Shaan Interview: शान का बड़ा खुलासा, अरिजीत सिंह की तरह प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का बना लिया था मन; सोनू निगम और केके की सलाह ने बदला करियर

सोनू निगम और केके की सलाह से शान ने बदली काम करने की रणनीति, चुना सिलेक्टिव रास्ता

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Shaan Interview: बॉलीवुड संगीत जगत के सबसे लोकप्रिय, शालीन और बहुमुखी पार्श्वगायकों में शुमार शान (Shaan) ने हाल ही में अपने करियर और संगीत उद्योग के आंतरिक दबावों को लेकर एक बेहद रोचक और चौंकाने वाला संस्मरण साझा किया है। एक विस्तृत साक्षात्कार में खुलकर बात करते हुए शान ने खुलासा किया कि अपने करियर के चरम दौर में वे भी बिल्कुल अरिजीत सिंह (Arijit Singh) की तरह ही फिल्म उद्योग में प्लेबैक सिंगिंग को पूरी तरह अलविदा कहने का मन बना चुके थे।
शान के अनुसार, उस दौर में अंधाधुंध काम के बोझ, मानसिक थकान और सामाजिक कार्यों के लिए समय न निकाल पाने की छटपटाहट ने उन्हें इस मुकाम पर ला खड़ा किया था। हालांकि, उस नाजुक मोड़ पर उनके समकालीन और घनिष्ठ मित्र सोनू निगम (Sonu Nigam) और दिवंगत महान गायक केके (KK) ने उन्हें एक ऐसी व्यावहारिक व पेशेवर सलाह दी, जिसने उनके संगीत के प्रति दृष्टिकोण और काम करने की शैली को पूरी तरह बदलकर रख दिया।

Shaan Interview: करियर के शिखर पर जब काम के भारी बोझ से पैदा हुई असमंजस की स्थिति

शान ने अपने जीवन के उस व्यस्ततम दौर को याद करते हुए बताया कि जब वे लगभग 33 से 34 वर्ष के थे, तब उन्होंने हिंदी सिनेमा में लगभग हर प्रमुख अभिनेता के लिए गीत गा लिए थे। फिल्मफेयर, आईफा जैसे देश के तमाम प्रतिष्ठित संगीत पुरस्कार उनकी झोली में आ चुके थे और वे सफलता के शीर्ष पर विराजमान थे।
लेकिन इसी अपार सफलता के साथ उनके जीवन में काम का एक ऐसा अनियंत्रित सिलसिला शुरू हुआ जिसने उनकी निजी जिंदगी और प्राथमिकताओं को अस्त-व्यस्त कर दिया था। शान ने बताया कि उस समय वे सुबह जल्दी घर से निकलते थे और दिन भर में ए-ग्रेड, बी-ग्रेड तथा सी-ग्रेड स्तर की सभी किस्मों की फिल्मों के लिए बिना रुके रिकॉर्डिंग करते रहते थे। देर शाम जब वे थककर घर लौटते और उनकी पत्नी राधिका उनसे पूछतीं कि आज उन्होंने कौन सा गाना गाया, तो अत्यधिक काम के चलते उन्हें गीत के बोल और फिल्म का नाम तक याद नहीं रहता था। इससे घर में हास्यास्पद और असहज स्थितियां पैदा होने लगी थीं।

सामाजिक दायित्वों की अनदेखी और अरिजीत सिंह के फैसले से तुलना

शान ने बताया कि वे हमेशा से केवल एक गायक तक सीमित न रहकर समाज के लिए भी सक्रिय योगदान देना चाहते थे। वे पर्यावरण, बाल शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़ना चाहते थे, किंतु स्टूडियोज के व्यस्ततम शेड्यूल और निरंतर बैक-टू-बैक रिकॉर्डिंग्स के कारण उन्हें सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिलती थी। लगातार एक काम के बाद दूसरा प्रोजेक्ट आने से वे अंदर से खालीपन और भारी थकान महसूस करने लगे थे, जिसके चलते उन्होंने गंभीरता से प्लेबैक गायकी से संन्यास लेने का विचार कर लिया था।
इस संदर्भ को अरिजीत सिंह के हालिया निर्णय से जोड़ते हुए शान ने कहा कि अरिजीत सिंह ने अपने करियर के शीर्ष पर पहुंचने के बाद बहुत सोच-समझकर और चुनिंदा काम करने का रास्ता चुना है। शान का मानना है कि अरिजीत संगीत को अत्यंत गहराई और गंभीरता से लेते हैं। जब किसी कलाकार को लगने लगता है कि काम की अधिकता उसकी कलात्मक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत शांति पर हावी हो रही है, तो वह पीछे हटने का साहसिक फैसला करता है। शान ने कहा कि उनके दौर में वे हर किसी को ‘हां’ कह देते थे, जबकि अरिजीत ने काम का दायरा नियंत्रित रखकर अपनी सीमाओं को पहले ही स्पष्ट कर लिया।

