Sugar Prices India: चीनी की कीमतों में अचानक उछाल पर केंद्र सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, रेड रॉट और अल नीनो को बताया मुख्य वजह; इथेनॉल नीति के आरोप खारिज

रेड रॉट और अल नीनो से उत्पादन प्रभावित, सरकार ने इथेनॉल नीति को बताया बेबुनियाद

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Sugar Prices India: देशभर के खुदरा बाजारों में त्योहारी सीजन के दस्तक देते ही दैनिक उपभोग की सबसे आवश्यक वस्तु चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करने वाली इस मूल्य वृद्धि ने खुदरा और थोक दोनों बाजारों में हलचल तेज कर दी है। देश के प्रमुख महानगरों और कस्बों में खुली चीनी के दाम 55 रुपये से लेकर 65 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच चुके हैं। पिछले एक महीने के भीतर खुदरा बाजार में चीनी की औसत कीमतों में लगभग सात रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई है। इस अचानक आई महंगाई को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं, जिसके बाद खाद्य मंत्रालय और केंद्रीय नेतृत्व ने स्थिति की वास्तविकता सामने रखी है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और घरेलू जरूरत से अधिक सरप्लस भंडार मौजूद है। सरकार ने कीमतों में आई इस तेजी के पीछे गन्ने की फसल में लगी फंगल बीमारी ‘रेड रॉट’ और वैश्विक मौसमी चक्र ‘अल नीनो’ के दुष्प्रभावों को प्राथमिक कारण बताया है। सरकार का कहना है कि यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के प्रमुख गन्ना उत्पादक राष्ट्र भी मौसम की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और जमाखोरी पर नकेल कसने के लिए कई निर्णायक कदम उठाए हैं।

Sugar Prices India: देशभर में चीनी की खुदरा कीमतों का मौजूदा हाल और त्योहारी मांग का दबाव

उपभोक्ता मामले मंत्रालय के दैनिक मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ से प्राप्त नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, बीते एक महीने में चीनी के खुदरा मूल्यों में तेजी से बदलाव आया है। 20 जुलाई के आसपास जहां देश भर में चीनी की औसत खुदरा दर लगभग 48 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की जा रही थी, वहीं 20 अगस्त तक यह आंकड़ा बढ़कर औसतन 55.70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया। देश के कई महानगरों और स्थानीय किराना बाजारों में अच्छी गुणवत्ता वाली खुली चीनी 60 से 65 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ा है।
त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही मिठाई निर्माताओं, हलवाइयों, बेकरी उद्योग और शीतल पेय निर्माण इकाइयों की ओर से चीनी की थोक मांग कई गुना बढ़ जाती है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव और आगामी दुर्गा पूजा व दीपावली के मद्देनजर बाजार में खपत का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में कीमतों में हुआ यह इजाफा न केवल घरेलू रसोई का खर्च बढ़ा रहा है, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े छोटे-बड़े व्यापारियों की उत्पादन लागत में भी भारी वृद्धि कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का बयान: देश में 25 लाख टन का सरप्लस भंडार उपलब्ध

मूल्य वृद्धि पर स्थिति स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि देश में चीनी संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। भारत में प्रतिवर्ष घरेलू स्तर पर लगभग 280 लाख टन चीनी की खपत होती है, जबकि इस खपत को पूरी तरह सुरक्षित रखने के बाद भी हमारे पास 20 से 25 लाख टन का अतिरिक्त और अधिशेष बफर स्टॉक मौजूद है। देश की खाद्य सुरक्षा और नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और उनके संबंधित खाद्य आपूर्ति विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे मिलों और वेयरहाउसों में रखे चीनी के स्टॉक को तेजी से खुले बाजार में उतारें। इसके अलावा राज्य स्तर पर जिला प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियों को दैनिक आधार पर मंडियों की निगरानी करने को कहा गया है ताकि किसी भी क्षेत्र में कृत्रिम रूप से माल की कमी दिखाकर अनुचित मुनाफा कमाने की प्रवृत्ति को पूरी तरह रोका जा सके।

