Janmashtami Dwarkadhish Travel Guide: कृष्ण जन्माष्टमी पर द्वारकाधीश के करें दर्शन, जानिए दिल्ली से कैसे पहुंचे और क्या है पूरा ट्रैवल गाइड

Janmashtami Dwarkadhish Travel Guide: कृष्ण जन्माष्टमी पर द्वारकाधीश के करें दर्शन, जानिए दिल्ली से कैसे पहुंचे और क्या है पूरा ट्रैवल गाइड

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Janmashtami Dwarkadhish Travel Guide: इस साल कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व चार सितंबर को मनाया जाने वाला है। ऐसे में यदि आप हर बार की तरह इस बार भी मथुरा या वृंदावन जाने का विचार कर रही थीं, तो अपनी इस यात्रा को थोड़ा सा अलग मोड़ देते हुए गुजरात के ऐतिहासिक शहर द्वारका का रुख कर सकती हैं। यहां भगवान कृष्ण के भव्य मंदिर में दर्शन करने के अलावा भी देखने और अनुभव करने के लिए बहुत कुछ खास मौजूद है। क्या आपने कभी सोचा है कि जिस द्वारका नगरी को भगवान श्री कृष्ण ने अपनी कर्मभूमि बनाया था, वहां जन्माष्टमी की रात उत्सव का माहौल कितना अलौकिक होता होगा?
गुजरात का यह तटीय शहर अपनी धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। जब आप यहां पहुंचती हैं, तो यहां की हवाओं में ही एक अलग किस्म की दिव्यता महसूस होने लगती है। दिल्ली से दो से तीन दिन का ट्रिप प्लान करके आप न केवल इस पर्व का हिस्सा बन सकती हैं, बल्कि अरब सागर के किनारे स्थित इस खूबसूरत शहर के सौंदर्य का भी पूरा आनंद उठा सकती हैं। गुजरात टूरिज्म के आंकड़ों के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे शहर की रौनक देखने लायक होती है।

Janmashtami Dwarkadhish Travel Guide: भव्य द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन और उसकी पौराणिक महिमा

द्वारका पहुंचते ही सबसे पहले होटल में चेक-इन करें और थोड़ा फ्रेश होने के बाद सीधे द्वारकाधीश मंदिर की तरफ रुख करें। इस प्रसिद्ध मंदिर को जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, जिसके बारे में यह मान्यता है कि इसकी मूल स्थापना भगवान कृष्ण के पोते वज्रनाभ ने की थी। मंदिर एक ऊंची जगह पर स्थित है और मुख्य प्रांगण तक पहुंचने के लिए आपको लगभग पचास से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। आमतौर पर मंदिर के दर्शन का समय सुबह सात बजे से दोपहर बारह-साढ़े बारह बजे तक और शाम को पांच बजे से रात नौ बजे तक निर्धारित रहता है। हालांकि, जन्माष्टमी के खास मौके पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन के समय में कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं।
मंदिर की भव्य वास्तुकला, उसकी दीवारों पर की गई अद्भुत नक्काशी और उसका ऊंचा शिखर हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। मुख्य मंदिर के दर्शन के अलावा आप परिसर के आसपास बने अन्य छोटे मंदिरों को भी देख सकती हैं। मंदिर के ठीक पास बहने वाली गोमती क्रीक और उसके ऊपर बना सुदामा सेतु इस जगह की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। अरब सागर की लहरों के करीब स्थित होने के कारण यहां से शाम के समय डूबते सूर्य का नजारा देखना एक बेहद सुकून भरा अनुभव होता है।

