Monsoon Skin Care: बारिश में भीगने के बाद त्वचा पर होने लगी है खुजली? अपनाएं ये 7 असरदार टिप्स
Monsoon Skin Care: बारिश में भीगने के बाद त्वचा पर खुजली? अपनाएं ये 7 असरदार टिप्स
Monsoon Skin Care: झमाझम बारिश के इस मौसम में रिमझिम फुहारों के बीच भीगना किसे अच्छा नहीं लगता। मन अक्सर मयूर बनकर नाचने को मचल उठता है और लोग बिना सोचे-समझे इस सुहाने मौसम का लुत्फ उठाने निकल पड़ते हैं। हालांकि, आसमान से बरसने वाली यह राहत कई बार सेहत और खासकर हमारी त्वचा के लिए आफत भी बन जाती है। लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहना या बारिश के दूषित पानी के संपर्क में आना शरीर की रंगत और सेहत बिगाड़ने के लिए काफी होता है।
हवा में नमी की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाने के कारण फंगल इंफेक्शन, जिद्दी रैशेज और असहनीय खुजली जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। यदि आप भी इस मानसून का आनंद भरपूर तरीके से लेना चाहती हैं, तो यह बेहद जरूरी है कि पानी से घर लौटने के बाद अपनी त्वचा की खास देखभाल करें। कुछ आसान और बेहद असरदार आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके इन तमाम बरसाती दिक्कतों से सुरक्षित रहा जा सकता है।
Monsoon Skin Care: घर लौटते ही सबसे पहले करें स्नान
मूसलाधार बारिश के थपेड़े खाने के बाद जब आप अपने घर पहुंचें, तो सबसे पहला काम यह होना चाहिए कि आप तुरंत स्नान करें। इस दौरान ठंडे पानी के बजाय गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना सबसे फायदेमंद साबित होता है। गुनगुना पानी त्वचा पर बाहर से चिपकी हुई तमाम अशुद्धियों, प्रदूषण के कणों और हानिकारक बैक्टीरिया को आसानी से धो देता है। नहाते वक्त किसी बहुत तेज केमिकल वाले रसायन की जगह एक माइल्ड साबुन या हल्के बॉडी वॉश को प्राथमिकता दें। इससे शरीर की प्राकृतिक नमी भी सुरक्षित रहती है और संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
शरीर की नमी सुखाने में न करें कोताही
नहाने के बाद की प्रक्रिया उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि खुद को साफ करना। साफ और मुलायम तौलिए की मदद से अपने पूरे शरीर को कायदे से पोंछकर पूरी तरह सुखा लें। विशेष रूप से उन जगहों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है जहां पसीना और सीलन अधिक ठहरती है, जैसे कि गर्दन के आसपास का हिस्सा, बगल की त्वचा, पैरों की उंगलियों के बीच का खाली स्थान और शरीर की अन्य प्राकृतिक सिलवटें। यदि आपकी त्वचा बिना सूखी रह गई और आपने उसी पर नए कपड़े पहन लिए, तो फंगल इंफेक्शन और खुजली पैदा करने वाले कीटाणुओं को पनपने का खुला मौका मिल जाता है।
सूती और हवादार कपड़ों का करें चुनाव
इस मौसम में फैशन के फेर में पड़कर सिंथेटिक या तंग वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। हमेशा ऐसे कपड़ों को अपनी अलमारी से बाहर निकालें जो पूरी तरह से सूखे और साफ हों। कपड़ों के मामले में सूती यानी कॉटन के वस्त्रों का कोई मुकाबला नहीं है। कॉटन के कपड़े शरीर से निकलने वाले पसीने और बाहरी नमी को बहुत तेजी से सोख लेते हैं, जिससे आपकी त्वचा लंबे समय तक सूखी और सुरक्षित बनी रहती है। यदि अलमारी में रखे कपड़ों में हल्की सी भी सीलन या नमी महसूस हो, तो उन्हें पहनने की भूल बिल्कुल न करें।
पैरों और जूतों की देखभाल है बेहद जरूरी
केवल बदन ही नहीं, बल्कि मानसून के दिनों में आपके पैर भी खासे प्रभावित होते हैं। अगर बारिश के दौरान आपके जूते और मोजे पानी में पूरी तरह भीग चुके हैं, तो घर के अंदर कदम रखते ही सबसे पहले उन्हें अपने पैरों से उतारकर अलग कर दें। गीले मोजों को लंबे समय तक पहने रहने से पैरों की उंगलियों के बीच भयंकर खुजली, बदबू और गंभीर फंगल संक्रमण जड़ जमा लेता है। घर आने पर अपने पैरों को साबुन से अच्छी तरह धोएं, उन्हें किसी साफ तौलिए से रगड़कर सुखा लें और उसके बाद ही पूरी तरह सूखे हुए मोजे पहनें।
तंग कपड़ों से बनाएं दूरी
बारिश के इन दिनों में बहुत ज्यादा फिटिंग वाले या टाइट कपड़े पहनने से आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अत्यधिक कसे हुए वस्त्र पहनने से शरीर की हवा रुक जाती है, जिससे पसीना और नमी त्वचा पर ही चिपके रहते हैं। नमी का यह दायरा त्वचा पर रैशेज, लालिमा और असहनीय खुजली की दावत देता है। इस मौसम के अनुकूल अपने लिए हमेशा ढीले-ढाले, हल्के और हवादार कपड़े चुनें ताकि आपकी त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे और वह प्राकृतिक रूप से सूखी रह सके।
Monsoon Skin Care: एंटीसेप्टिक लिक्विड के इस्तेमाल में सावधानी
कई लोग बारिश में भीगने के बाद पानी में किसी एंटीसेप्टिक लिक्विड की कुछ बूंदें मिलाकर नहाना पसंद करते हैं। चिकित्सक सलाह के अनुसार यदि आप इसका उपयोग करते हैं, तो यह त्वचा पर मौजूद कुछ हद तक कीटाणुओं को साफ करने में मददगार हो सकता है। हालांकि, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसका प्रयोग रोज-रोज या जरूरत से ज्यादा मात्रा में कतई न करें, क्योंकि इससे आपकी त्वचा अत्यधिक रूखी और बेजान हो सकती है। इसके अलावा यदि आपकी त्वचा पर पहले से कोई खुला घाव, गहरी जलन या पुरानी स्किन की समस्या है, तो बिना डॉक्टर की हरी झंडी के इस तरह के किसी भी रसायन का उपयोग करने से बचना चाहिए।
Monsoon Skin Care: खुजली होने पर संयम रखें और डॉक्टर की सलाह लें
बरसात के दिनों में तमाम सावधानियों के बावजूद यदि आपकी त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आते हैं, छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं या खुजली शुरू हो जाती है, तो अपनी उंगलियों को उस स्थान पर बार-बार रगड़ने से रोकें। बार-बार खुजलाने की यह आदत संक्रमण को ठीक करने के बजाय उसे और अधिक तेजी से पूरे शरीर में फैला सकती है। यदि यह परेशानी दो या तीन दिनों तक लगातार बनी रहती है, या फिर त्वचा पर घाव जैसे हालात बनने लगते हैं, तो बिना एक पल गंवाए किसी अच्छे त्वचा विशेषज्ञ यानी डर्मेटोलॉजिस्ट के पास जाएं और उचित परामर्श लें। समय रहते उठाया गया यह कदम आपकी सेहत को किसी बड़ी मुसीबत से बचा सकता है।
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