कीमतों में उछाल के पीछे दो मुख्य कारण: रेड रॉट बीमारी और अल नीनो का प्रभाव

केंद्र सरकार द्वारा कराए गए तकनीकी और कृषि आकलनों के अनुसार, चालू उत्पादन वर्ष में गन्ने की पैदावार प्रभावित होने के पीछे दो मुख्य जैविक और मौसमी कारक जिम्मेदार पाए गए हैं। पहला बड़ा कारण प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में गन्ने की फसल पर ‘रेड रॉट’ (लाल सड़न रोग) और ‘टॉप बोरर’ जैसे कीटों का गंभीर हमला होना है। इस फंगल संक्रमण के चलते गन्ने की आंतरिक संरचना सूख गई और पेराई के समय रस की रिकवरी दर में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई।
दूसरा बड़ा कारण प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में सक्रिय ‘अल नीनो’ मौसमी प्रभाव रहा है। अल नीनो के चलते मानसूनी हवाओं के वितरण में भारी असमानता देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप बुआई के शुरुआती महीनों में लंबे समय तक सूखा रहा और बाद के चरणों में कई उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश से जलभराव की स्थिति बन गई। इस मौसमी बदलाव ने न केवल भारत बल्कि ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रमुख वैश्विक गन्ना उत्पादक देशों में भी कुल पैदावार को प्रभावित किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्ची चीनी की कीमतें पिछले दो महीनों में लगभग 16 प्रतिशत तक उछल गईं।

इथेनॉल सम्मिश्रण नीति पर विपक्ष के आरोपों को सरकार ने बताया तथ्यहीन

विपक्षी राजनीतिक दलों और कुछ किसान यूनियनों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा था कि केंद्र सरकार की 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे का भारी डायवर्जन किया गया, जिसके कारण चीनी का उत्पादन गिर गया और बाजार में दाम 40 प्रतिशत तक बढ़ गए। विपक्ष का दावा था कि सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को प्राथमिकता देते हुए आम जनता के खाद्य सुरक्षा हितों की अनदेखी की है।
खाद्य मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि चालू चीनी वर्ष के दौरान इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन का कोटा पिछले वर्षों की तुलना में काफी नियंत्रित रखा गया था। सरकार ने पहले ही खाद्य उपयोग को प्राथमिकता देते हुए चीनी से सीधे इथेनॉल बनाने की मात्रा पर आवश्यक नियामक सीमाएं तय कर रखी थीं। ऐसे में इथेनॉल नीति को मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताना पूरी तरह निराधार और भ्रामक है, क्योंकि उत्पादन में आई कुल कमी का मुख्य आधार विशुद्ध रूप से प्राकृतिक आपदाएं और फसल बीमारियां हैं।

10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति और सरकारी उपाय

घरेलू बाजार में आपूर्ति को तत्काल सुदृढ़ करने और त्योहारी महीनों में आम जनता को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने कई ठोस व प्रशासनिक कदम उठाए हैं। सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों और प्रोसेसिंग मिलों के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के अस्थायी शुल्क-मुक्त आयात की अंतिम तिथि को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। इस आयातित कच्ची चीनी को तेजी से परिष्कृत करके खुले बाजार में उतारा जा रहा है ताकि थोक और खुदरा स्तर पर किसी भी प्रकार की आपूर्ति कमी न रहे।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा व्यापारियों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए स्टॉक होल्डिंग सीमा लागू करने के अधिकार दिए हैं। सभी चीनी मिलों को अपने मासिक रिलीज कोटे को अनिवार्य रूप से समय पर डिस्पैच करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और संदिग्ध गोदामों पर छापेमारी करने की पूरी छूट दी गई है।

Sugar Prices India: बाजार विशेषज्ञों का आकलन और आगामी दिनों में आम जनता को मिलने वाली राहत

कमोडिटी और कृषि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा शुल्क-मुक्त कच्ची चीनी के आयात और मिलों से अतिरिक्त मासिक कोटा जारी किए जाने का सकारात्मक प्रभाव अगले कुछ ही दिनों में खुदरा बाजार पर दिखने लगेगा। आपूर्ति सुचारू होते ही खुदरा दामों में चार से छह रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट आने का अनुमान है, जिससे त्योहारी खरीदारी के दौरान मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
दीर्घकालिक समाधान के दृष्टिकोण से कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों को गन्ने की ऐसी नई रोग-प्रतिरोधी तथा जलवायु-सहनशील किस्मों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है जो रेड रॉट जैसी फंगल बीमारियों से सुरक्षित रह सकें। सरकार की सक्रिय बाजार निगरानी और त्वरित प्रशासनिक हस्तक्षेपों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश के किसी भी हिस्से में आवश्यक रसोई वस्तुओं के दामों में अनियंत्रित तेजी न आने पाए और त्योहारी सीजन की मिठास हर भारतीय परिवार के लिए बरकरार रहे।

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