दिल्ली से द्वारका पहुंचने के आसान और सुविधाजनक रास्ते

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से द्वारका गुजरात की दूरी काफी अधिक है, इसलिए अपनी यात्रा को सुगम बनाने के लिए सही रूट और साधन का चुनाव करना बेहद जरूरी है। बजट और समय के हिसाब से आप अपनी सुविधा के अनुसार ट्रेन, फ्लाइट या सड़क मार्ग का विकल्प चुन सकती हैं। दिल्ली से द्वारका की कुल दूरी ट्रेन मार्ग से लगभग तेरह सौ पच्चीस से तेरह सौ पैंतीस किलोमीटर के आसपास है, जिसमें करीब तेरह से चौबीस घंटे का समय लग जाता है। ट्रेन का सफर उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बजट में रहकर यात्रा करना पसंद करते हैं।
अगर आप कम समय में पहुंचना चाहती हैं, तो फ्लाइट का विकल्प चुन सकती हैं, हालांकि द्वारका का अपना सीधा एयरपोर्ट नहीं है। इसके सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पोरबंदर और जामनगर हैं, जो लगभग एक सौ छत्तीस और एक सौ पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप आसानी से बस या कैब किराए पर लेकर द्वारका पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, जो लोग एडवेंचर और लंबी ड्राइव के शौकीन हैं, वे सड़क मार्ग से रोड ट्रिप भी प्लान कर सकती हैं, हालांकि यह थोड़ा थकान भरा हो सकता है क्योंकि सड़क मार्ग से दूरी चौदह सौ पचास किलोमीटर से ज्यादा है।

द्वारका के आसपास छिपे अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल और बीच

द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करने के बाद आपकी यात्रा यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि इसके आसपास कई ऐसी जगहें हैं जो देखने लायक हैं। आप मंदिर दर्शन के बाद बेट द्वारका जा सकती हैं, जो समुद्र के बीचोंबीच स्थित एक खूबसूरत आइलैंड है और इसे भगवान कृष्ण का मुख्य निवास स्थान माना जाता है। यहां हनुमान, विष्णु, शिव और लक्ष्मी नारायण समेत कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि बेट द्वारका जाने का प्लान बनाते समय शाम का समय न चुनें क्योंकि वहां जाने वाली नावों का समय निश्चित होता है।
इसके अलावा, आप भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रतिष्ठित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी कर सकती हैं। इस मंदिर के पास ही गोपी तालाब तीर्थ भी मौजूद है, जिसकी पौराणिक कथाएं कृष्ण और गोपियों से जुड़ी हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए बारहवीं शताब्दी का रुक्मिणी देवी मंदिर भी एक खास आकर्षण है, जिसकी बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं की बेहद सुंदर आकृतियां उकेरी गई हैं। यदि आप धार्मिक स्थलों के साथ थोड़ा रोमांच भी चाहती हैं, तो द्वारका से करीब बारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित शिवराजपुर बीच जरूर जाएं। इस नीले पानी वाले बीच पर आप स्नॉर्कलिंग, स्कूबा डाइविंग और बनाना राइड जैसी कई एडवेंचर एक्टिविटी का भरपूर आनंद उठा सकती हैं।

Janmashtami Dwarkadhish Travel Guide: दो दिनों का परफेक्ट ट्रैवल प्लान और खानपान का जायजा

यदि आप दो दिनों के छोटे अवकाश में द्वारका ट्रिप पूरी करना चाहती हैं, तो अपनी कार्ययोजना को थोड़ा दुरुस्त रखना होगा। पहले दिन होटल में आराम करने के बाद द्वारकाधीश मंदिर, सुदामा सेतु और गोमती घाट के आसपास का समय बिताएं। दूसरे दिन की शुरुआत रुक्मिणी देवी मंदिर और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ करें, और दोपहर के समय बेट द्वारका या शिवराजपुर बीच का रुख करें। जन्माष्टमी की भीड़भाड़ से बचने के लिए अपने होटल की बुकिंग बहुत पहले ही करवा लें।
खाने-पीने के मामले में यह शहर पर्यटकों को निराश नहीं करता है। यहां आप पारंपरिक गुजराती थाली, खमण, फाफड़ा और जलेबी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चख सकती हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यहां के भोजनालयों में विशेष फलाहारी व्यंजन आसानी से मिल जाते हैं। अपनी इस धार्मिक और सांस्कृतिक यात्रा के दौरान स्थानीय नियमों का पालन करें और गर्मी व उमस को देखते हुए पर्याप्त पानी अपने साथ रखें। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस बार जन्माष्‍टमी पर यहां किस तरह के भव्य इंतजाम किए जाते हैं।

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