Haryana Roadways Strike: हरियाणा रोडवेज का आर-पार का ऐलान, 5 और 6 सितंबर को दो दिवसीय चक्का जाम से ठप रहेगा बसों का आवागमन

Haryana Roadways Strike: हरियाणा रोडवेज का आर-पार का ऐलान, 5 और 6 सितंबर को दो दिवसीय चक्का जाम से ठप रहेगा बसों का आवागमन

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Haryana Roadways Strike: हरियाणा में रोजाना सफर करने वाले लाखों आम यात्रियों के लिए एक बड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। राज्यभर में रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ एक बार फिर से मोर्चा खोल दिया है। विभिन्न यूनियनों के साझा मंच पर हुए कड़े फैसलों के बाद अब हरियाणा रोडवेज की तरफ से आगामी 5 और 6 सितंबर को दो दिवसीय पूर्ण चक्का जाम करने का बड़ा ऐलान किया गया है। इस दौरान प्रदेश भर में रोडवेज की हजारों बसें पहिए थाम लेंगी, जिससे आम आदमी को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। क्या आपने कभी सोचा है कि अचानक परिवहन सेवाएं ठप हो जाने से आम कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों की जिंदगी किस तरह एक पल में थम जाती है?
यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में सिरसा डिपो के अंतर्गत आने वाले नाथूसरी चौपटा बस स्टैंड पर आयोजित रोडवेज यूनियनों की एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद सामने आया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्यभर से कुल तेरह प्रमुख यूनियनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया और सरकार के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि यदि समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। चक्का जाम के इस बड़े कदम से पहले सरकार को चेतावनी देने के लिए 26 अगस्त को सभी डिपो पर जोरदार सांकेतिक प्रदर्शन करने की भी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

Haryana Roadways Strike: चौपटा में बनी रणनीति, 26 अगस्त को सभी डिपो पर होगा सांकेतिक प्रदर्शन

नाथूसरी चौपटा में हुई इस साझा बैठक के दौरान यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि रोडवेज कर्मचारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर अधिकारियों और शासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इसी बात से खफा होकर कर्मचारियों ने कड़ा कदम उठाने का मन बनाया है। आगामी 26 अगस्त को सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक प्रदेश के सभी रोडवेज डिपो पर जोरदार सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान सभी डिपो के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करने के बाद कर्मचारी संघ की ओर से संबंधित महाप्रबंधकों को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा जाएगा।
जानकारों का मानना है कि यदि 26 अगस्त के इस सांकेतिक प्रदर्शन के बाद भी परिवहन विभाग या शासन स्तर पर कोई सकारात्मक वार्ता नहीं होती है, तो सितंबर के पहले सप्ताह में होने वाला दो दिवसीय चक्का जाम तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार होकर रहेगा। इस स्थिति में राज्य के भीतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का पूरी तरह से चरमराना तय माना जा रहा है। त्योहारों और कामकाजी दिनों के बीच इस तरह के कड़े फैसलों से आम जनता की मुश्किलें बढ़ना लाजिमी है, और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस संकट को टालने के लिए कोई समय रहते पहल करता है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें और लंबे समय से चल रहा गतिरोध

रोडवेज यूनियनों की सूची में कई ऐसी मांगें शामिल हैं जो पिछले कई वर्षों से फाइलों में धूल फांक रही हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में परिचालक के पद का पे ग्रेड बढ़ाने और लिपिक वर्ग की तर्ज पर तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धियां प्रदान करने की बात प्रमुखता से रखी गई है। इसके अलावा, राज्यभर में चालकों और परिचालकों के लंबे समय से खाली पड़े हजारों पदों पर नई और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि तय समय सीमा के भीतर पदोन्नति की एक स्पष्ट और स्थाई नीति बनाई जानी चाहिए ताकि लंबे समय से एक ही पद पर काम कर रहे कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
यूनियन के प्रतिनिधियों ने यह भी मांग उठाई है कि चालकों को भारी वाहनों के लिहाज से उचित पे ग्रेड दिया जाए और स्टैंड इंचार्ज का एक अलग से नया पद सृजित करके योग्य चालकों को पदोन्नति का लाभ दिया जाए। साथ ही, वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया को पूरी निष्ठा से पूरा करने वाले चालकों को उनकी वास्तविक नियुक्ति तिथि से ही पक्का किया जाए। पूर्व की भांति चालक, परिचालक, उप निरीक्षक, निरीक्षक और कार्यशाला के अन्य कर्मचारियों को दो अर्जित अवकाश दिए जाने की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई जा रही है।

Haryana Roadways Strike: कच्चे कर्मचारियों के स्थायीकरण और कार्यशाला की समस्याएं

इस आंदोलन के दायरे में केवल नियमित कर्मचारी ही नहीं, बल्कि विभिन्न योजनाओं के तहत काम करने वाले अनुबंध और कच्चे कर्मचारी भी शामिल हैं। कार्यशालाओं में वर्ष 2018 के दौरान भर्ती हुए तकनीकी कर्मचारियों को उनके पदों के अनुसार उचित पदोन्नति देने और सभी कर्मचारियों को पूर्व की तरह कैडर होल्ड प्रदान करने की मांग की गई है। इसके अलावा, हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से सेवाएं दे रहे परिचालकों और हेल्पर्स के साथ-साथ दादरी डिपो के पार्ट-टू के तहत कार्यरत बानवे हेल्पर्स को तुरंत प्रभाव से पक्का करने की पुरजोर मांग उठाई गई है।
यह गतिरोध आने वाले दिनों में और गहरा सकता है क्योंकि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। आम यात्रियों के लिए सितंबर के शुरुआती दिन काफी कठिनाई भरे साबित हो सकते हैं क्योंकि बसों के पहिए थमने से निजी वाहनों और ट्रेनों पर अचानक भारी दबाव बढ़ जाएगा। मामले की आगे की प्रशासनिक प्रतिक्रिया और बैठकों के दौर से जुड़ी ताजा जानकारियां अभी आनी बाकी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और रोडवेज यूनियनों के बीच इस आर-पार की लड़ाई को रोकने के लिए कोई बीच का रास्ता निकलता है या नहीं।

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