US Ambassador Sergio Gor: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा दावा, G7 में मोदी-ट्रंप मुलाकात के दौरान भारत नहीं चाहता था सवाल-जवाब; ट्रंप ने अचानक 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी

भारत ने प्रेस सवालों से बचने की मांग की थी, ट्रंप ने अचानक 45 मिनट तक जवाब दिए

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US Ambassador Sergio Gor: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में आयोजित द्विपक्षीय बैठक को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला राजनयिक खुलासा किया है। नई दिल्ली में आयोजित The Economic Times World Leaders Forum के मंच को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने बताया कि फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में जी7 शिखर सम्मेलन की द्विपक्षीय वार्ता से पहले भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट अनुरोध किया था कि मीडिया को केवल शुरुआती तस्वीरों और बयानों के लिए बुलाया जाए, लेकिन कोई सवाल-जवाब का सत्र (No Press Questions) न रखा जाए।
राजदूत के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने शुरुआत में इस अनुरोध पर अपनी सहमति दे दी थी। हालांकि, दोनों नेताओं के शुरुआती संबोधन समाप्त होते ही ट्रंप ने अचानक उपस्थित लगभग 50 कैमरों और पत्रकारों की ओर देखकर पूछ लिया—”क्या कोई सवाल है?”। इस एक अनपेक्षित वाक्य ने पूरी बैठक के प्रारूप को बदल दिया और वह निर्धारित संक्षिप्त फोटो-ऑप के बजाय 45 मिनट लंबी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस में तब्दील हो गई।

US Ambassador Sergio Gor: स्टेज के पीछे हुई गोपनीय बातचीत, MEA की एकमात्र मांग और ट्रंप की सहमति

इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उस दिन मंच के पीछे (Behind the Scenes) घटी पूरी घटना का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि बैठक शुरू होने से कुछ देर पहले वे और राष्ट्रपति ट्रंप बैकस्टेज अकेले मौजूद थे। उस दौरान ट्रंप ने उनसे पूछा कि भारतीय पक्ष किन-किन विषयों को उठाने वाला है और क्या भारत की तरफ से कोई विशेष मांग या शर्त है।
गोर ने कहा, “मैंने राष्ट्रपति को बताया कि विदेश मंत्रालय की केवल एक ही प्रमुख मांग थी। वह यह थी कि मीडिया कर्मियों और कैमरों को कमरे में प्रवेश की अनुमति दी जाए, लेकिन कोई खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस न आयोजित की जाए। मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय पक्ष सवाल-जवाब पसंद नहीं करता है। इस पर ट्रंप ने तत्काल हामी भरते हुए कहा—बिल्कुल, कोई समस्या नहीं है।”

50 कैमरों के सामने एक सवाल से बदला पूरा माहौल: 45 मिनट तक चला खुला सत्र

निर्धारित योजना के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कमरे में एक-दूसरे के सामने बैठे। कमरे में अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लगभग 50 वीडियो कैमरे और दर्जनों पत्रकार उपस्थित थे। दोनों नेताओं ने कुछ मिनटों तक अपना प्रारंभिक वक्तव्य दिया।
राजदूत गोर ने बताया, “जैसे ही दोनों नेताओं का संक्षिप्त वक्तव्य समाप्त हुआ, राष्ट्रपति ट्रंप ने सीधे कैमरों की ओर देखा और पत्रकारों से पूछा, ‘Any questions?’ (कोई सवाल?)। उनके इस एक कदम ने पूरे कमरे का वातावरण खोल दिया। इसके बाद जो हुआ, वह 45 मिनट लंबी एक खुली प्रेस वार्ता थी जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, वैश्विक सुरक्षा और पश्चिम एशिया के संवेदनशील हालातों पर खुलकर चर्चा हुई।”

जी7 की बैठक में उठाए गए थे होर्मुज जलडमरूमध्य और सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दे

17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक दोनों वैश्विक नेताओं के बीच 16 महीनों के अंतराल के बाद पहली प्रत्यक्ष आमने-सामने की मुलाकात थी। यह बैठक उस समय हुई थी जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए अमेरिकी नौसैनिक हमले में तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक में संघर्ष क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था और कहा था कि उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने नाविकों के जोखिम को स्वाभाविक बताते हुए समुद्री व्यापार को एक कठिन पेशा करार दिया था। बैठक के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मजबूत दोस्ती पर जोर देते हुए यह भी कहा था कि यदि भारत पर किसी भी देश द्वारा हमला होता है, तो अमेरिका हमेशा भारत के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

राजनयिक हलकों में चर्चा और दोनों नेताओं की कार्यशैली का अंतर

सर्जियो गोर के इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में प्रोटोकॉल और नेताओं की व्यक्तिगत कार्यशैली के अंतर को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है। सामान्य तौर पर भारतीय प्रधानमंत्री की कार्यशैली संरचित, पहले से तय प्रारूप और गंभीर कूटनीतिक बयानों को प्राथमिकता देने वाली रही है। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप अपनी अप्रत्याशित, अनस्क्रिप्टेड और मीडिया के सीधे सवालों का तत्काल जवाब देने की आक्रामक शैली के लिए जाने जाते हैं।
जब दो अलग-अलग कार्यशैलियां एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर आमने-सामने आती हैं, तो ऐसे क्षण कूटनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील और रोचक बन जाते हैं। हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय या सरकार की ओर से राजदूत सर्जियो गोर के इस व्यक्तिगत संस्मरण और दावे पर अब तक कोई आधिकारिक खंडन या टिप्पणी जारी नहीं की गई है।

US Ambassador Sergio Gor: भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती और रणनीतिक भविष्य

फोरम के दौरान अमेरिकी राजदूत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस प्रकार की अप्रत्याशित घटनाओं के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आपसी विश्वास और व्यक्तिगत मित्रता बेहद गहरी बनी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ट्रंप चार वर्षों तक सत्ता से बाहर थे, तब भी भारत और प्रधानमंत्री मोदी ने उनके प्रति सम्मानजनक रुख बनाए रखा था, जिसे ट्रंप हमेशा याद रखते हैं।
गोर ने स्पष्ट किया कि जैसे एक परिवार के भीतर कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, वैसे ही दो बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्रों के बीच भी कुछ बिंदुओं पर अलग राय हो सकती है, किंतु रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, नासा-इसरो का चंद्र मिशन और द्विपक्षीय व्यापार के मोर्चे पर भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत और अटूट बनी हुई है।

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