक्टीरिया के प्रभाव के कारण शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और मरीज को तेज बुखार आ जाता है।
  • उल्टी और जी मिचलाना: पेट खराब होने और आंतों में संक्रमण के कारण मरीज को बार-बार उल्टी होने लगती है, जिससे शरीर में कमजोरी आ जाती है।
  • गंभीर दस्त (डायरिया): मरीज को लगातार पतले दस्त होने लगते हैं। कुछ गंभीर मामलों में दस्त के साथ खून या मवाद भी आने लगता है।
  • बार-बार शौच की इच्छा होना: मरीज को ऐसा महसूस होता है कि उसका पेट साफ नहीं हुआ है और उसे बार-बार शौच के लिए जाना पड़ता है।

विशेष नोट: चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी मरीज में इन सभी लक्षणों का एक साथ कॉम्बिनेशन देखा जाता है, तो इस स्थिति को सामूहिक रूप से ‘बैसिलरी पेचिश’ (Bacillary Dysentery) कहा जाता है। यह स्थिति शरीर के लिए बेहद कष्टदायक और खतरनाक होती है, क्योंकि इसमें शरीर से पानी और जरूरी पोषक तत्व बहुत तेजी से बाहर निकल जाते हैं।

किन लोगों को है इस संक्रमण से सबसे ज्यादा खतरा?

यद्यपि शिगेलोसिस संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन कुछ विशेष वर्ग के लोगों को इससे सबसे ज्यादा खतरा होता है। छोटे बच्चे, जिनका इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पूरी तरह विकसित नहीं होता है, वे इस बैक्टीरिया का शिकार बहुत जल्दी बनते हैं। इसके अलावा, बुजुर्गों और पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को भी यह संक्रमण बहुत जल्दी प्रभावित करता है। जिन क्षेत्रों में साफ पानी की कमी होती है और लोग घनी बस्तियों में रहते हैं, वहां इस बीमारी के फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

शिगेलोसिस से बचाव के अचूक तरीके 

स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों का कहना है कि शिगेलोसिस एक रोकने योग्य बीमारी है। इससे बचने के लिए हमें अपनी कुछ रोजमर्रा की खराब आदतों को बदलना होगा और स्वच्छता के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। इस संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं:

  1. 20 सेकंड तक हाथ धोएं: खाना बनाने से पहले, खाना खाने से पहले और खाना परोसने के बाद अपने हाथों को साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह रगड़कर धोएं।
  2. शौच के बाद स्वच्छता: शौच का उपयोग करने के बाद और छोटे बच्चों का डायपर बदलने के तुरंत बाद हाथों को अच्छी तरह से साफ करना न भूलें। बच्चों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  3. पानी उबालकर पिएं: इस मौसम में पानी की क्वालिटी का खास ध्यान रखना जरूरी है। पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमेशा पानी को अच्छी तरह उबालकर और ठंडा करके ही सेवन करें।
  4. फल और सब्जियों को धोएं: बाजार से लाए गए ताजे फलों और सब्जियों के सेवन या इस्तेमाल से पहले उन्हें बहते हुए साफ पानी में अच्छी तरह से धोना बेहद जरूरी है।
  5. संक्रमित व्यक्ति की देखभाल में सावधानी: अगर आपके घर में कोई व्यक्ति इस संक्रमण से ग्रसित है और आप उसकी देखभाल कर रहे हैं, तो अपनी व्यक्तिगत सफाई का सबसे ज्यादा ध्यान रखें। मरीज के बर्तन और कपड़े अलग रखें।

Shigellosis: स्वास्थ्य विभाग की अपील और सतर्कता

केरल के प्रभावित जिलों (कोझिकोड, मलप्पुरम, वायनाड और अलप्पुझा) में स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से पैनिक न होने बल्कि सतर्क रहने की अपील की है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पानी के स्रोतों की क्लोरिनेशन प्रक्रिया को तेज करें ताकि बैक्टीरिया को खत्म किया जा सके। जनता को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि जागरूकता और थोड़ी सी सावधानी बरतकर इस बैक्टीरियल इन्फेक्शन को फैलने से पूरी तरह रोका जा सकता है। यदि आपके आसपास किसी में भी इसके लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें और चिकित्सकीय परामर्श लें।

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