सोनू निगम और स्वर्गीय केके की वह अमूल्य सलाह जिसने दी नई दिशा

जब शान की इस मानसिक उलझन और हर प्रोजेक्ट स्वीकार करने की आदत के बारे में उनके समकालीन दिग्गज गायकों सोनू निगम और केके को पता चला, तो उन्होंने शान को बैठाकर गंभीरता से समझाया। दोनों दिग्गज कलाकारों ने शान से दो-टूक कहा कि एक कलाकार के रूप में उन्हें अपना एक निश्चित स्तर और मानक (स्टैंडर्ड) स्थापित करना चाहिए और हर किसी के लिए बिना सोचे-समझे गाने से परहेज करना चाहिए।
शान ने इस बातचीत का ब्योरा देते हुए बताया कि जब सोनू और केके उन्हें सिलेक्टिव होने को कहते थे, तो वे बड़ी मासूमियत से जवाब देते थे कि यदि कोई निर्माता या संगीत निर्देशक पूरे सम्मान और प्यार से उनके पास आता है, तो वे उसका दिल कैसे तोड़ सकते हैं। चूंकि शान के पिता स्वर्गीय मानस मुखर्जी भी संगीत उद्योग के प्रतिष्ठित संगीतकार रहे थे, इसलिए पुराने पारिवारिक संबंधों और पिता के पुराने साथियों व उनके बच्चों के भावनात्मक अनुरोध को ठुकराना शान के स्वभाव में नहीं था। वे हर किसी के लिए गाते रहे और लोगों की दुआएं व आशीर्वाद बटोरते रहे। हालांकि आज शान स्वीकार करते हैं कि यदि उन्होंने उस समय अपने मित्रों की सलाह मानकर चुनिंदा काम किया होता, तो शायद उनके करियर का ग्राफ और भी अलग ऊंचाइयों पर होता।

अरिजीत सिंह के प्लेबैक छोड़ने पर शान का सटीक नजरिया

अरिजीत सिंह द्वारा प्लेबैक सिंगिंग से दूरी बनाने की खबरों पर अपने विचार रखते हुए शान ने एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान आकर्षित किया। शान ने कहा कि अरिजीत ने संगीत से संन्यास नहीं लिया है, बल्कि वे स्वतंत्र संगीत और लाइव कॉन्सर्ट्स में निरंतर सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त अरिजीत द्वारा पहले से रिकॉर्ड किए गए कई बड़े ट्रैक अभी रिलीज होने बाकी हैं, जो अगले दो वर्षों तक विभिन्न फिल्मों में दर्शकों को सुनाई देते रहेंगे।
शान ने स्पष्ट किया कि कला और संगीत के क्षेत्र में कोई भी निर्णय ‘पत्थर की लकीर’ नहीं होता है। समय, मानसिक स्थिति और अच्छे प्रोजेक्ट्स मिलने पर कलाकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं। अरिजीत एक असाधारण और तीव्र प्रतिभाशाली कलाकार हैं, और जब भी उन्हें कोई ऐसा प्रोजेक्ट मिलेगा जो उनकी आत्मा को छुएगा, वे निश्चित रूप से अपनी जादुई आवाज से दोबारा दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।

‘ऊपरवाले ने खुद ही काम कम कर दिया’: शान का सकारात्मक दृष्टिकोण

साक्षात्कार के दौरान शान ने अपने चिरपरिचित हंसमुख अंदाज में कहा कि शायद उस समय उनके मन की बात सीधे ईश्वर तक पहुंच गई थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि ऐसा लगा मानो ऊपरवाले ने कहा हो कि तुम्हें खुद प्लेबैक गायकी छोड़ने की जहमत उठाने की आवश्यकता नहीं है, हम ही धीरे-धीरे तुम्हारे पास आने वाले काम को कम कर देते हैं। इसके बाद के वर्षों में इंडस्ट्री का संगीत परिदृश्य बदला और उनके पास आने वाले गानों की संख्या स्वाभाविक रूप से संतुलित हो गई।
आज शान अपनी शर्तों पर काम कर रहे हैं और केवल वही प्रोजेक्ट्स चुनते हैं जो उन्हें रचनात्मक संतुष्टि देते हैं। नब्बे के दशक के उत्तरार्ध और दो हजार के दशक में ‘चांद सिफारिश’, ‘तन्हा दिल’, ‘मुस्कुराने की वजह’, ‘आओ मिलो चलें’ और ‘जब से तेरे नैना’ जैसे अनगिनत सदाबहार नगमे देने वाले शान आज स्वतंत्र एल्बमों, वैश्विक लाइव टूर्स और युवा प्रतिभाओं को मंच देने में अपना अधिकांश समय बिता रहे हैं।

Shaan Interview: बदलते संगीत परिदृश्य और युवा कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण सीख

शान का यह संस्मरण भारतीय संगीत उद्योग की उस कड़वी हकीकत को भी उजागर करता है जहां सफलता मिलने के बाद कलाकारों पर लगातार काम करने और प्रासंगिक बने रहने का भारी दबाव होता है। वर्तमान डिजिटल युग में जहां हर सप्ताह नए गायक और संगीत शैलियां उभर रही हैं, वहां कलाकारों के लिए व्यावसायिक व्यस्तता और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन साधना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
शान, सोनू निगम और केके जैसे लीजेंड्स की यात्रा यह स्पष्ट संदेश देती है कि संख्या की तुलना में गुणवत्ता और अपने कलात्मक मानक को बनाए रखना ही किसी भी गायक को लंबे समय तक अमर बनाता है। शान का यह अनुभव नवोदित संगीतकारों और गायकों के लिए एक मूल्यवान सबक है कि जीवन में कब ‘ना’ कहना है, यह जानना भी सफलता का एक अनिवार्य हिस्सा है। शान आज भी भारतीय संगीत की दुनिया में एक प्रतिष्ठित स्तंभ बने हुए हैं और उनकी ऊर्जा व सकारात्मकता नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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